Bihar Crime: बिहार में भीड़ का तालिबानी इंसाफ! झपटमारी के आरोपियों को पेड़ से बांधा, आधा सिर मुंडाकर किया सरेआम बेइज्जत

Bihar Crime:झपटमारी के आरोप में पकड़े गए दो युवकों के साथ ग्रामीणों ने कानून अपने हाथ में लेते हुए जमकर ज्यादती की।...

भीड़ का तालिबानी इंसाफ! - फोटो : reporter

Bihar Crime: वैशाली के राजापाकर से कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाला सनसनीखेज मामला सामने आया है। महुआ थाना क्षेत्र में झपटमारी के आरोप में पकड़े गए दो युवकों के साथ ग्रामीणों ने कानून अपने हाथ में लेते हुए जमकर ज्यादती की। गुस्साई भीड़ ने दोनों कथित आरोपियों को पेड़ से बांध दिया और उनका आधा सिर मुंडाकर सरेआम बेइज्जत किया। इस दौरान मौके पर तमाशबीनों की भीड़ जुटी रही। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों युवकों को हिरासत में लेकर थाने ले गई।

बताया जाता है कि 4 सितंबर को एक महिला के गले से सोने का जितिया झपटकर बाइक सवार दो युवक फरार हो गए थे। वारदात के बाद इलाके में खलबली मच गई। ग्रामीणों ने कथित तौर पर दोनों युवकों की पहचान कर उन्हें पकड़ लिया। इसके बाद भीड़ का गुस्सा भड़क उठा और आरोपियों को पुलिस के हवाले करने के बजाय लोगों ने खुद ही सजा देने का फैसला कर लिया।

ग्रामीणों ने दोनों युवकों को पेड़ से बांध दिया। इसके बाद उनके सिर का आधा हिस्सा मुंडवाकर उन्हें सार्वजनिक तौर पर अपमानित किया गया। इस दौरान भीड़ में मौजूद लोगों ने पूरी घटना को देखा। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने हस्तक्षेप कर दोनों युवकों को अपने कब्जे में लिया।पूछताछ में एक युवक ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि झपटमारी के बाद सोने का जितिया करीब 5 हजार रुपये में बेच दिया गया था। पुलिस की मदद से संबंधित ज्वेलर के यहां छापेमारी कर दोनों जितिया बरामद किए जाने की बात सामने आई है।

सूचना मिलते ही डायल-112 की टीम मौके पर पहुंची और दोनों युवकों को महुआ थाना ले गई। पुलिस अब पूरे मामले की तफ्तीश कर रही है। झपटमारी की वारदात में युवकों की संलिप्तता की जांच के साथ-साथ उन्हें पेड़ से बांधकर सार्वजनिक रूप से अपमानित करने वालों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

यह घटना एक बार फिर सवाल खड़ा करती है कि अपराध के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर भीड़ को कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जा सकती। आरोपी कितना भी संगीन जुर्म का संदिग्ध क्यों न हो, उसके खिलाफ कार्रवाई की जिम्मेदारी पुलिस और अदालत की है, न कि भीड़ की।

रिपोर्ट- ऋषभ कुमार