Patna Crime: सरकार की नाक के नीचे खाकी के कारनामे से निकला इंसाफ का जनाजा, मोकामा में पुलिस ने रची साजिश की जाल! पुलिस की स्याह कार्यशैली के विरोध में सड़क पर उतरे लोग, घटना जान कर कलेजा कांप जाएगा आपका
Patna Police: मोकामा थाना क्षेत्र में शराब और हथियार बरामदगी के मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।नगर परिषद कर्मी रंजन कुमार के परिजनों ने पुलिस पर पड़ोसी से मिलीभगत कर उन्हें झूठे मामले में फंसाने का आरोप लगाया
Patna Crime: बिहार पुलिस के आला अफसर, सूबे के डीजीपी विनय कुमार, मंचों और बैठकों से लगातार खाकी पहनने वालों को तहजीब बरतने और अपने बर्ताव को सुधारने की नसीहत देते नहीं थकते। लेकिन डीजीपी की इन नसीहतों का उन मुट्ठीभर खाकीवालों पर क्या असर होना था, जिनकी फितरत में ही कानून की धज्जियां उड़ाना शुमार है। सरकार की नाक के नीचे, राजधानी पटना से सटे मोकामा के आंचल में खाकी की साख पर जो बदनुमा दाग लगा है, उसने महकमे के उन तमाम दावों की कलई खोलकर रख दी है जिनमें सुधार की दुहाई दी जाती है।मोकामा थाना क्षेत्र की फिजाओं में इस वक्त पुलिस की मंशा और उसकी शातिर कार्यशैली को लेकर ऐसे गंभीर सवाल तैर रहे हैं, जो सीधे तौर पर इंसाफ की हत्या और पुलिसिया तंत्र के दुरुपयोग की दास्तां बयां करते हैं।
गुप्त सूचना का ढोंग और गलत छापेमारी की मास्टर खाकी!
किस्सा कुछ यूं है कि 7 जुलाई की शाम साढ़े आठ बजे मोकामा थाने के पुलिसवालों को एक खास गुप्त सूचना मिलती है। इत्तिला यह थी कि चिंतामणिचक के रहने वाले रंजन कुमार, जो नगर परिषद में गार्ड की नौकरी कर आजीविका चलाते हैं, वे सफेद झोले में भरकर अवैध शराब का ले जा रहे हैं। फिर क्या था, खाकी का तामझाम हरकत में आता है। ठीक दस मिनट बाद, यानी 8 बजकर 40 मिनट पर पुलिस रंजन के घर पर धावा बोलती है। तलाशी ली जाती है, कोना-कोना खंगाला जाता है, मगर हाथ कुछ नहीं लगता।
अब यहीं से शुरू होता है उस फितरत का खेल जिसे कानून की भाषा में साजिश और आम जुबान में फंसाने की कला कहा जाता है। पुलिस की नजर रंजन के घर के ठीक सामने एक खुली हुई, जर्जर और विवादित इमारत पर पड़ती है। पुलिस का दावा है कि रंजन उस घर की तरफ देख रहा था। जब पूछताछ हुई, तो रंजन ने मासूमियत से स्वीकार किया कि वह खुला घर भी उसी का है, जहां वह अपनी साइकिल वगैरह सुरक्षित रखता है। पुलिस फौरन उस खण्डहरनुमा जगह पर टूट पड़ती है और जादू की तरह वहां एक सफेद झोला बरामद कर लेती है। उस झोले से 20 टेट्रा पैक शराब, एक देसी कट्टा और दो जिंदा कारतूस बरामद होने का दावा ठोक दिया जाता है।
सलाखों के पीछे बेगुनाही और अर्थी पर भाई की लाश
रंजन के पास कोई जवाब न होने (या यों कहें कि खाकी के तयशुदा मंसूबों के आगे उनकी एक न चलने) पर उन्हें आरोपी बनाकर फौरन गिरफ्तार कर लिया जाता है और घर-परिवार को इस की खबर दे दी जाती है। जैसे ही यह बुरी खबर घर की चौखट तक पहुंचती है, रंजन के बड़े भाई का दिल यह सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाता। हार्ट अटैक के एक ही झटके में उनकी रूह जिस्म से जुदा हो जाती है और घर में खुशियों की जगह मातम का कोहराम मच जाता है। रंजन, जो महज़ चंद रुपयों की खातिर नगर परिषद में चौकीदारी का फर्ज निभाते थे, उनका कोई आपराधिक इतिहास तक नहीं था। लेकिन पड़ोसियों के साथ चल रही पुरानी रंजिश और खाकी की इस कथित साठगांठ ने एक हंसते-खेलते परिवार को सड़क पर ला दिया।
गुस्साए लोगों का सैलाब और खाकी के खिलाफ जंग
भाई की मौत और रंजन की गिरफ्तारी की खबर इलाके में आग की तरह फैल गई। गुस्से से उबलते परिजनों और स्थानीय लोगों ने खुलकर पुलिसिया कार्रवाई पर उंगलियां उठानी शुरू कर दीं। परिजनों का साफ आरोप है कि पुलिस ने उनके दुश्मनों से मिलकर इस मनगढ़ंत कहानी को गढ़ा है और एक बेकसूर को जुर्म के कटघरे में खड़ा कर दिया है। इंसाफ की आस में परिजनों ने बाढ़ के एसडीपीओ और ग्रामीण एसपी समेत आला कमान को 6 सूत्री शिकायती पत्र सौंपकर निष्पक्ष जांच और इस झूठे मुकदमे को खत्म करने की गुहार लगाई।
मामले की नज़ाकत को भांपते हुए बाढ़ पूर्वी के प्रभारी एसडीपीओ आयुष श्रीवास्तव ने चिंतामणिचक पहुंचे। घंटों तक चली इस तहकीकात में कई ग्रामीणों के बयान कलमबद्ध किए गए। हालांकि, पुलिस महकमे की तरफ से मीडिया के सामने कोई भी आधिकारिक बयान देने से कतराया गया, लेकिन ग्रामीण एसपी ने निष्पक्ष जांच का भरोसा जरूर दिलाया है।
नगर परिषद में तालाबंदी और काले बिल्ले का रोष
इस नाइंसाफी के खिलाफ मोकामा नगर परिषद का कलेजा भी दहल उठा। आज सुबह- नगर परिषद के तमाम लोगों ने अपने दफ्तरों के दरवाजों पर ताले जड़ दिए और अनिश्चितकालीन हड़ताल का बिगुल फूंक दिया। हाथों में काले बिल्ले बांधे सैकड़ों की संख्या में ये लोग सड़कों पर उतर आए। "पुलिस प्रशासन हाय-हाय" के गगनभेदी नारों के साथ विरोध मार्च निकालते हुए ये सभी कर्मचारी मोकामा थाने के रास्ते नगर अध्यक्ष के आवास तक पहुंचे, ताकि उन्हें ज्ञापन सौंपकर इस जुल्म के खिलाफ इंसाफ की भीख मांगी जा सके। आरोप तो मोकामा थानाध्यक्ष पर भी है।
यह पूरा वाकया इस बात की गवाही देता है कि जब पुलिस विभाग ही शिकंजी कसने पर उतर आए, तो फिर बेगुनाहों की फरियाद सुनने वाला इस दुनिया में कौन बचता है! लोगो ने डीजीपी साहब से गुहार लगाई है कि अब इस मामले को देखिए...जिससे दूध का दूध पानी का पानी हो सके
रविशंकर कुमार की रिपोर्ट