Bada Mangal: पांचवां बड़ा मंगल आज! अष्टचिरंजीव- भगवान शिव के रुद्रावतार श्रीहनुमान का आराधना से खुल सकते हैं सौभाग्य के द्वार, संकट, भय और बाधाओं से मिलेगी मुक्ति, संकटमोचन की विशेष कृपा पाने का दुर्लभ अवसर

Bada Mangal:ज्येष्ठ मास के पंचम बड़ा मंगल पर अष्टचिरंजीव- भगवान शिव के रुद्रावतार श्रीहनुमान की उपासना अत्यंत पुण्यप्रद मानी गई है।..

भय और बाधाओं से मिलेगी मुक्ति- फोटो : Hiresh Kumar

Bada Mangal: सनातन धर्म में ज्येष्ठ मास के मंगलवारों का अत्यंत विशिष्ट एवं पुण्यदायी महत्व माना गया है। इन पावन तिथियों को बड़ा मंगल अथवा बुढ़वा मंगल के नाम से अभिहित किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ मास में श्रद्धा, भक्ति और समर्पण भाव से भगवान हनुमान की आराधना करने पर साधक के जीवन में व्याप्त संकट, भय, बाधाएं और नकारात्मक शक्तियां दूर होने लगती हैं। आज ज्येष्ठ मास का पांचवां बड़ा मंगल है, जिसे हनुमान उपासना के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।

शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधिवत पूजन, व्रत, सुंदरकांड पाठ तथा दान-पुण्य करने से भक्तों को प्रभु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। मान्यता है कि संकटमोचन हनुमान अपने भक्तों के कष्टों का निवारण कर जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और यश का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। यही कारण है कि बड़े मंगल के अवसर पर मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है और भक्त विशेष नैवेद्य अर्पित कर प्रभु का आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।

भगवान हनुमान को बूंदी के लड्डू अत्यंत प्रिय माने गए हैं। धार्मिक मान्यता है कि बड़े मंगल के दिन श्रद्धापूर्वक लड्डुओं का भोग लगाने से प्रभु प्रसन्न होते हैं और साधक की मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

भुना हुआ चना तथा गुड़ अर्पित करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। पूजन के उपरांत इस प्रसाद का वितरण करने से सुख-समृद्धि, सौभाग्य और पारिवारिक मंगल में वृद्धि होने की मान्यता है।हनुमान जी को  तुलसी अर्पित करने का विधान बताया गया है। श्रद्धा से तुलसी दल समर्पित करने पर दिव्य कृपा प्राप्त होने का विश्वास किया जाता है।केला, आम तथा अन्य ऋतुजन्य फलों का भोग भी अत्यंत शुभ माना जाता है। पूजन के पश्चात इन फलों को प्रसाद स्वरूप वितरित करने से पुण्यफल की प्राप्ति होती है।हनुमान उपासना में केसरिया सिंदूर और चमेली के तेल का विशेष महत्व है। बड़े मंगल पर सिंदूर अर्पित कर चमेली तैल का दीप प्रज्वलित करने से जीवन की विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं तथा साहस, पराक्रम और आत्मबल में वृद्धि होती है।

बड़े मंगल के दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। हनुमान चालीसा, बजरंग बाण अथवा सुंदरकांड का श्रद्धापूर्वक पाठ करें। लाल पुष्प, सिंदूर, चमेली तैल और प्रिय नैवेद्य अर्पित करें। अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्नदान, सेवा तथा जरूरतमंदों की सहायता भी अवश्य करें।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार निष्कपट भाव से की गई आराधना, सेवा और दान-पुण्य से भगवान हनुमान की विशेष कृपा प्राप्त होती है तथा जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और मंगल का आगमन होता है। ज्येष्ठ मास में अभी 9 जून, 16 जून और 23 जून को बड़े मंगल शेष हैं, अतः श्रद्धालु इन तिथियों पर भी विशेष पूजन-अर्चन कर पुण्यफल अर्जित कर सकते हैं।