NEET-UG 2026 में बड़ा फर्जीवाड़ा बेनकाब, EOU के रडार पर डॉक्टरों का स्कॉलर नेटवर्क

Bihar Crime: पटना में NEET-UG 2026 परीक्षा धांधली मामले की जांच कर रही आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU को पूछताछ के दौरान बड़ा सुराग हाथ लगा है।

NEET-UG 2026 में बड़ा फर्जीवाड़ा बेनकाब- फोटो : social Media

Bihar Crime: पटना में NEET-UG 2026 परीक्षा धांधली मामले की जांच कर रही आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU को पूछताछ के दौरान बड़ा सुराग हाथ लगा है। रिमांड पर लिए गए आरोपी डॉक्टर डॉ. रविशंकर और अश्विनी से कड़ी पूछताछ के बाद एजेंसी को कथित ‘स्कॉलर’ नेटवर्क में शामिल कई डॉक्टरों की जानकारी मिली है। पूछताछ पूरी होने के बाद दोनों आरोपियों को वापस जेल भेज दिया गया है।

सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपियों ने सात से आठ ऐसे डॉक्टरों की पहचान की है, जिनके कथित तौर पर फर्जी तरीके से परीक्षा में बैठने वाले स्कॉलर के रूप में इस्तेमाल किए जाने का संदेह है। EOU ने संदिग्ध डॉक्टरों और परीक्षार्थियों के रोल नंबर तथा तस्वीरें आरोपियों के सामने रखीं, जिसके बाद कथित फर्जी परीक्षार्थियों की पहचान कराई गई।

जांच की आंच अब PMCH, NMCH, गया के ANMCH, बेतिया मेडिकल कॉलेज और पावापुरी मेडिकल कॉलेज समेत कई संस्थानों से जुड़े MBBS डॉक्टरों तक पहुंच गई है। EOU इन चिन्हित डॉक्टरों की भूमिका की जांच के साथ गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।

जांच में सामने आया है कि गिरोह कथित तौर पर परीक्षा फॉर्म भरने के समय ही असली अभ्यर्थी और स्कॉलर के बीच सेटिंग कर लेता था। इसके बाद आधार एजेंटों और CSC संचालकों की कथित मदद से बायोमेट्रिक में हेरफेर किया जाता था। असली अभ्यर्थी की जगह स्कॉलर का बायोमेट्रिक अपडेट कराने और पहचान मिलाने के लिए फोटो मिक्सिंग का सहारा लिया जाता था।

इस पूरे खेल में प्रति अभ्यर्थी कथित तौर पर 12 से 30 लाख रुपये तक की रकम वसूले जाने की बात सामने आई है। इतना ही नहीं, स्कॉलर डॉक्टरों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने और वापस लाने के लिए वाहनों की व्यवस्था भी गिरोह द्वारा किए जाने का आरोप है।

अब EOU की जांच का दायरा और बढ़ गया है। एजेंसी कथित नेटवर्क के एजेंटों, फर्जी परीक्षार्थियों, आधार एजेंटों और अन्य मददगारों की भूमिका खंगाल रही है। अगर पूछताछ में सामने आए नामों और आरोपों की पुष्टि होती है, तो NEET-UG 2026 धांधली मामले में कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। इस पूरे प्रकरण ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा की पारदर्शिता और परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।