बिहार के सभी सीटों पर उतरेंगे मायावती के उम्मीदवार, बदल गया लोकसभा चुनाव का गेम प्लान,एनडीए की बढ़ी परेशानी !

पटना: लोकसभा 2024 के रण के लिए बिसात बिछ गया है. लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार के एनडीए के साथ मिलकर चुनाव लड़ने पर विपक्षी दलों के इंडी गठबंधन  लिए बड़ा झटका ही नहीं बल्कि सियासी चुनौती भी होगी. विपक्षी गठबंधन के लिए मुस्लिम-यादव समीकरण के सहारे भाजपा से 2024 की लड़ाई  आसान नहीं है, क्योंकि भाजपा का लक्ष्य पचास फीसदी वोट का है. यादव और मुस्लिम मिलकर 35 फीसदी के करीब ही वोट होता है. इसी समीकरण के बदौलत 2019 में राजद और कांग्रेस ने भाजपा से मुकाबला किया था, लेकिन सफल नहीं रहे. कांग्रेस को  एक सीट मुस्लिम बहुल किशनगंज ही जीत सकी थी, जबकि राजद का खाता भी नहीं खुला था. जातीय समीकरण के जाल में लिपटे बिहार में एनडीए और इंडी गठबंधन की मुसिबत बढ़ाने बसपा पहुंच गई है. बिहार की लोकसभा सीटों पर बसपा भी अपने उम्मीदवार उतारने जा रही है. बसपा ने बक्सर लोकसबा सीट से अपना प्रत्याशी उतारने की घोषणा की है. अनिल कुमार को बक्सर से लोकसभा के लिए अपना प्रत्याशी बनाया है. 

बसपा ने बढ़ाया टेंशन

बसपा के राज्यसभा सदस्य रामजी  गौतम ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि बिहार की 40 सीटों पर हमारी पार्टी पूरी ताकत के साथ लोकसभा चुनाव लड़ने जा रही है.उन्होंने कहा कि  इस बार बिहार में बीएसपी भी अपना ताकत दिखाएगी, पार्टी द्वारा बाकी सीटों पर भी प्रत्याशियों को लेकर चर्चा हुई है. गौतम ने कहा कि हमारा किसी पार्टी के साथ कोई गठबंधन नही है.  एनडीए और इंडी गठबंधन दोनों बड़े-बड़े धन्ना सेठों की कठपुतली बनकर काम करते हैं. हमारा गठबंधन जनता के साथ है, हम जनता के साथ गठबंधन कर रहे हैं और जनता के बीच जा रहे हैं.आने वाले दो तीन दिनों में कुछ नामों को घोषणा पार्टी कर सकती है. 

बिहार में सियासी घमासान तेज

2024 के रण को लेकर केंद्र की सत्ताधारी भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी है.  भाजपा  के लिए 370 सीटों का टारगेट तय किया है.  एनडीए  के लिए मिशन 400 पार का लक्ष्य रखा.बिहार में लोकसभा की 40 सीटें हैं. एनडीए सभी सीटों को जीतने का दावा कर रहा है तो इंडी गठबंदन भी ताल ठोक रहा है. वहीं बसपा की इंट्री से दोनों गठबंधनों की पेशगी पर पसीना छलकने लगा है.

वोट बैंक के बिखराव का खतरा

लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले बिहार में सियासी बदलाव हो गया . नीतीश कुमार अब भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए का हिस्सा बन चुके हैं. नीतीश के सियासी पाला बदलने से बिहार की सत्ता का समीकरण ही नहीं बदला बल्कि 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में सूबे का गेम प्लान भी बदल गया है.वहीं मयावती की पार्टी बसपा के बिहार में चुनाव लड़ने की घोषणा से एनडीए और इंडी गठबंधन दोनों के लिए परेशानी बढ़ सकती है.  अति पिछड़ा के वोट बैंक के बिखराव का खतरा मंडराने लगा है. अब मायावती को बिहार में कितने फिसदी वोट हिस्सेदारी मिलेगी, इस पर अभी कुछ कहा नहीं जा सकता है.