भाजपा को बड़ा झटका, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष का इस्तीफा, IPS की नौकरी छोड़कर बीजेपी में बने थे फायरब्रांड नेता
अन्नामलाई ने 2021 से 2025 तक तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष रहते हुए कई आक्रामक अभियानों का नेतृत्व किया था। उन्होंने युवाओं और सोशल मीडिया पर मजबूत लोकप्रियता हासिल की।
Annamalai : भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने तमिलनाडु के पूर्व भाजपा अध्यक्ष के. अन्नामलाई का पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से दिया गया इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। कुप्पुसामी अन्नामलाई, जो पूर्व IPS अधिकारी थे और BJP में शामिल होने के बाद राजनीति में मशहूर हुए, उन्हें उनके समर्थक "सिंघम" कहते हैं। वह 2020 में BJP में शामिल हुए और अगले साल उन्हें एल मुरुगन की जगह स्टेट प्रेसिडेंट बनाया गया, जिन्हें केंद्रीय मंत्री बनाया गया था।
पिछले कुछ दिनों से अन्नामलाई के बीजेपी छोड़ने की अटकलें तेज थीं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि वे पार्टी में अपना भविष्य नहीं देख रहे हैं। तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष पद से हटने और नैनार नागेंद्रन को नई जिम्मेदारी मिलने के बाद से अन्नामलाई अपेक्षाकृत कम सक्रिय नजर आ रहे थे।
अन्नामलाई ने 2021 से 2025 तक तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष रहते हुए कई आक्रामक अभियानों का नेतृत्व किया था। उन्होंने युवाओं और सोशल मीडिया पर मजबूत लोकप्रियता हासिल की। हालांकि 2026 विधानसभा चुनाव के दौरान वे पार्टी में अलग थलग पड़ते दिखाई दिए।
भाजपा से मतभेद
सूत्रों के अनुसार, AIADMK के साथ बीजेपी के गठबंधन और पार्टी के कुछ नेताओं को केंद्रीय नेतृत्व द्वारा अहम जिम्मेदारियां दिए जाने से भी अन्नामलाई नाराज बताए जा रहे हैं। हाल ही में त्रिभाषा नीति को लेकर उनकी टिप्पणी ने भी पार्टी के भीतर मतभेद की अटकलों को और तेज कर दिया। फिलहाल अन्नामलाई या बीजेपी की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन तमिलनाडु की राजनीति में इस घटनाक्रम को बड़े बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई
पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई ने साल 2019 में भारतीय जनता पार्टी जॉइन की थी। कर्नाटक कैडर के पुलिस अधिकारी रहे अन्नामलाई ने नौकरी छोड़ राजनीति में कदम रखा और जल्द ही अपनी तेजतर्रार शैली, आक्रामक भाषणों और सोशल मीडिया पकड़ के कारण लोकप्रिय हो गए। 2021 में उन्हें तमिलनाडु बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। उनके नेतृत्व में बीजेपी ने राज्य में कई पदयात्राएं, भ्रष्टाचार विरोधी अभियान और द्रविड़ दलों के खिलाफ आक्रामक राजनीति की। युवा वर्ग के बीच उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है।