Kerala Name Changed: अरे सुनिए, केरल नहीं 'केरलम' कहिए, मोदी सरकार ने मानी वामपंथी सरकार की मांग, जानिए क्यों बदला 'गॉड्स ओन कंट्री' का नाम
Kerala Name Changed: अब से 'गॉड्स ओन कंट्री' को केरल नहीं करेलम कहिए...जी हां मोदी सरकार ने वामपंशी सरकार की प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए केरल का नाम बदल दिया है। कैबिनेट से इसकी मंजूरी मिल गई है।
Kerala Name Changed: दक्षिण भारत का एक राज्य जिसे आप अब तक 'केरल', 'धरती का स्वर्ग', और 'गॉड्स ओन कंट्री' के नाम से जानते थे उसे अब आप केरल नहीं केरलम कहिए...जी हां केंद्र की मोदी सरकार ने केरल का नाम बदलकर केरलम रखने वाली प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। केरल की वामपंथी सरकार ने केंद्र की मोदी सरकार से प्रस्ताव दिया था। माना जा रहा है कि यह केवल एक नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि अपनी मलयालम विरासत और गौरव को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की एक बड़ी कोशिश है। आखिर क्यों पड़ी नाम बदलने की जरूरत और संविधान के किस अनुच्छेद के तहत यह बदलाव होगा? आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक कदम के पीछे की पूरी कहानी।
केरल नहीं करेलम कहिए
दरअसल, केंद्रीय कैबिनेट ने राज्य का नाम ‘केरल’ से बदलकर ‘केरलम’ (Keralam) करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। मंगलवार को नई पीएमओ बिल्डिंग ‘सेवा तीर्थ’ में हुई कैबिनेट बैठक में यह अहम फैसला लिया गया। यह कदम अप्रैल–मई में संभावित विधानसभा चुनावों से पहले उठाया गया है। बता दें कि दक्षिण भारत में अपना आधार मजबूत करने की कोशिश कर रही बीजेपी के लिए केरल रणनीतिक रूप से अहम है। इससे पहले भी 24 जून 2024 को केरल विधानसभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से राज्य का आधिकारिक नाम ‘Kerala’ से बदलकर ‘Keralam’ करने की अपील की थी। अगस्त 2023 में भी ऐसा ही प्रस्ताव पारित किया गया था, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कुछ तकनीकी संशोधनों का सुझाव दिया था। संशोधित प्रस्ताव के बाद अब केंद्र ने इसे मंजूरी दे दी है।
भाषाई पहचान से जुड़ा है फैसला
मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा था कि राज्य को मलयालम भाषा में ‘केरलम’ कहा जाता है। 1 नवंबर 1956 को भाषाई आधार पर राज्यों के गठन के बाद से ही मलयालम भाषी समुदाय के लिए संयुक्त केरल की मांग रही है। ‘केरल पिरावी दिवस’ भी 1 नवंबर को मनाया जाता है। हालांकि संविधान की पहली अनुसूची में राज्य का नाम ‘Kerala’ दर्ज है। मुख्यमंत्री ने आग्रह किया था कि संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाओं में राज्य का नाम ‘केरलम’ किया जाए।
‘केरलम’ का अर्थ और ऐतिहासिक संदर्भ
‘केरल’ या ‘केरलम’ नाम की उत्पत्ति को लेकर कई ऐतिहासिक और पौराणिक संदर्भ मिलते हैं। मान्यता है कि भगवान परशुराम ने समुद्र से भूमि निकालकर इस क्षेत्र का निर्माण किया। ‘केर’ (जल) और ‘अलम’ (भूमि) से ‘केरलम’ शब्द बना, जिसका अर्थ हुआ ‘जल से निकली भूमि’। मलयालम भाषा में राज्य को हमेशा से ‘केरलम’ कहा जाता रहा है। ‘केरा’ का अर्थ नारियल और ‘आलम’ का अर्थ स्थान माना जाता है इस प्रकार ‘केरलम’ का अर्थ हुआ ‘नारियलों की भूमि’। इतिहास में मौर्य सम्राट अशोक के शिलालेखों में ‘केरलपुत्र’ शब्द मिलता है, जिसे इस क्षेत्र के प्राचीन संदर्भ के रूप में देखा जाता है। वहीं चेरा वंश के संदर्भ में भी ‘चेरालम’ से ‘केरलम’ शब्द के विकसित होने की थ्योरी दी जाती है।
पहचान की राजनीति या सांस्कृतिक सम्मान?
विश्लेषकों के मुताबिक, यह फैसला केवल एक अक्षर जोड़ने का नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और भाषाई पहचान को मान्यता देने का है। केंद्र ने इस प्रस्ताव को मंजूरी देकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि क्षेत्रीय भाषाओं और पहचान का सम्मान राष्ट्रीय एकता के विपरीत नहीं, बल्कि उसका हिस्सा है। अब आगे संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य का नाम आधिकारिक रूप से ‘केरलम’ हो जाएगा।