बिहार की सबसे बड़ी आबादी पर BJP की सेंधमारी, चुनावी एजेंडा कर लिया सेट, लोकसभा चुनाव में विपक्ष के खिलाफ ये होंगे भाजपा के मुख्य औजार
PATNA: लोकसभा चुनाव होने में अब कुछ ही समय बचा है। माना जा रहा है कि 16 अप्रैल 2024 से लोकसभा के चुनाव शुरू हो जाएंगे। वहीं चुनाव को लेकर सभी पार्टी अपने स्तर से तैयारी करना शुरू कर दी है। सभी पार्टी अपने स्तर पर राजनीतिक दांव खेल रही है। बीते दिन बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कर्पूरी ठाकुर जी की 100वीं जयंती थी। राजद, भाजपा और जदयू तीनों पार्टियों ने उनकी जयंती धूमधाम से मना कर अतिपिछड़ों को साधने की कोशिश की लेकिन भाजपा ने जो कर्पूरी दांव खेला है उससे उसने बिहार के सत्ता को उंगली पर नचाने वाले लालू यादव और नीतीश कुमार की बेचैनी बढ़ा दी है।
बीजेपी में अपने खाते में लिया श्रेय
दरअसल, केंद्र की मोदी सरकार ने कर्पूरी ठाकुर की जयंती के एक दिन पहले उन्हें भारत रत्न देने का ऐलान कर दिया। कर्पूरी ठाकुर के नाम पर लालू नीतीश खूब राजनीति की। कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने की मांग नीतीश कुमार और लालू यादव अरसे से करते आएं हैं लेकिन कर्पुरी ठाकुर को भारत रत्न देने का ऐलान करके इसका पूरा श्रेय बीजेपी ने अपने खाते में डाल दिया है। वहीं इससे विपक्ष की बेचैनी और बढ़ गई है। नीतीश कुमार ने तो यहां तक कह दिया है कि पीएम ने पीएम मोदी ने उन्हें कॉल नहीं किया। साथ ही सीएम नीतीश ने पीएम को धन्यवाद भी दिया है।
विपक्ष के खिलाफ बीजेपी के औजार
मालूम हो कि कर्पूरी ठाकुर बिहार की सबसे बड़ी आबादी अति पिछड़ा के आइकॉन हैं। इस वोट बैंक पर नीतीश और लालू यादव अपनी दावेदारी जताते रहें हैं और उन्हें इसका फायदा भी खूब मिला। लेकिन अब माना जा रहा है की कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न से सम्मानित करने के बाद इस वोट बैंक की सबसे बड़ी स्टेट होल्डर बीजेपी हो जाएगी। बिहार की महागठबंधन सरकार ने जाति आधारित गणना कराकर और अति पिछड़ों को 65% आरक्षण देने के बाद राज्य में इसे अपने चुनावी मुद्दा के तौर पर इस्तेमाल कर रही थी लेकिन बीजेपी ने अनुच्छेद 370 को निरस्त, आर्थिक रूप से पिछड़ें सवर्णोंं को 10% आरक्षण और लोकसभा विधानसभा में 33% महिला आरक्षण फिर अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह और अब भारत रत्न का दांव चलकर विपक्ष को यह संकेत दे दिया है कि इंडिया गठबंधन की ओर से जाति आधारित गणना को मुद्दा बनाए जाने की कोशिश का मुकाबला करने के लिए उनके यह औजार काफी होंगे।
देर आए दुरुस्त आए
कर्पूरी ठाकुर को चाहने वाले केंद्र की इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं। साथ ही यह भी कह रहे हैं कि जननायक इस सम्मान के हकदार थे, उन्हें यह सम्मान बहुत पहले मिल जाना चाहिए था। लेकिन फैसला देर से आया लेकिन दुरुस्त आया। वहीं राजनीतिक जानकारों का यह भी मानना है कि इस फैसले का बिहार की राजनीति पर गहरा असर पड़ेगा या असर देखने योग्य होगा। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व मुख्यमंत्री सह राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न से नवाजे जाने के फैसले का स्वागत किया है लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यह हमारी बहुत पुरानी मांग थी जो आखिरकार पूरी हुई है। दोनों नेताओं में इसका श्रेय लेने की होड़ मची हुई है।
बिहार की लोकसभा सीटों पर किसकी होगी जीत
वहीं प्रधानमंत्री ने मंगलवार को एक्स पर एक पोस्ट के जरिए इस फैसले की सराहना भी की थी तो वहीं कर्पूरी ठाकुर पर एक लेख लिखकर उन्होंने कहा कि उनकी सरकार कर्पूरी ठाकुर से प्रेरणा लेकर निरंतर काम कर रही है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो भाजपा लोकसभा चुनाव में कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने को मुद्दा बनाएगी और उसे भूनने का प्रयास करेगी। लोकसभा चुनाव में बिहार में उसके मुख्य औजार 370 को निरस्त करना, आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को 10% आरक्षण, फिर 33% महिला आरक्षण और फिर राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा इसके बाद अब कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न सम्मानित करना होगा। भाजपा इसे मुद्दा बनाकर अपने वोट बैंक को मजबूत करने की पूरी कोशिश करेगी। कर्पूरी ठाकुर की पहचान अति पिछड़ा वर्ग के बड़े नेता के तौर पर है। ऐसे में एक बड़ा वोट बैंक अब बीजेपी के खाते में जाता हुआ दिखेगा। जनकारों की मानें तो बिहार की 40 लोकसभा सीट आगामी लोकसभा चुनाव में केंद्र की नई सरकार का समीकरण तय कर सकती है। इस बार राज्य की राजनीति में समीकरण पिछले बार से बदले हुए हैं। एक और जहां इंडिया गठबंधन अपनी जीत का दावा कर रही है, वहीं बीजेपी का दावा है कि बिहार के 40 की 40 सीटों पर उनका कब्जा होगा और राजद जदयू इस बार खाता भी नहीं खोल पाएंगे।