Census 2027: देश में पहली बार होगी जातीय गणना, 40 सवालों का देना होगा जवाब, इस दिन से शुरुआत

इस बार जनगणना में जाति से जुड़ा सवाल भी शामिल किया गया है, जो स्वतंत्र भारत में पहली बार होगा। जनगणना 2011 में कुल 29 सवाल पूछे गए थे, जबकि इस बार प्रश्नों की संख्या बढ़ाकर 40 कर दी गई है।

 Caste enumeration in Census 2027
Caste enumeration in Census 2027- फोटो : news4nation

Census 2027: केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के लिए शुक्रवार, 14 अगस्त को जनसंख्या गणना चरण में पूछे जाने वाले 40 सवालों की सूची जारी कर दी। इस बार जनगणना में जाति से जुड़ा सवाल भी शामिल किया गया है, जो स्वतंत्र भारत में पहली बार होगा। इससे पहले देश में आखिरी बार जातीय गणना 1931 में हुई थी।


जनगणना 2011 में कुल 29 सवाल पूछे गए थे, जबकि इस बार प्रश्नों की संख्या बढ़ाकर 40 कर दी गई है। नए सवालों में कोरोना वैक्सीन की खुराक किस स्थान पर ली गई, बैंक खातों की संख्या, डिजिटल साक्षरता, घोषित राष्ट्रीयता और जीवनसाथी का नाम जैसी जानकारियां शामिल हैं। इसके अलावा उपलब्ध होने पर मोबाइल नंबर, आधार नंबर, वोटर आईडी और पासपोर्ट नंबर भी दर्ज किया जाएगा।


जाति बताने के लिए नहीं होगी कोई तैयार सूची

जनगणना में जाति से संबंधित सवाल को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा है। अधिकारियों के मुताबिक, प्रश्नावली में जातियों की कोई पूर्व निर्धारित सूची नहीं दी जाएगी। जवाबदाता अपनी जाति जिस नाम से बताएगा, उसे उसी रूप में दर्ज किया जाएगा। गणनाकर्मी अपनी ओर से जाति को किसी उपजाति या अन्य श्रेणी में वर्गीकृत नहीं करेंगे। 


यह व्यवस्था 2011 की सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना के समान होगी। उस समय बड़ी संख्या में अलग-अलग जाति नाम सामने आए थे। सरकार के आंकड़ों में जहां 4,147 जातियां दर्ज थीं, वहीं करीब 46 लाख अलग-अलग जाति नाम सामने आने के कारण उस आंकड़े का इस्तेमाल करना मुश्किल हो गया था।


कांग्रेस ने उठाये सवाल 

कांग्रेस ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि उम्मीद थी कि जाति की गणना के लिए राज्यों के हिसाब से पहले से तैयार सूची होगी, जैसा बिहार और तेलंगाना की जातीय गणना में किया गया था। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होने से सरकार की मंशा को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं।


रोजगार और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े सवाल भी

जनगणना में लोगों से पिछले एक साल के दौरान काम करने, आर्थिक गतिविधि की श्रेणी, पेशे, उद्योग, व्यापार या सेवा के प्रकार और कामगार की श्रेणी से जुड़ी जानकारी भी मांगी जाएगी। सीमांत, अर्ध-सीमांत और गैर-कामगार लोगों से यह भी पूछा जाएगा कि वे काम के लिए उपलब्ध हैं या नहीं और क्या उन्हें अपने कार्यस्थल तक जाने के लिए यात्रा करनी पड़ती है। इसके अलावा जन्म स्थान, पिछला निवास स्थान, पलायन का कारण और अंतिम पलायन के बाद गांव या शहर में रहने की अवधि से संबंधित सवाल भी पूछे जाएंगे।


महिलाओं से बच्चों की संख्या की जानकारी

वर्तमान में विवाहित, विधवा, तलाकशुदा और अलग रह रही महिलाओं से उनके जीवित बच्चों की संख्या, मौजूदा विवाह से हुए बच्चों की संख्या और पिछले एक साल में जीवित जन्मे बच्चों की संख्या के बारे में भी जानकारी ली जाएगी।


अलग-अलग चरणों में होगी जनगणना

सरकार के मुताबिक, लद्दाख और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड के बर्फबारी वाले गैर-समानकालिक क्षेत्रों में जनसंख्या गणना 1 से 30 सितंबर के बीच होगी। वहीं, देश के बाकी हिस्सों में यह प्रक्रिया अगले साल फरवरी में आयोजित की जाएगी। जनगणना के लिए स्व-गणना (Self Enumeration) चरण 17 अगस्त से शुरू होगा।