जम्मू-कश्मीर ने रचा इतिहास: 67 साल के सूखे के बाद पहली बार बना रणजी चैंपियन
Ranji Trophy Final: जम्मू-कश्मीर क्रिकेट टीम ने भारतीय घरेलू क्रिकेट के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है. 67 साल के सूखे के बाद पहली बार रणजी ट्रॉफी के 2025-26 के फाइनल में उन्होंने कर्नाटक को हराकर पहली बार यह खिताब अपने नाम किया है.
भारतीय घरेलू क्रिकेट के इतिहास में 28 फरवरी 2026 का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया है। जम्मू-कश्मीर की क्रिकेट टीम ने रणजी ट्रॉफी 2025-26 के फाइनल में कर्नाटक जैसी दिग्गज टीम को हराकर पहली बार चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया है। 1959-60 में अपना सफर शुरू करने वाली इस टीम के लिए यह उपलब्धि 67 वर्षों के लंबे इंतजार और कड़े संघर्ष के बाद आई है, जिससे पूरे प्रदेश में जश्न का माहौल है।
पहली पारी में विशाल स्कोर और निर्णायक बढ़त
फाइनल मुकाबले में जम्मू-कश्मीर ने टॉस जीतकर अपनी रणनीतियों को बखूबी अंजाम दिया। टीम ने पहली पारी में 584 रनों का विशाल स्कोर खड़ा कर कर्नाटक पर मनोवैज्ञानिक दबाव बना दिया। इसके जवाब में कर्नाटक की मजबूत बल्लेबाजी लड़खड़ा गई और पूरी टीम महज 293 रनों पर सिमट गई। पहली पारी में मिली इस भारी बढ़त ने ही जम्मू-कश्मीर की खिताबी जीत की नींव रख दी थी।
कामरान और साहिल के शतकों ने किया मुकाबला एकतरफा
मैच की दूसरी पारी में भी जम्मू-कश्मीर के बल्लेबाजों ने अपना दबदबा कायम रखा। सलामी बल्लेबाज कामरान इकबाल ने 160 रनों की शानदार पारी खेली, जबकि साहिल ने भी बेहतरीन शतक जड़कर टीम की स्थिति को अभेद्य बना दिया। दूसरी पारी के अंत तक जम्मू-कश्मीर की कुल बढ़त 630 रनों के पार पहुंच गई, जिससे मैच पूरी तरह से एकतरफा हो गया और कर्नाटक की वापसी की सभी उम्मीदें खत्म हो गईं।
रणजी ट्रॉफी के नियम और खिताबी फैसला
रणजी ट्रॉफी के नियमों के अनुसार, यदि फाइनल मैच ड्रॉ पर समाप्त होता है, तो विजेता का फैसला पहली पारी की बढ़त (First Innings Lead) के आधार पर किया जाता है। चूंकि जम्मू-कश्मीर ने पहली पारी में कर्नाटक पर बड़ी बढ़त हासिल की थी, इसलिए मैच के ड्रॉ घोषित होते ही जम्मू-कश्मीर को आधिकारिक रूप से रणजी चैंपियन घोषित कर दिया गया। यह पहली बार था जब टीम ने फाइनल में प्रवेश किया और पहले ही प्रयास में ट्रॉफी अपने नाम की।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की मौजूदगी और उत्साहवर्धन
इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला स्वयं हुबली के मैदान में मौजूद रहे। टीम की जीत के बाद उन्होंने मैदान पर जाकर खिलाड़ियों से मुलाकात की और उन्हें इस अभूतपूर्व सफलता की बधाई दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह जीत केवल एक ट्रॉफी नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और राज्य में खेल संस्कृति को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
जम्मू-कश्मीर क्रिकेट का सफर बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है। 1982-83 में सेना के खिलाफ अपनी पहली जीत दर्ज करने से लेकर आज देश की सबसे बड़ी घरेलू ट्रॉफी जीतने तक, टीम ने बुनियादी सुविधाओं की कमी और विपरीत परिस्थितियों का डटकर सामना किया है। कर्नाटक जैसी कई बार की चैंपियन टीम को हराकर मिली यह जीत दर्शाती है कि सही प्रतिभा और दृढ़ संकल्प के साथ किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है।