Bihar Liquor Ban: आठ ब्रीफकेस, डेढ़ लाख की शराब और डॉक्टरों की होम डिलीवरी! नेहा की कहानी ने खोला फैमिली सिंडिकेट का ये राज

Bihar Liquor Ban: बिहार में शराबबंदी का सरकारी फरमान जितना सख्त है, उसके बावजूद शराब की तस्करी के रास्ते उतने ही दिलकश नजर आ रहे हैं।

बिहार में ब्रीफकेस में शराब- इंजीनियर देवर - डॉक्टर्स को सप्लाई- फोटो : reporter

Bihar Liquor Ban: बिहार में शुद्ध शाकाहारी शराबबंदी का ढोंग भी कितना हसीन है! राज्य सरकार चिल्ला-चिल्लाकर कसम खाती है कि बिहार में मदिरा का एक कतरा भी मयस्सर नहीं, लेकिन समस्तीपुर और दरभंगा की ये मुकद्दर की सिकंदर बहनें चिल्ला-चिल्लाकर कह रही हैं-हजूर, जरा होम डिलीवरी की स्पीड तो देखिए!

पढ़ाई-लिखाई गई भाड़ में, धंधा चले फर्स्ट क्लास

दरभंगा के प्रतिष्ठित कॉलेज से स्नातक की शिक्षा हासिल करने वाली मैडम नेहा झा ने जब देखा कि डिग्री से तो सिर्फ बेरोजगारी की नौबत आती है, तो उन्होंने अपनी काबिलियत और कम्युनिकेशन स्किल्स का इस्तेमाल सही जगह करने का फैसला किया। दिल्ली से दरभंगा आने वाली ट्रेन के एसी फर्स्ट क्लास के डिब्बे में जब मैडम अपने बीटेक पास बड़ी बहन के इंजीनियर देवर ईशान कुमार के साथ पधारीं, तो किसी को गुमान भी नहीं था कि इन साहिबा के वीआईपी सामान में आठ-आठ चमकते ब्रीफकेस और दो बैग भरे पड़े हैं। पर अफसोस! जीआरपी वालों ने सारा मुआयना खराब कर दिया। जब ब्रीफकेस खुले, तो उसमें से न किताबें निकलीं, न कपड़े... निकली तो डेढ़ लाख की ब्रांडेड मदिरा!

फैमिली बिजनेस-हम साथ-साथ हैं... जेल में!

वाह रे कुनबा! इसे कहते हैं फैमिली ओरिएंटेड एंटरप्राइज। पापा पंकज झा पहले ही शराबखोरी-तस्करी के सबाब में जेल का दीदार कर चुके हैं। दूसरी बहन निशु झा दरभंगा पुलिस की खातिरदारी स्वीकार करके दो-दो बार जेल की हवा खा चुकी है। अब सबसे छोटी होनहार बेटी नेहा झा ने परिवार की इस महान परंपरा को आगे बढ़ाने का बीड़ा उठाया। बीटेक की डिग्री जेब में रखकर शॉर्टकट अमीर बनने की फिराक में घुसा इंजीनियर देवर ईशान भी इस जाली फरेब का मुकम्मल साझेदार बन बैठा।

डॉक्टरों तक सप्लाई और वीआईपी नेटवर्क

गाँव के मुखबर  की मानें तो मैडम नेहा का नेटवर्क कोई ऐरा-गैरा नहीं था। मैडम तो अपनी तीखी जुबान और हाई-प्रोफाइल रसूख के दम पर सीधे सभ्य और शरीफ वर्ग (सुना है डॉक्टरों तक!) को होम डिलीवरी देती थीं। जीआरपी इंस्पेक्टर बीरबल कुमार भले ही कह रहे हों कि यह नेहा की पहली गिरफ्तारी है, लेकिन मैडम की इस प्रोफेशनल पैकेजिंग और 8-8 ब्रीफकेस की तैयारी देखकर तो नौसिखिया भी बता दे कि यह मैडम का कोई पहला कारनामा नहीं था। यह तो कई बार चले आ रहे सफल ऑपरेशन्स की महज एक बदकिस्मत खेप थी जो पकड़ी गई। नेहा मैडम की मां पुनीता झा आंगनबाड़ी केंद्र में सेविका हैं।  दादा शशिभूषण झा बारी पंचायत के पैक्स अध्यक्ष रह चुके हैं।

शराबबंदी का जनाज़ा 

बिहार में शराबबंदी का जनाज़ा तो आए दिन उठता है, लेकिन जब एसी फर्स्ट क्लास में बीटेक इंजीनियर और ग्रेजुएट बेटियाँ ब्रीफकेस भर-भरकर ज़हर की सप्लाई करने लगें, तो समझ जाइए कि सिस्टम कितना चाक-चौबंद है! फिलहाल तो यह पूरा पारिवारिक सिंडिकेट न्यायिक हिरासत की ठंडी सलाखों के पीछे आराम फरमा रहा है। पुलिस रिमांड की अर्जी देने की तैयारी में है ताकि इस वीआईपी सिंडिकेट के बाकी शरीफज़ादों का नकाब भी उतारा जा सके। बहरहाल अगर जांच में सचमुच कोई बड़ा नेटवर्क निकलता है, तो फिर कहानी सिर्फ ‘आठ ब्रीफकेस और डेढ़ लाख की शराब’ की नहीं होगी। असली कहानी यह होगी कि बिहार की शराबबंदी के बीच तस्करों ने कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए कितने ‘फर्स्ट क्लास’ रास्ते तलाश रखे हैं।