ऐसे रूकेगा करप्शन ? नीतीश सरकार के विश्वस्त IAS अफसर ही ‘सुशासन’ की लगा रहे पलीता ! भ्रष्टाचार पर सरकार के जीरो टॉलरेंस नीति का उड़ाया मजाक...करप्शन में लिप्त रहने वालों का मन भी बढ़ाया

PATNA: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विश्वास पात्र आईएएस अफसर ने ऐसा काम किया, जिसे जानकर लोग चौंक जा रहे. ऐसा कहा जा रहा कि खास अफसर ने ही सीएम नीतीश की यूएसपी का पलीता लगाकर रख दिया. नई सरकार यानि एनडीए की सरकार बनने के ठीक बाद ही यह आदेश जारी किया गया है. भ्रष्टाचार-अपराध का खात्मा की बात करने वाली एनडीए की सरकार बनने के बाद जेडीयू कोटे वाले विभाग ने यह आदेश 7 फरवरी  2024 को जारी किया है. आदेश जारी होने के बाद गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं कि आखिर भ्रष्टाचार के आरोपी से इतनी हमदर्दी के क्या मायने हैं ? यह तो भ्रष्टाचार के खिलाफ नीतीश सरकार की मुहिम का हवा निकालने जैसा आदेश है. आदेश न सिर्फ सुशासन का पलीता लगा रहा, बल्कि परिवहन विभाग ने अपने आदेश का भी मजाक उड़ाया है.

कटघरे में परिवहन विभाग के जिम्मेदार अफसर 

28 जनवरी को बिहार में नई सरकार बनी. भाजपा के सहयोग से नीतीश कुमार एक बार फिर से मुख्यमंत्री बने. 3 फरवरी को मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा हुआ. इसके बाद 7 फरवरी  2024 को परिवहन विभाग ने एक ऐसा आदेश निकाला, जिससे विवाद शुरू हो गया है. दरअसल विभाग ने इसी महीने की 7 तारीख को 11 मोटरयान निरीक्षकों का तबादला किया था. परिवहन विभाग के उप सचिव की तरफ से ट्रांसफर आदेश जारी किया गया था. उक्त आदेश में लिखा है कि सक्षम प्राधिकार से अनुमोदन प्राप्त है. यानि इस ट्रांसफर-पोस्टिंग के आदेश पर विभाग में उच्च स्तर से सहमति ली गई है. यहां तक तो सबकुछ ठीक है. लेकिन उस आदेश में ही खेल किया गया था. उस आदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की लड़ाई पर भी असर पड़ा है. विभाग ने भ्रष्टाचार के एक आरोपी को न सिर्फ फील्ड दिया, बल्कि एक साथ दो जिलों का काम देकर सस्पेंशन के दौरान की कमी की भरपाई भी कर दी. तबादला आदेश में उक्त आरोपी अफसर का नाम अंतिम में अंकित है. ऐसा लगता है कि भ्रष्टाचार केस का इनाम दिया गया हो. जबकि इसी परिवहन विभाग ने 2022 में दागी एमवीआई को फील्ड पोस्टिंग देने के न्यूज4नेशन के खुलासे पर 48 घंटे के अंदर अपना आदेश वापस ले लिया था और आरोपी को फील्ड से तुरंत हटाकर मुख्यालय में पोस्टिंग दी थी. वो आज भी मुख्यालय में पदस्थापित हैं.

ऐसे ही मामले में विभाग ने आदेश लिया था वापस 

 बता दें. 22 जून 2022 को परिवहन विभाग ने आदेश संख्या 3577 से अवैध संपत्ति अर्जित करने के केस में फंसे एक दागी एमवीआई को फील्ड पोस्टिंग दिया था. न्यूज4नेशन ने जब इस मामले का खुलासा किया तो मुख्यमंत्री सचिवालय ने संज्ञान लिया था. इसके बाद आनन-फानन में परिवहन विभाग ने अपना यह आदेश ज्ञापांक संख्या-3685 से वापस ले लिया था. 24 जून 2022 को ही आदेश वापस लेते हुए आरोपी सरकारी सेवक को फील्ड से बुलाकर मुख्यालय में पदस्थापित किया . आज भी वो मुख्यालय में ही पदस्थापित हैं, फील्ड में नहीं भेजा गया है.

ऐसा लगता है...विभाग ने निलंबन अवधि की भरपाई की

22 जून 2022 को जब परिवहन विभाग की पोल खुली, इसके बाद विभाग ने भ्रष्टाचार के आरोपी किसी दूसरे एमवीआई का निलंबन तोड़कर फील्ड में भेजने की हिमाकत नहीं की. क्यों कि सरकार सख्त थी. अब जबकि एनडीए की सरकार बन गई है, इसके तुरंत बाद ही 7 फरवरी को इस तरह के आदेश जारी किए गए हैं. इस आदेश से एक ऐसे मोटरयान निरीक्षक का निलंबन तोड़कर दो-दो जिला अलॉट किया गया जिनके खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई ने भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया था. केस लंबित है, इधर आरोपी को फिर से फील्ड में भेजकर सरकार ने अपनी मंशा क्लियर कर दिया कि, भ्रष्टाचार से हमने समझौता कर लिया है. अब परिवहन विभाग के लिए भ्रष्टाचार कोई मुद्दा नहीं. 

हुजूर..कौन सी मजबूरी थी....

हमने परिवहन विभाग के सचिव से इस बारे में जानकारी चाही. हमने उन्हें सवाल किया कि क्या विभाग ने अपने ही आदेश को रद्दी की टोकरी में डाल दिया ? इसी तरह के मामले में जून 2022 में विभाग ने अपना आदेश वापस ले लिया था, तब फिर इस बार दागी को फील्ड में एक नहीं बल्कि दो जिला देकर उपकृत करने के पीछे क्या मजबूरी है ? लेकिन उन्होंने सवाल का कोई जवाब नहीं दिया. हमने फोन कर भी उनसे जानकारी चाही, इसमें भी सफलता नहीं मिली. अब समझ सकते हैं कि दाल में काला नहीं बल्कि पूरी दाल ही काली है.