Indus Waters Treaty: खून और पानी साथ नहीं बह सकते...भारत की सख्ती से बेहाल पाकिस्तान, अब अमेरिका में लगाई सिंधु के पानी की गुहार

Indus Waters Treaty: भारत के सख्त रुख के बीच पाकिस्तान ने अब अमेरिका की धरती से सिंधु जल संधि बहाल करने की गुहार लगाई है।

फिर गिड़गिड़ाया पाकिस्तान- फोटो : social Media

Indus Waters Treaty: सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनातनी एक बार फिर सुर्खियों में है। भारत के सख्त रुख के बीच पाकिस्तान ने अब अमेरिका की धरती से सिंधु जल संधि बहाल करने की गुहार लगाई है। पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा है कि सिंधु नदी प्रणाली उनके मुल्क की जीवनरेखा है और इससे 25 करोड़ से अधिक लोगों की जिंदगी जुड़ी हुई है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी इस मामले में दखल देने की अपील की। 28 अगस्त को वॉशिंगटन में पाकिस्तान के दूतावास की ओर से आयोजित वर्चुअल सेमिनार में इशाक डार ने भारत के अप्रैल 2025 में सिंधु जल संधि को ‘abeyance’ यानी स्थगित रखने के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई। डार का दावा है कि भारत का यह फैसला संधि के तहत उचित नहीं ठहराया जा सकता और पाकिस्तान इसे अब भी वैध एवं बाध्यकारी मानता है।

पानी पर पाकिस्तान की बेचैनी क्यों बढ़ी?

पाकिस्तान के लिए सिंधु नदी प्रणाली महज पानी का स्रोत नहीं है। उसकी कृषि, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा उत्पादन, रोजी-रोटी और आर्थिक विकास का बड़ा हिस्सा इसी जल तंत्र पर निर्भर है। इशाक डार ने कहा कि पाकिस्तान की जल सुरक्षा सीधे उसकी आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी हुई है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि सिंधु जल को लेकर बढ़ता तनाव दक्षिण एशिया की शांति और स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।डार ने पाकिस्तान के बढ़ते जल संकट और जलवायु परिवर्तन का भी जिक्र किया। उनका कहना है कि पिछले दशकों में पाकिस्तान में प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता में गिरावट आई है। ऐसे में सिंधु नदी प्रणाली पर किसी भी तरह का दबाव इस्लामाबाद के लिए बेहद संवेदनशील मसला बन गया है।

भारत का रुख अब भी साफ

दूसरी तरफ नई दिल्ली अपने फैसले से पीछे हटती दिखाई नहीं दे रही है। अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को स्थगित रखने का फैसला किया था। भारत ने आतंकवाद और सामान्य रिश्तों को एक साथ चलने से इनकार किया था।यही वह बिंदु है जिसने पानी को भारत-पाकिस्तान संबंधों के सबसे संवेदनशील मुद्दों में शामिल कर दिया है। पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर संधि को बहाल करने की मांग उठा रहा है, जबकि भारत का रुख आतंकवाद के मुद्दे से जोड़कर देखा जा रहा है।

‘पानी को हथियार न बनाएं’—पाकिस्तान की दलील

इशाक डार ने कहा कि साझा जल संसाधनों को राजनीतिक दबाव या टकराव का हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पाकिस्तान को संधि के तहत मिले पानी के अधिकारों से वंचित करने की कोशिश की गई तो इसके क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं।पाकिस्तान का कहना है कि 1960 की संधि ने छह दशक से अधिक समय तक दोनों देशों के बीच जल बंटवारे का ढांचा कायम रखा और इसे बातचीत तथा तयशुदा तंत्र के जरिए ही सुलझाया जाना चाहिए।

भारत-पाक रिश्तों में पानी बना नया रणक्षेत्र

सिंधु जल संधि मूल रूप से 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई थी और विश्व बैंक की मध्यस्थता से इसका ढांचा तैयार हुआ था। संधि में सिंधु नदी तंत्र के जल के इस्तेमाल को लेकर दोनों देशों के अधिकार और दायित्व तय किए गए हैं।अब हालात बदल चुके हैं। एक तरफ पाकिस्तान सिंधु को अपनी जीवनरेखा बताकर अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने में लगा है, तो दूसरी तरफ भारत आतंकवाद के सवाल को रिश्तों की बुनियाद से जोड़कर देखता है।यानी मामला सिर्फ नदी के पानी का नहीं रह गया है। सिंधु का पानी अब भारत-पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक दबाव, सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की बड़ी लड़ाई का प्रतीक बन चुका है। पाकिस्तान लगातार दरवाजे खटखटा रहा है, लेकिन फिलहाल नई दिल्ली के रुख में नरमी के संकेत नजर नहीं आ रहे...