पेपर लीक पर सख्ती की तैयारी: संशोधन बिल से बदल जाएगी जांच, सजा और ट्रायल की पूरी व्यवस्था

पेपर लीक किसी संगठित गिरोह या माफिया के जरिए कराया जाता है तो अब कम से कम 7 साल की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

Paper Leak Amendment Bill 2026
Paper Leak Amendment Bill 2026- फोटो : news4nation

 केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और परीक्षा में होने वाली धांधली पर प्रभावी रोक लगाने के लिए 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' लोकसभा में पेश किया है। सरकार का दावा है कि यह संशोधन 2024 के कानून को और अधिक सख्त और प्रभावी बनाएगा, जिससे पेपर लीक के मामलों की जांच और सुनवाई तय समय में पूरी हो सकेगी तथा दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी। संशोधन विधेयक में केवल सजा बढ़ाने का ही प्रावधान नहीं किया गया है, बल्कि जांच, ट्रायल, परीक्षा सुरक्षा और विशेष अदालतों जैसी कई नई व्यवस्थाएं भी जोड़ी गई हैं।


क्या-क्या बदलेगा?

2024 के कानून में पेपर लीक या अनुचित साधनों के इस्तेमाल पर 3 से 5 साल तक की जेल का प्रावधान था। संशोधन के बाद दोषियों को कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल की जेल के साथ 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकेगा। यदि पेपर लीक किसी संगठित गिरोह या माफिया के जरिए कराया जाता है तो अब कम से कम 7 साल की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। पहले इसके लिए 5 से 10 साल की जेल और न्यूनतम एक करोड़ रुपये जुर्माने का प्रावधान था।


जांच होगी तय समय में

पहले कानून में जांच पूरी करने की कोई समय-सीमा तय नहीं थी। नए संशोधन के तहत अब दो महीने के भीतर जांच पूरी करना अनिवार्य होगा, ताकि मामलों का जल्द निपटारा हो सके।


तीन महीने में ट्रायल का लक्ष्य

संशोधन के अनुसार चार्जशीट दाखिल होने के बाद तीन महीने के भीतर मुकदमे का ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए अदालतों में रोजाना सुनवाई की व्यवस्था की जाएगी।


फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रावधान

राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को पेपर लीक जैसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का अधिकार दिया जाएगा, जिससे मामलों का जल्द फैसला हो सके।


विशेष STF का गठन

जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार विशेष स्पेशल टास्क फोर्स (STF) गठित कर सकेगी, जो बड़े और संगठित पेपर लीक मामलों की जांच करेगी।


15 तरह के अपराधों की स्पष्ट सूची

संशोधन में पहली बार 15 प्रकार के अपराधों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। इनमें पेपर लीक, OMR शीट से छेड़छाड़, फर्जी वेबसाइट बनाना, फर्जी एडमिट कार्ड तैयार करना और अन्य परीक्षा संबंधी धोखाधड़ी शामिल हैं।


परीक्षा सुरक्षा के नए मानक

विधेयक में परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन, परीक्षा केंद्रों का प्री-ऑडिट, उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग, वैज्ञानिक सीट आवंटन, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, इनविजिलेशन और परीक्षा के बाद की प्रक्रिया के लिए विस्तृत मानक तय करने का प्रस्ताव है।


सरकार का दावा और विपक्ष का सवाल

सरकार का कहना है कि यह संशोधन छात्रों के भविष्य की सुरक्षा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए लाया गया है। वहीं विपक्ष का आरोप है कि केवल कानून को सख्त बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और पेपर लीक नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई की भी जरूरत है। यदि यह संशोधन संसद से पारित हो जाता है तो देशभर में होने वाली सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य परीक्षा संबंधी अपराधों के खिलाफ पहले से कहीं अधिक कड़ी कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो जाएगा।