सारंडा के जंगल में IED विस्फोट, पत्ता तोड़ने गईं महिलाएं चपेट में आईं, एक युवती की मौत

नक्सलियों द्वारा बिछाए गए आईईडी (IED) विस्फोट की एक दुखद घटना सामने आई है। कोलबोगा जंगल में शुक्रवार दोपहर पत्ता तोड़ने गईं तीन महिलाएं इस विस्फोट की चपेट में आ गईं।हादसे में फूलों धनवार नामक एक युवती की मौके पर ही मौत हो गई

सारंडा के जंगल में IED विस्फोट, पत्ता तोड़ने गईं महिलाएं चपेट में आईं- फोटो : NEWS 4 NATION

झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल क्षेत्र में नक्सलियों द्वारा बिछाए गए आईईडी (IED) विस्फोट की एक दुखद घटना सामने आई है। जराईकेला थाना क्षेत्र के कोलबोगा जंगल में शुक्रवार दोपहर पत्ता तोड़ने गईं तीन महिलाएं इस विस्फोट की चपेट में आ गईं। इस हादसे में फूलों धनवार नामक एक युवती की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य महिलाएं गंभीर रूप से घायल हो गईं। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब इलाके में सुरक्षा बलों का नक्सल विरोधी अभियान लगातार जारी है, जिससे क्षेत्र में दहशत फैल गई है।



दो महिलाएं गंभीर रूप से घायल, पुलिस ने शुरू की जांच

जंगल से लौटते समय मृतक युवती फूलों धनवार का पैर नक्सलियों द्वारा जमीन के अंदर बिछाए गए आईईडी पर पड़ गया, जिससे जोरदार विस्फोट हुआ। इस घटना में फूलों धनवार की तुरंत मौत हो गई। वहीं, घायल हुई दो अन्य महिलाएं शालिनी कांडुलना और बरसी धनवार की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही सुरक्षा बल और स्थानीय पुलिस तुरंत मौके पर पहुँचे। उन्होंने घायल महिलाओं को तुरंत रेस्क्यू कर बेहतर इलाज के लिए मनोहरपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया। पुलिस ने मृतक युवती के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।


नक्सलियों द्वारा सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की पुरानी रणनीति

यह पहली बार नहीं है जब सारंडा के जंगल में नक्सलियों द्वारा आईईडी बिछाए जाने से आम नागरिक या सुरक्षा बल हताहत हुए हैं। नक्सल विरोधी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए आईईडी का इस्तेमाल करना नक्सलियों की पुरानी रणनीति रही है। हाल ही में, इसी चाईबासा जिले के सारंडा जंगल में 11 अक्टूबर 2025 को नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी बम के विस्फोट में सीआरपीएफ के हेड कॉन्स्टेबल महेंद्र लश्कर शहीद हो गए थे। उस घटना में घायल हुए एक इंस्पेक्टर का भी बाद में इलाज के दौरान निधन हो गया था। यह ताजा घटना नक्सलियों की इस खतरनाक रणनीति को उजागर करती है, जिससे अब आम ग्रामीण भी चपेट में आ रहे हैं।