ED Raid :सहायक अभियंता पर निगरानी का शिकंजा, तीन ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी,लाखों की काली कमाई का किला ध्वस्त

ED Raid: बिहार की राजधानी और गया जिले में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने एक सनसनीखेज कार्रवाई को अंजाम दिया।...

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो का तीन ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी- फोटो : Google

ED Raid:  बिहार की राजधानी और गया जिले में  देर शाम निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने एक सनसनीखेज कार्रवाई को अंजाम दिया। ग्रामीण कार्य विभाग के मोकामा अवर प्रमंडल में पदस्थापित सहायक अभियंता नागेंद्र कुमार के विरुद्ध प्रत्यानुपातिक धनार्जन का कांड संख्या-71/25 दर्ज कर धावा बोल दिया गया। आरोप है कि अभियंता की 125.69 प्रतिशत आय से अधिक संपत्ति सामने आई है, जिसकी रकम लगभग 73.32 लाख रुपये बताई जा रही है।

निगरानी ब्यूरो की तीन विशेष टीमें एक साथ पटना, मोकामा और गया जिले के कुजाप गांव में दबिश देती रहीं। पटना के श्रीकृष्णापुरी इलाके में किराए के फ्लैट, मोकामा स्थित कार्यालय और गया के ग्रामीण ठिकाने पर छापेमारी से इलाके में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोग रातभर पुलिस की गहमागहमी और कागजों की पड़ताल देखते रहे।

सूत्रों का दावा है कि छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेज, जमीन-जायदाद के डीड पेपर, बैंक खातों के विवरण और नकदी के ठिकाने खंगाले जा रहे हैं। ब्यूरो की प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया कि अभियंता ने बिहार के अलावा बाहर के राज्यों में भी निवेश किया है। गयाजी के कुजाप गांव से मिली जानकारी के मुताबिक, यहां उनके नजदीकियों के नाम पर भी संपत्ति और निवेश की परतें खुल रही हैं।

 कुछ ही दिन पहले ग्रामीण कार्य विभाग के अधीक्षण अभियंता विनोद कुमार राय को ईओयू ने लाखों के नोट जलाने वाले कांड में गिरफ्तार किया था। अब उसी विभाग के सहायक अभियंता नागेंद्र कुमार पर निगरानी की कार्रवाई ने विभागीय तंत्र की पोल खोल दी है।

छापेमारी में यह भी खुलासा हुआ है कि नागेंद्र कुमार और उनके परिजनों के नाम पर करीब दो दर्जन रजिस्ट्री दस्तावेज मिले हैं। जांच एजेंसी को संदेह है कि उन्होंने ओड़िसा और बिहार के रोसड़ा में निर्माण फैक्ट्रियां भी खड़ी की हैं, जो पार्टनरशिप में चलाई जा रही हैं।

निगरानी सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे मामले में जल्द ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) की धाराओं में डीए (आय से अधिक संपत्ति) का अलग मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। देर रात तक तीनों ठिकानों पर कागजों की छानबीन जारी थी और हर नए दस्तावेज के साथ अभियंता की काली कमाई की गाथा और गहरी होती जा रही थी।सरकारी नौकरी के नाम पर रिश्वत की कमाई से साम्राज्य खड़ा करने वाले अभियंता नागेंद्र अब निगरानी के शिकंजे में हैं।