पटना एम्स की बढ़ाई गई सुरक्षा, कोलकाता में महिला डॉक्टर के रेप- हत्या के बाद बड़ा निर्णय, रात में छात्र नहीं कर सकेंगे यह काम
पटना. कोलकाता के सरकारी आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या की घटना के बाद एम्स-पटना में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। एम्स-पटना के कार्यकारी निदेशक और सीईओ डॉक्टर गोपाल कृष्ण पाल ने शनिवार को बताया कि अन्य उपायों के अलावा परिसर में अधिक महिला सुरक्षा गार्ड तैनात करने और 150 अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्णय लिया गया है।
उन्होंने कहा, "हमारे परिसर में पहले से ही बहुत प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था है। हमने महिला सुरक्षा गार्डों सहित पर्याप्त संख्या में सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया है, महत्वपूर्ण स्थानों पर बड़ी संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं और अलग-अलग क्षेत्रों में रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था की है। लेकिन कोलकाता की घटना के बाद, हमने इसे अपनी महिला डॉक्टरों, छात्राओं और मरीजों के लिए अधिक प्रभावी और सुरक्षित बनाने का निर्णय लिया है।" उन्होंने कहा, "हमने अधिक महिला सुरक्षा गार्ड तैनात करने और 150 अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाने का फैसला किया है। इस संबंध में एक प्रस्ताव विचाराधीन है और इसे प्राथमिकता के आधार पर अंतिम रूप दिया जाएगा।
सुरक्षित माहौल होगा सुनिश्चित: पटना एम्स की सुरक्षा को लेकर उन्होंने कहा कि हम कोई भी ग्रे एरिया नहीं छोड़ना चाहते हैं। हम सभी कर्मचारियों और मरीजों के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।" पाल ने कहा कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज में हुई घटना के सामने आने के बाद वार्डन, विभागाध्यक्षों, अधीक्षकों और सुरक्षा पर्यवेक्षकों के साथ बैठक की गई। उन्होंने कहा, "छात्रों के ठहरने को आरामदायक और सुरक्षित बनाने और घर से दूर घर जैसा माहौल प्रदान करने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों की एक समर्पित टीम है।" पाल ने कहा कि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए छात्रावास के नियमों को और सख्त बनाया गया है।
छात्रावास को लेकर दिशा निर्देश : उन्होंने कहा, "किसी भी छात्र को वार्डन और मुख्य वार्डन की पूर्व लिखित अनुमति के बिना रात के समय अपने कमरे से दूर नहीं रहना चाहिए। अस्थायी रूप से या अन्यथा परिसर छोड़ने के इच्छुक छात्रों को वार्डन को लिखित रूप में प्रस्तुत करना चाहिए। अनुमति के लिए आवेदन में उनके इच्छित प्रस्थान और वापसी की तारीख और समय, गंतव्य का उल्लेख होना चाहिए और माता-पिता की स्वीकृति होनी चाहिए।" "हॉस्टल वार्डन की उचित अनुमति के बाद ही आगंतुकों को आगंतुकों के कमरे में जाने की अनुमति है। किसी भी अतिथि या माता-पिता को छात्रावास में रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके लिए मुख्य वार्डन से पूर्व लिखित अनुमति लेनी होगी."