Patna Traffic Police: पटना की सड़कों पर ट्रैफिक पुलिस की हाथ में बेड़ी! ADG के फरमान से सिपाही-ASI बेबस, नंबर प्लेट मोड़कर बेखौफ लोग दौड़ रहे वाहन, बाईपास पर खुलेआम हो रही ओवरलोडिंग, देख लीजिए तस्वीरें

Patna Traffic Police: राजधानी में ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर एक अजीबोगरीब स्थिति सामने आ रही है। एडीजी यातायात सुधांशु कुमार के निर्देश के बाद सिपाही और एएसआई स्तर के ट्रैफिक कर्मियों के सामने मानो कार्रवाई का रास्ता ही बंद हो गया है।...

पटना की सड़कों पर ट्रैफिक पुलिस के बंधे हाथ- फोटो : reporter

Patna Traffic Police: राजधानी पटना की सड़कों पर यातायात व्यवस्था का ऐसा मंजर सामने आ रहा है, जिसने कानून के खनक और ट्रैफिक इंतजाम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एडीजी यातायात सुधांशु कुमार के निर्देश के बाद सिपाही, पीसीटी और एएसआई स्तर के यातायातकर्मियों को वाहनों को रोककर चालान काटने से दूर रहने की हिदायत दी गई है। निर्देश के मुताबिक निचले स्तर के पुलिसकर्मी यातायात को सुचारू बनाए रखने पर ध्यान देंगे, जबकि वाहनों को रोकने और कार्रवाई की जिम्मेदारी इंस्पेक्टर व दरोगा स्तर के अधिकारियों की होगी।

इस फरमान का असर अब राजधानी की सड़कों पर साफ दिखाई देने लगा है। ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी के बावजूद कई वाहन चालक बेखौफ होकर नियमों की धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं। आरोप है कि कार्रवाई के डर से निचले स्तर के पुलिसकर्मी वाहन रोकने से परहेज कर रहे हैं। इसका फायदा उठाकर मनमाने ढंग से वाहन चलाने वालों का हौसला बढ़ता दिखाई दे रहा है।

पटना के कई इलाकों में ऐसे वाहन नजर आ रहे हैं, जिनकी नंबर प्लेट को मोड़कर या टेप से ढककर पहचान छिपाने की कोशिश की जा रही है। कई लोग बिना हेलमेट सड़क पर फर्राटा भर रहे हैं। सबसे गंभीर तस्वीर पटना बाईपास इलाके से सामने आ रही है, जहां ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी के बीच ओवरलोडिंग वाले ट्रक और भारी वाहन खुलेआम गुजरते दिखाई दे रहे हैं। पुलिसवाले अपने अधिकारी के आदेश को मानते हुए खुलेआम कानून की धज्जी उड़ने को देखने के लिए बाध्य हैं।

सवाल यह है कि अगर सड़क पर नियमों की खुली खिल्ली उड़ रही है तो तत्काल रोक लगाने की जिम्मेदारी किसकी है? राजधानी के ज्यादातर ट्रैफिक पोस्ट पर सिपाही और एएसआई स्तर के जवानों की तैनाती रहती है। लेकिन निर्देश के बाद अगर इन्हीं पुलिसकर्मियों को वाहन रोकने पर कार्रवाई का डर सताएगा, तो सड़क पर यातायात नियमों का पालन आखिर कौन कराएगा?

मामला महज चालान काटने तक सीमित नहीं है। मुड़ी हुई नंबर प्लेट पुलिस की निगाह से बचने का जरिया बन सकती है, बिना हेलमेट सफर हादसे का सबब बन सकता है और ओवरलोडिंग सड़क पर चलने वाले हर शख्स की जान जोखिम में डाल सकती है। ऐसे में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर तत्काल लगाम लगाना जरूरी है।

एडीजी यातायात के निर्देश का मकसद व्यवस्था को बेहतर बनाना और जिम्मेदारी का स्पष्ट बंटवारा करना हो सकता है। लेकिन जमीन पर इसका उलटा असर दिखाई देने का आरोप लग रहा है। अगर निचले स्तर के पुलिसकर्मी कार्रवाई नहीं कर सकते और ऊंचे स्तर के अधिकारी हर सड़क और हर वाहन पर तत्काल मौजूद नहीं रह सकते, तो नियम तोड़ने वालों के लिए यह स्थिति खुली छूट जैसा माहौल पैदा कर सकती है।

पटना की सड़कों पर अब बड़ा सवाल यही है क्या ट्रैफिक पुलिस सिर्फ तमाशबीन बनकर रह जाएगी या नियम तोड़ने वालों पर कानून का डंडा फिर से उतनी ही सख्ती से चलेगा? राजधानी की सड़कें किसी की जागीर नहीं हैं। नंबर प्लेट छिपाकर, बिना हेलमेट और क्षमता से अधिक माल लादकर दौड़ते वाहन सिर्फ यातायात नियम नहीं तोड़ रहे, बल्कि सड़क पर चलने वाली तमाम जिंदगियों को खतरे में डाल रहे हैं। जरूरत इस बात की है कि जिम्मेदारी की तस्वीर साफ हो और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई का पहरा कमजोर न पड़े।

पटना से रंजीत कुमार की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट