Chandra Grahan 2026: इस दिन लगेगा साल का पहला चंद्र ग्रहण, भूलकर भी न करें ये काम, वरना साल भर झेलना पड़ेगा संकट!

Chandra Grahan 2026: चंद्र ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले सूतक काल लग जाता है। सूतक काल सुबह 9 बजकर 39 मिनट प्रारंभ होगा जिसका समापन ग्रहण के साथ होगा। सूतक काल में पूजा-पाठ, हवन, शुभ कार्य या नए कार्य की शुरुआत करना वर्जित माना जाता है।

कब है चंद्र ग्रहण - फोटो : social media

Chandra Grahan 2026: साल 2026 की शुरुआत के साथ त्योहारों और खगोलीय घटनाओं का अनोखा संयोग देखने को मिल रहा है। इस बार रंगों का पर्व होली और साल का पहला चंद्र ग्रहण लगभग एक ही समय पर पड़ रहे हैं, जिससे होली की तारीख को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बन गई है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, ग्रहण के कारण इस बार रंगों वाली होली 3 मार्च के बजाय 4 मार्च को मनाई जाएगी। दरअसल, 3 मार्च 2026 को पूर्ण चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है, जो भारत में दिखाई देगा। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, जब ग्रहण दिखता है तो उसका सूतक काल मान्य होता है। इस अवधि में शुभ कार्य, पूजा-पाठ और उत्सव मनाना वर्जित माना जाता है। यही वजह है कि इस दिन रंग खेलने की परंपरा से बचने की सलाह दी जा रही है

भारत में दिखेगा ग्रहण 

वैदिक पंचांग के अनुसार समय-समय पर सूर्य और चंद्र ग्रहण लगते हैं, जिनका प्रभाव मानव जीवन और प्रकृति पर माना जाता है। हिंदू मान्यता में ग्रहण को अशुभ माना जाता है और इस दौरान विशेष नियमों का पालन किया जाता है। इस बार 3 मार्च को आंशिक (खण्डग्रास) चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह ग्रहण भारत में मान्य रहेगा और देश के कई हिस्सों में देखा जा सकेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के समय चंद्रमा सिंह राशि में रहेंगे, जहां पहले से केतु स्थित है।

ग्रहण का समय

पंचांग के अनुसार दोपहर 3 बजकर 20 मिनट ग्रहण प्रारंभ होगा। वहीं शाम 6 बजकर 47 मिनट पर ग्रहण समाप्त होगा। यह ग्रहण भारत के अलावा यूरोप, एशिया, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका के कई हिस्सों में भी दिखाई देगा।

सूतक काल कब से?

ज्योतिष मान्यता के अनुसार चंद्र ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले सूतक काल लग जाता है। सूतक काल सुबह 9 बजकर 39 मिनट प्रारंभ होगा जिसका समापन ग्रहण के साथ होगा। सूतक काल में पूजा-पाठ, हवन, शुभ कार्य या नए कार्य की शुरुआत करना वर्जित माना जाता है।

चंद्र ग्रहण के दौरान क्या करें, क्या न करें

ग्रहण और सूतक काल में भोजन करने से बचें।

सूतक से पहले दूध, दही, पानी आदि में तुलसी के पत्ते डाल दें।

चाकू, सुई, कैंची जैसी नुकीली वस्तुओं का प्रयोग न करें।

नाखून और बाल काटना अशुभ माना जाता है।

मंदिरों के कपाट बंद रखे जाते हैं और पूजा-पाठ नहीं किया जाता।

ग्रहण के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करें।

ग्रहण समाप्ति के बाद

स्नान करें।

घर में गंगाजल छिड़कें।

दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल में संयम और नियमों का पालन करना कल्याणकारी माना जाता है।