50 साल पुराना यूनिवर्सिटी एक्ट होगा खत्म, सरकार के हाथ में होगा 481 कॉलेजों की कमान, बिहार विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 , क्या बदलेगा और क्यों मचा है घमासान? पढ़िए

Bihar Education: बिहार सरकार राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव के लिए 'बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 लाने की तैयारी कर रही है। ...

राज्यपाल से छिनेगा UG का अधिकार- फोटो : social Media

Bihar Education: बिहार सरकार राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव के लिए बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 लाने की तैयारी कर रही है। इस नए विधेयक के पारित होते ही लगभग 50 साल पुराने बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-1976 और पटना विश्वविद्यालय अधिनियम-1976 समाप्त हो जाएंगे।

कुलाधिपति (राज्यपाल) का नियंत्रण अब मुख्यतः स्नातकोत्तर और रिसर्च तक ही सीमित रह जाएगा। यूजी  शिक्षा, 481 सरकारी डिग्री कॉलेजों और 211 प्रखंडों में बन रहे नए डिग्री कॉलेजों का प्रशासनिक नियंत्रण पूरी तरह बिहार सरकार के हाथों में होगा।कॉलेजों में प्रोफेसरों की बहाली, प्रमोशन और ट्रांसफर-पोस्टिंग का फैसला अब विश्वविद्यालय प्रशासन नहीं, बल्कि राज्य सरकार तय करेगी।कॉलेजों के रोजमर्रा के कामकाज और प्रशासनिक नियंत्रण के लिए सरकारी अधिकारियों की तैनाती की जाएगी।पूरे राज्य के डिग्री कॉलेजों में सिलेबस और शिक्षा का पैटर्न एक समान लागू होगा।

सरकार के अनुसार, यह बदलाव उच्च शिक्षा में सुधार और छात्रों के दूसरे राज्यों में पलायन को रोकने के लिए जरूरी है-विश्वविद्यालयों में वित्तीय धांधली और गबन की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। समय पर परीक्षाएं न होना और परिणाम घोषित न होना एक बड़ी समस्या बन चुका था। शिक्षकों की नियुक्ति और वेतन-वृद्धि में पारदर्शिता की कमी थी। राज्य के कॉलेजों का प्रदर्शन नैक मूल्यांकन में लगातार निराशाजनक रहा है।

पटना विश्वविद्यालय शिक्षक संघ और शिक्षाविदों ने इस विधेयक पर गहरी चिंता व्यक्त की है। पटना विश्वविद्यालय का अपना अलग एक्ट होने के कारण उसकी एक विशेष स्वायत्तता थी। नए कानून से पीयू  अपनी यह पहचान खो देगा। शिक्षकों का मानना है कि हर छोटे-छोटे काम और फाइलों के लिए अब प्रोफेसरों को सचिवालय के चक्कर लगाने पड़ेंगे, जिससे शैक्षणिक माहौल प्रभावित होगा।वर्तमान में पटना यूनिवर्सिटी के शिक्षकों का तबादला बाहर नहीं होता था। नए कानून के तहत अब राज्य भर में ट्रांसफर संभव हो जाएगा। शिक्षकों का कहना है कि जिस तरह पीयू से इंटरमीडिएट की पढ़ाई अलग करने पर ग्रामीण और गरीब छात्रों को नुकसान हुआ, वैसा ही असर इस फैसले का भी हो सकता है।

एक तरफ जहां सरकार इस विधेयक को सत्र नियमित करने, भ्रष्टाचार रोकने और उच्च शिक्षा के स्तर में सुधार का बड़ा जरिया मान रही है; वहीं दूसरी तरफ शिक्षक संघ इसे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर हमला और नौकरशाही का हस्तक्षेप मान रहे हैं।