टैरिफ की तकरार से सियासी संग्राम! डोनाल्ड ट्रंप ने कहा- भारत को देना होगा शुल्क, समझौते में नहीं होगा बदलाव, कांग्रेस ने जमकर साधा निशाना

मेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ लफ़्ज़ों में ऐलान किया है कि अमेरिकी उच्चतम न्यायालय के प्रतिकूल फैसले के बावजूद भारत के साथ हुआ व्यापार समझौता जस का तस रहेगा

डोनाल्ड ट्रंप के तेवर कड़े- फोटो : reporter

Donald Trump: अमेरिकी सियासत के गलियारों से निकली एक सख्त आवाज़ ने वैश्विक व्यापार की बिसात पर हलचल मचा दी है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ लफ़्ज़ों में ऐलान किया है कि अमेरिकी उच्चतम न्यायालय के प्रतिकूल फैसले के बावजूद भारत के साथ हुआ व्यापार समझौता जस का तस रहेगा और भारत को शुल्क अदा करना ही होगा।

दरअसल,अमेरिकी उच्चतम न्यायालय  ने ट्रंप द्वारा कई देशों पर लगाए गए व्यापक टैरिफ़ आदेशों को रद्द कर दिया। इस फैसले को ट्रंप ने “निराशाजनक” करार दिया, लेकिन साथ ही यह भी दो टूक कहा कि भारत के साथ हुए करार में “कुछ नहीं बदलेगा।” उन्होंने संवाददाता सम्मेलन में कहा, “वे (भारत) शुल्क का भुगतान करेंगे और हम नहीं करेंगे।”

ट्रंप ने यह भी एलान किया कि वे वैश्विक स्तर पर 10 प्रतिशत टैरिफ़ लागू करने के लिए एक नए शासकीय आदेश पर दस्तखत करेंगे। उन्होंने दावा किया कि पहले की व्यवस्था में अमेरिका को नुकसान हो रहा था, लेकिन अब समझौता “निष्पक्ष” है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ अपने रिश्तों को “शानदार” बताते हुए ट्रंप ने कहा कि मोदी “सज्जन व्यक्ति” हैं, मगर व्यापारिक मसलों में “काफी होशियार” भी रहे हैं।

ट्रंप ने यह भी जिक्र किया कि भारत ने उनके अनुरोध पर रूस से तेल आयात में कमी की, ताकि युद्ध की आग को ठंडा किया जा सके। उनके मुताबिक, हर महीने हजारों लोगों की जान जा रही है और यह समझौता व्यापक रणनीतिक समीकरण का हिस्सा है।

इधर भारत में इस अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। कांग्रेस ने इसे देशहित के साथ समझौता बताया है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि समझौते की घोषणा ट्रंप के हाथों करवाई गई? उन्होंने अमेरिकी अदालत के फैसले का हवाला देते हुए सरकार की मंशा पर सवालिया निशान लगाया।

कांग्रेस का आरोप है कि यह करार “छवि बचाने” की जल्दबाजी का नतीजा है, जबकि सरकार इसे रणनीतिक कूटनीति की कामयाबी बता रही है।

सवाल यह है कि क्या यह टैरिफ़ की तकरार आने वाले दिनों में भारत-अमेरिका रिश्तों में नई तल्ख़ी पैदा करेगी, या फिर इसे सियासी बयानबाज़ी का हिस्सा मानकर आगे बढ़ा जाएगा? फिलहाल, सियासत की बिसात पर चालें तेज हैं और निगाहें वॉशिंगटन से लेकर नई दिल्ली तक टिकी हुई हैं।