West Bengal Election : ‘अधिकारी’ बनेंगे ‘मुख्यमंत्री’! बंगाल में प्रचंड बहुमत के बाद नए मुख्यमंत्री पर सस्पेंस बरकरार, दिल्ली में मोदी-शाह की फाइनल मुहर का इंतज़ार

West Bengal Election : पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में कई चेहरे सामने आए हैं. बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के बाद शुभेंदु अधिकारी के साथ कई नेताओं का भी नाम भी आ रहा है.....पढ़िए आगे

कौन बनेगा मुख्यमंत्री - फोटो : SOCIAL MEDIA

N4N DESK : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है। भाजपा ने 206 सीटें जीतकर दो-तिहाई से अधिक बहुमत हासिल कर लिया है, जबकि सत्ताधारी टीएमसी महज 80 सीटों पर सिमट गई है। इस ऐतिहासिक जीत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि राज्य की कमान किसके हाथों में होगी। चूंकि भाजपा ने चुनाव से पहले किसी चेहरे की घोषणा नहीं की थी, इसलिए मुख्यमंत्री पद को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। राजस्थान और मध्य प्रदेश के हालिया अनुभवों को देखते हुए माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व एक बार फिर किसी अप्रत्याशित नाम से सबको चौंका सकता है।

मुख्यमंत्री की रेस में सबसे आगे शुभेंदु अधिकारी का नाम चल रहा है। शुभेंदु ने न केवल विधानसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर अपनी सक्रियता दिखाई, बल्कि इस चुनाव में उन्होंने भवानीपुर सीट से निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 15 हजार से अधिक वोटों से हराकर अपनी ताकत का लोहा मनवाया है। पूर्वी मेदिनीपुर जैसे क्षेत्रों में उनकी मजबूत संगठनात्मक पकड़ और ममता बनर्जी को सीधे चुनौती देने का उनका साहसी अंदाज उन्हें इस पद का सबसे व्यावहारिक और स्वाभाविक दावेदार बनाता है।

हालांकि, शुभेंदु अधिकारी की दावेदारी के रास्ते में कुछ वैचारिक चुनौतियां भी देखी जा रही हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि शुभेंदु मूलतः आरएसएस (RSS) की पृष्ठभूमि से नहीं आते हैं और लंबे समय तक टीएमसी में ममता बनर्जी के खास रहे हैं। ऐसे में उन्हें मुख्यमंत्री बनाने से भाजपा के पुराने कैडर और समर्पित कार्यकर्ताओं के बीच यह संदेश जा सकता है कि सरकार का चेहरा बदला है, लेकिन चरित्र अभी भी पुराना ही है। पार्टी के भीतर का एक धड़ा उन्हें 'बाहरी' मानकर असहज महसूस कर सकता है, जो उनके चयन में देरी का एक मुख्य कारण हो सकता है।

मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का वह बयान भी चर्चा में है, जिसमें उन्होंने कहा था कि 'नया मुख्यमंत्री बंगाल की मिट्टी का ही बेटा होगा।' टीएमसी के 'बाहरी बनाम भीतरी' वाले नैरेटिव को काटने के लिए भाजपा नेतृत्व किसी ऐसे चेहरे की तलाश में है जो बंगाली अस्मिता और भाजपा की विचारधारा, दोनों पर खरा उतरता हो। इसी कड़ी में शुभेंदु के अलावा स्वप्न दासगुप्ता, दिलीप घोष, शमीक भट्टाचार्य, शंकर घोष और अग्निमित्रा पॉल जैसे कद्दावर नेताओं के नामों पर भी गंभीरता से मंथन किया जा रहा है।

फिलहाल, अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के केंद्रीय संसदीय बोर्ड को लेना है। बंगाल की जीत भाजपा के लिए केवल सत्ता का परिवर्तन नहीं, बल्कि वैचारिक विजय है, इसलिए मुख्यमंत्री के चयन में क्षेत्रीय और सांगठनिक संतुलन का खास ख्याल रखा जाएगा। जब तक दिल्ली से आधिकारिक घोषणा नहीं हो जाती, तब तक सस्पेंस बना रहेगा। पार्टी इस भव्य जीत को एक नए और सशक्त 'सोनार बांग्ला' के निर्माण के संकल्प के रूप में देख रही है।