ममता के खिलाफ 'महागठबंधन' की तैयारी: CPI-M, ISF और ओवैसी के साथ हुमायूं कबीर का नया प्लान

बंगाल चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ TMC को घेरने के लिए विपक्षी दल एकजुट हो रहे हैं. हुमायूं कबीर ने अपनी नई पार्टी के साथ CPI-M, ISF और AIMIM से गठबंधन की तैयारी की है. इनका लक्ष्य TMC को हराना और भाजपा को बहुमत से रोकना है.

ममता के खिलाफ 'महागठबंधन' की तैयारी: CPI-M, ISF और ओवैसी के साथ हुमायूं कबीर का नया प्लान- फोटो : news 4 nation

पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को सत्ता से बेदखल करने के लिए एक नया और बड़ा विपक्षी मोर्चा आकार ले रहा है। टीएमसी से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने अपनी नई 'जनता उन्नयन पार्टी' के साथ CPI-M, ISF और AIMIM जैसी पार्टियों को एक मंच पर लाने की तैयारी शुरू कर दी है। इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य ममता बनर्जी को मात देना और भाजपा को बहुमत से रोकना है।

हुमायूं कबीर की रणनीति और शर्तें

हुमायूं कबीर ने स्पष्ट किया है कि उनकी गठबंधन को लेकर बातचीत जारी है और 25 फरवरी तक अंतिम फैसला हो जाएगा। उन्होंने एक महत्वपूर्ण शर्त रखी है कि इस गठबंधन का नेतृत्व केवल माकपा के मोहम्मद सलीम करेंगे। यदि गठबंधन सफल होता है, तो वे 135 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे, अन्यथा अकेले 182 सीटों पर मैदान में उतरने का इरादा रखते हैं।

लेफ्ट और कांग्रेस के बीच बढ़ती तकरार

इस नए गठबंधन की चर्चाओं ने पुराने साथियों के बीच दरार पैदा कर दी है। माकपा सचिव मोहम्मद सलीम द्वारा हुमायूं कबीर के साथ बैठक करने पर लेफ्ट के अंदर ही आलोचना शुरू हो गई है। वहीं, माकपा ने कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन पर सवाल उठाते हुए टीएमसी के साथ साठगांठ का आरोप लगाया है, जिससे लेफ्ट और कांग्रेस के बीच दूरियां बढ़ती दिख रही हैं।

ISF का बदला हुआ रुख और मोलभाव

इंडियन सेकुलर फ्रंट (ISF) ने भी अपनी सियासी ताकत बढ़ाने के लिए मोलभाव तेज कर दिया है। पिछले चुनाव में 32 सीटों पर लड़ने वाली ISF अब 50 सीटों की मांग कर रही है। लेफ्ट के अन्य घटक दलों द्वारा सीटें न छोड़े जाने के कारण, विधायक नौशाद सिद्दीकी की पार्टी अब हुमायूं कबीर की पार्टी के साथ जुड़ने पर गंभीरता से विचार कर रही है।

ओवैसी की पार्टी से लेफ्ट का संपर्क

गठबंधन की कड़ी में एक और चौंकाने वाला घटनाक्रम ओवैसी की पार्टी AIMIM का शामिल होना है। माकपा ने AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष इमरान सोलंकी से संपर्क किया है, जिस पर सोलंकी ने सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए बातचीत के लिए सहमति जताई है। हालांकि, माकपा के अंदर कुछ नेता इसे लेकर अभी भी संशय में हैं, लेकिन भाजपा और टीएमसी विरोधी वोटों को एकजुट करने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

टीएमसी की तीखी प्रतिक्रिया

विपक्ष की इस गोलबंदी पर तृणमूल कांग्रेस ने कड़ा प्रहार किया है। टीएमसी प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने तंज कसते हुए कहा कि माकपा की स्थिति आज बहुत दयनीय हो गई है। उन्होंने गठबंधन की कोशिशों की तुलना 'दर-दर भीख मांगने' से करते हुए कहा कि हार के डर से विपक्षी दल एक-दूसरे का सहारा ढूंढ रहे हैं, लेकिन जनता उनके साथ नहीं है।