कैरव गांधी अपहरण कांड:हाजीपुर गैंग का वही पुराना अंदाज,बिहार पहुची पुलिस की टीमें
आदित्यपुर के उद्यमी देवांग गांधी के पुत्र कैरव गांधी के सनसनीखेज अपहरण मामले की जांच अब झारखंड से निकलकर बिहार और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गई है। पुलिस इस गुत्थी को सुलझाने के लिए वैज्ञानिक साक्ष्यों और पुराने आपराधिक रिकॉर्ड्स को खंगाल रही है
जमशेदपुर के आदित्यपुर के प्रमुख उद्यमी देवांग गांधी के पुत्र कैरव गांधी के सनसनीखेज अपहरण मामले की जांच अब झारखंड से निकलकर बिहार और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गई है। कैरव गांधी के अपहरण में पुलिस को बिहार के हाजीपुर गैंग की संलिप्तता का प्रबल संदेह है। जांच के दायरे को बढ़ाते हुए पुलिस ने दो विशेष टीमें बिहार रवाना कर दी हैं। इसके साथ ही, एसआईटी (SIT) ने स्थानीय इनपुट के आधार पर जेम्को इलाके से 'खट्टा बबलू' नामक व्यक्ति को हिरासत में लिया है, जिसके तार इस गिरोह से जुड़े होने की आशंका है। पुलिस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय धनबाद के कुख्यात अपराधी प्रिंस खान के गिरोह की भूमिका की भी जांच कर रही है, जो वर्तमान में दुबई में छिपा है।
पुलिसिया बोर्ड और फर्जी नंबर प्लेट का खेल
अपहर्ताओं ने इस वारदात को बेहद शातिराना अंदाज में अंजाम दिया। सीसीटीवी फुटेज और जांच से खुलासा हुआ है कि कैरव का अपहरण 'पुलिस' का बोर्ड लगी एक स्कॉर्पियो (JH12A 4499) से किया गया था। जांच में पता चला कि यह नंबर कोडरमा की एक बोलेरो गाड़ी का है, जो किसी और के नाम पर दर्ज है। पुलिस ने नंबर प्लेट के जरिए सुराग जुटाने की कोशिश की, लेकिन अपहर्ताओं ने कानून को चकमा देने के लिए फर्जी नंबर का इस्तेमाल किया था।
सीसीटीवी में कैद हुई गाड़ियों की रफ्तार
घटना के दिन 13 जनवरी के सीसीटीवी फुटेज पुलिस के हाथ लगे हैं। कदमा-सोनारी लिंक रोड पर दोपहर 12:52 बजे कैरव की गाड़ी सामान्य गति से गुजरती दिखी। लेकिन महज दो मिनट बाद, वही गाड़ी 109 किमी प्रति घंटे की अत्यधिक रफ्तार से एरोड्रम की तरफ लौटती नजर आई, जिसके ठीक पीछे संदिग्ध स्कॉर्पियो चल रही थी। यह साफ संकेत है कि अपहरणकर्ताओं ने बीच रास्ते में ही गाड़ी पर नियंत्रण पा लिया था। अंततः दोपहर 1:09 बजे कैरव की कार मरीन ड्राइव के पास कांदरबेड़ा में लावारिस हालत में मिली, जिसका गेट खुला हुआ था।
पुराने 'हाजीपुर गैंग' के पैटर्न की याद
कैरव गांधी के अपहरण के तरीके ने पुलिस को 2005 के मशहूर कृष्णा भालोटिया अपहरण कांड की याद दिला दी है। उस समय भी उद्यमी भालोटिया का अपहरण कांदरबेड़ा चौक से ही इसी अंदाज में किया गया था, जिसे हाजीपुर के अरविंद गिरोह ने अंजाम दिया था। पुलिस दोनों घटनाओं के पैटर्न की समानता को देख रही है, क्योंकि उस मामले में भी अपहृत को बिहार के कंकड़बाग (पटना) से बरामद किया गया था।
दैनिक दिनचर्या की रेकी का संदेह
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि अपराधी कैरव की आदतों से पूरी तरह वाकिफ थे। कैरव अक्सर अपने घर से कुछ ही दूरी पर डीएमओ कार्यालय के पास एक चाय की दुकान पर दोस्तों के साथ बैठते थे। आशंका जताई जा रही है कि अपराधियों ने कई दिनों तक उनकी रेकी की और उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के बाद ही अपहरण के लिए सबसे सटीक स्थान और समय का चुनाव किया।