बिहार में जमीन रजिस्ट्री के नियम सख्त: कीमत छिपाई तो बुरे फंसेगे, जान लीजिये नया आदेश

नए नियम के अनुसार जिलाधिकारी (DM) या सहायक निबंधन महानिरीक्षक (AIG Registration) के आदेश के बाद संबंधित व्यक्ति को 60 दिनों के भीतर बकाया स्टांप शुल्क और जुर्माने की राशि जमा करनी होगी।

Bihar Property Registration Rules
Bihar Property Registration Rules- फोटो : news4nation

Bihar Property Registration Rules : बिहार में जमीन और मकान की रजिस्ट्री कराने वालों के लिए बड़ा बदलाव हुआ है। राज्य सरकार ने 'भारतीय स्टांप (बिहार संशोधन) विधेयक, 2026' लागू कर दिया है, जिसका राजपत्र (गजट) अधिसूचना भी जारी हो चुकी है। नए नियमों का उद्देश्य रजिस्ट्री के दौरान संपत्ति का कम मूल्य दिखाकर स्टांप शुल्क (Stamp Duty) और निबंधन शुल्क की चोरी पर रोक लगाना है। अब यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर संपत्ति का बाजार मूल्य कम दिखाता है, तो उसे भारी आर्थिक दंड का सामना करना पड़ेगा।


नई व्यवस्था के तहत यदि जांच में यह साबित हो जाता है कि संपत्ति का वास्तविक बाजार मूल्य छिपाकर कम स्टांप शुल्क जमा किया गया है, तो संबंधित व्यक्ति से राजस्व चोरी की पूरी राशि के बराबर यानी 100 प्रतिशत तक जुर्माना वसूला जाएगा। पहले ऐसे मामलों में अधिकतम 10 प्रतिशत तक जुर्माना लगाने का प्रावधान था। सरकार का मानना है कि इससे फर्जी मूल्यांकन और राजस्व नुकसान पर प्रभावी रोक लगेगी।


60 दिन में राशि जमा करनी होगी

नए नियम के अनुसार जिलाधिकारी (DM) या सहायक निबंधन महानिरीक्षक (AIG Registration) के आदेश के बाद संबंधित व्यक्ति को 60 दिनों के भीतर बकाया स्टांप शुल्क और जुर्माने की राशि जमा करनी होगी। यदि तय समय में भुगतान नहीं किया गया तो उस पर ब्याज भी लगाया जाएगा। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि ब्याज की कुल राशि मूल राजस्व चोरी की राशि से अधिक नहीं होगी।


अब चार साल तक होगी जांच

सरकार ने जांच की समय-सीमा भी बढ़ा दी है। पहले रजिस्ट्री के बाद ऐसे मामलों की जांच दो वर्ष के भीतर की जा सकती थी, लेकिन अब यह अवधि चार वर्ष कर दी गई है। यानी यदि चार साल के भीतर किसी रजिस्ट्री में कम मूल्य दिखाकर राजस्व चोरी का मामला सामने आता है, तो विभाग कार्रवाई कर सकेगा।


रजिस्ट्री से पहले तय होगा बाजार मूल्य

नई व्यवस्था के तहत निबंधन अधिकारियों को भी अधिक अधिकार दिए गए हैं। यदि किसी संपत्ति के मूल्य को लेकर संदेह होता है, तो सहायक निबंधन पदाधिकारी रजिस्ट्री से पहले ही उसका बाजार मूल्य निर्धारित कराने के लिए मामला जिलाधिकारी या सहायक निबंधन महानिरीक्षक के पास भेज सकेंगे। इससे फर्जी मूल्यांकन और गलत रजिस्ट्री पर पहले ही रोक लगाई जा सकेगी।


मामलों का होगा तेजी से निपटारा

पहले इस तरह के मामलों की सुनवाई का अधिकार केवल जिलाधिकारी के पास था। अब सहायक निबंधन महानिरीक्षक को भी सुनवाई और निर्णय का अधिकार दिया गया है। सरकार का कहना है कि इससे लंबित मामलों का निपटारा तेजी से होगा और राजस्व वसूली की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी।


हर साल सामने आते हैं हजारों मामले

सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में बिहार में लगभग 15.94 लाख दस्तावेजों का निबंधन हुआ, जिनमें करीब 80 प्रतिशत रजिस्ट्री जमीन से संबंधित थीं। राज्य में हर साल औसतन 20 हजार से अधिक ऐसे मामले सामने आते हैं, जिनमें संपत्ति का कम मूल्य दिखाकर स्टांप शुल्क की चोरी की आशंका रहती है। इसी पर रोक लगाने के लिए सरकार ने जीपीएस मैपिंग, डिजिटल सत्यापन और सख्त जांच व्यवस्था को भी मजबूत किया है।


राज्य सरकार का कहना है कि नए नियमों से पारदर्शिता बढ़ेगी, राजस्व की चोरी रुकेगी और रजिस्ट्री प्रक्रिया अधिक जवाबदेह बनेगी। अब जमीन या मकान खरीदने वाले लोगों के लिए यह जरूरी होगा कि वे संपत्ति का वास्तविक बाजार मूल्य दर्ज कराकर ही रजिस्ट्री कराएं, अन्यथा बाद में भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।