CM नीतीश के बाद के.के पाठक के पक्ष में उतरे अशोक चौधरी, जमकर की तारीफ, कहा- गांवों में जाकर देखिए कैसे उनका....
PATNA: बिहार विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है। बजट सत्र का आज सातवां दिन है। विपक्ष शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव के.के पाठक को लेकर लगातार सवाल खड़ा कर रही है। विधान मंडल के दोनों सदनों में पक्ष हो या विपक्ष एक तरफ सवाल खड़ा कर रहा है तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री या उनके सबसे करीबी नेता के .के पाठक के बचाव में उतर गए हैं। बीते दिन मुख्यमंत्री ने के. के पाठक का पक्ष लेते हुए कहा था कि वह ईमानदार अधिकारी हैं और ईमानदारी से अपना कार्य करते हैं। वहीं आज नीतीश कुमार के करीबी नेता अशोक चौधरी भी के.के पाठक का बचाव करते दिखें।
पूर्व मंत्री अशोक चौधरी ने के के पाठक के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा विभाग का जो बजट है उसे बजट के अनुरूप वह काम कर रहे हैं। पहले विद्यालयों में ना तो शिक्षक समय पर आते थे और ना ही बच्चें, जब से के.के पाठक ने शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभाली है तब से शिक्षक भी समय पर स्कूल आ रहे हैं और बच्चे भी। उन्होंने कहा कि आज गांवों में के.के पाठक चर्चा का विषय बन गए हैं। वह लगातार शिक्षा को सुधारने में काम कर रहे हैं। वहीं के के पाठक के वायरल वीडियो को लेकर अशोक चौधरी ने कहा कि, अध्यक्ष के संज्ञान में मामला आया है वह इसको देख कर इसकी जांच करेंगे।
वहीं विश्वविद्यालय के कुलपति की मीटिंग के.के पाठक द्वारा किए जाने पर उठ रहे सवाल को लेकर अशोक चौधरी से सवाल पूछा गया तो अशोक चौधरी गोल मटोल जवाब देते हुए नजर है। अशोक चौधरी ने कहा कि चुकी हाई एजुकेशन में महामहिम राज्यपाल का आदेश सर्वमान्य होता है। लेकिन हाई एजुकेशन में भी है पैसा जो खर्च होता है वो राज्य सरकार का होता है। वहां के शिक्षकों को प्रोफेसर को जो पैसा जाता है वह राज्य सरकार से जाता है। क्योंकि विश्वविद्यालय एक ऑटोनॉमस बॉडी है उसके बावजूद भी वह फंड कलेक्ट नहीं कर पाते हैं राज्य सरकार से ही जाता है तो उन सभी विषयों को लेकर वह मीटिंग करते है।
मालूम हो कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव इन दिनों जनविश्वास यात्रा पर हैं। इस दौरान उन्होंने सीएम नीतीश पर आरोप लगाते हुए कहा है कि सीएम विधानसभा को भंग कराना चाहते हैं। सीएम चाहते हैं कि राज्य में लोकसभा और विधानसभा एक साथ हो। इसको लेकर अशोक चौधरी ने कहा कि, तेजस्वी यादव भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसा कुछ नहीं है। वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर बात चल रही है, लेकिन लोकसभा और विधानसभा एक साथ करवाने की दूर दूर तक कोई सवाल नहीं है। विपक्ष के द्वारा दूसरे तरीके से इसका प्रचार किया जा रहा है।
पटना से वंदना की रिपोर्ट