धर्मनगरी हरिद्वार में 'बिरयानी' शब्द को लेकर विवाद, अखाड़े ने शुरू की मुहिम

हरिद्वार में 'वेज बिरयानी' के नाम को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। अखंड परशुराम अखाड़ा के साधु-संतों और हिंदू संगठनों ने 'बिरयानी' शब्द को गैर-सनातनी और मांसाहार की छवि से जुड़ा बताते हुए इसके खिलाफ एक विशेष अभियान शुरू किया है...

हरिद्वार में विरयानी नाम पर बवाल- फोटो : न्यूज4नेशन

Uttrakhand : उत्तराखंड की पावन धर्मनगरी हरिद्वार में 'वेज बिरयानी' (शाकाहारी बिरयानी) के नाम को लेकर एक नया और बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। हिंदू संगठनों और अखंड परशुराम अखाड़ा के साधु-संतों ने इस शब्द के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अखाड़े के संतों ने हरिद्वार के विभिन्न बाजारों में स्थित दुकानों और ठेलों पर लगे 'वेज बिरयानी' के बोर्ड, पोस्टर और स्टिकर जबरन हटा दिए हैं। संतों द्वारा इन दुकानों पर 'वेज बिरयानी' की जगह 'वेज पुलाव' लिखे हुए नए स्टिकर चिपकाए जा रहे हैं और दुकानदारों से इस मुहिम में सहयोग करने की अपील की जा रही है।


'बिरयानी' को बताया मुस्लिम और मांसाहार से जुड़ा शब्द, भावनाओं का हवाला

विरोध कर रहे साधु-संतों और हिंदू संगठनों का तर्क है कि 'बिरयानी' शब्द मूल रूप से हैदराबाद से आया है और यह एक मुस्लिम शब्द है। पंडित पवन कृष्ण आचार्य सहित अन्य संतों का कहना है कि पारंपरिक रूप से बिरयानी में मांस (नॉन-वेज) शामिल होता है, इसलिए धर्मनगरी हरिद्वार की पवित्रता, धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं के अनुरूप इस शब्द का इस्तेमाल यहाँ बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संतों का साफ कहना है कि वे सनातन संस्कृति की मर्यादा को बनाए रखने के लिए इस शब्द के उपयोग को बंद करवाना चाहते हैं।


सावन और कुंभ से पहले अखाड़े की चेतावनी—हरिद्वार में नहीं रहने देंगे यह शब्द

अखंड परशुराम अखाड़ा के अध्यक्ष अधीर कौशिक ने इस मुहिम को लेकर कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने कहा कि सावन का पवित्र महीना बेहद नजदीक है और उससे पहले सभी दुकानदारों को 'बिरयानी' की जगह 'पुलाव' शब्द लिखना अनिवार्य होगा। उन्होंने इस अभियान में स्थानीय शासन और प्रशासन से भी सहयोग की मांग की है। वहीं, परशुराम अखाड़ा के स्वामी कार्तिक गिरी महाराज ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि अखाड़ा इस पूरे मामले पर कड़ी नजर रख रहा है और वे हरिद्वार की धरती पर 'बिरयानी' शब्द को किसी भी कीमत पर टिकने नहीं देंगे।


सनातनियों की आस्था का सवाल, पवित्र पर्वों से पहले बंद कराने की मांग

हिंदू संगठनों के प्रतिनिधियों का कहना है कि हरिद्वार एक वैश्विक तीर्थ स्थल है, जहां जल्द ही सावन और भविष्य में कुंभ जैसे महापर्व आने वाले हैं। इन पावन अवसरों पर देश-विदेश से करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों और श्रद्धालुओं का आगमन गंगा स्नान तथा पूजा-अर्चना के लिए होता है। ऐसे पवित्र माहौल में मांसाहार की छवि से जुड़े शब्दों का सरेआम प्रदर्शन श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाता है। यही वजह है कि त्योहारों के शुरू होने से पहले ही इस तरह की चीजों को पूरी तरह बंद करने की मांग की जा रही है।


सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस, दो धड़ों में बंटे लोग

हरिद्वार में उपजा 'वेज बिरयानी बनाम वेज पुलाव' का यह विवाद अब केवल जमीन तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी यह चर्चा का एक बड़ा विषय बन गया है। इंटरनेट पर इस मुद्दे को लेकर एक बड़ी बहस छिड़ गई है, जहां यूजर्स दो धड़ों में बंटे नजर आ रहे हैं। एक तरफ जहां लोग सनातन परंपरा और धर्मनगरी की मर्यादा के नाम पर साधु-संतों के इस कदम का पुरजोर समर्थन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग खाने-पीने की चीजों के नामकरण को लेकर हो रहे इस विरोध को अनावश्यक बता रहे हैं।