Mulayam Singh Yadav son Death: समाजवादी परिवार में शोक की लहर! मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव का लखनऊ में निधन

Mulayam Singh Yadav son Death: मुलायम सिंह के छोटे बेटे प्रतीक यादव का लखनऊ में निधन हो गया। वे अखिलेश सिंह यादव के छोटे भाई और अपर्णा यादव के पति थे।

प्रतीक यादव ने लखनऊ अस्पताल में अंतिम सांस ली- फोटो : social media

Mulayam Singh Yadav son Death: समाजवादी पार्टी के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव का निधन हो गया है। उन्होंने आज लखनऊ के सिविल अस्पताल में अंतिम सांस ली। वे सिर्फ 38 साल के थे। उनकी अचानक मौत की खबर से राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर फैल गई है। जानकारी के अनुसार, प्रतीक यादव की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। देर रात उन्हें कुछ परेशानी महसूस हुई, जिसके बाद उनकी हालत तेजी से खराब होने लगी। स्थिति गंभीर होने पर उन्हें तुरंत लखनऊ के सिविल अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने इलाज की कोशिश की, लेकिन उनकी तबीयत में सुधार नहीं हुआ और उनकी मृत्यु हो गई।

अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि उनकी तबीयत बिगड़ने की असली वजह क्या थी। अस्पताल की तरफ से मेडिकल बुलेटिन का इंतजार किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि वे पिछले कुछ दिनों से ठीक महसूस नहीं कर रहे थे, लेकिन किस बीमारी से वे पीड़ित थे, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। प्रतीक यादव अपने पीछे पत्नी अपर्णा यादव और दो बेटियों को छोड़ गए हैं। उनकी पत्नी अपर्णा यादव बीजेपी से जुड़ी हुई नेता हैं। जैसे ही उनके निधन की खबर फैली, कई नेता और जानने वाले लोग लखनऊ के सिविल अस्पताल पहुंचने लगे।

प्रतीक यादव की राजनीति से दूरी

प्रतीक यादव राजनीति से दूर रहते थे और अपना निजी जीवन जीते थे। वे फिटनेस के शौकीन थे और लखनऊ में ‘फिटनेस प्लैनेट’ नाम का जिम चलाते थे। इसके अलावा वे एक सामाजिक संस्था भी चलाते थे, जिसका नाम ‘जीव आश्रय’ था। इस संस्था के जरिए सड़क पर रहने वाले कुत्तों की देखभाल, इलाज, खाना और रेस्क्यू का काम किया जाता था। लोगों के बीच वे फिटनेस और पशु सेवा के कामों के लिए जाने जाते थे। उनकी अचानक मौत की खबर ने सभी को हैरान कर दिया है, क्योंकि वे काफी एक्टिव और फिट रहने वाले व्यक्ति माने जाते थे।

प्रतीक यादव ने कहां से की थी पढ़ाई?

प्रतीक यादव ने अपनी पढ़ाई ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स से की थी। हालांकि वे देश के बड़े राजनीतिक परिवार से जुड़े थे, लेकिन उन्होंने राजनीति से हमेशा दूरी बनाए रखी। सुबह करीब 6 बजे उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था। इसके बाद डॉक्टर लगातार उनकी हालत सुधारने की कोशिश करते रहे, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।