'सलवार उतारना, लड़की का सीना दबाना रेप की कोशिश नहीं', पटना हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान

पटना हाईकोर्ट ने 9 जुलाई को अपने फैसले में कहा था कि महिला की सलवार उतारने की कोशिश और उसके सीने को दबाने की घटना को बलात्कार का प्रयास नहीं माना जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने अब इस मामले में संज्ञान लिया है

Supreme Court on Patna High Court
Supreme Court on Patna High Court- फोटो : news4nation

 Patna High Court : सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाई कोर्ट की उस टिप्पणी पर संज्ञान लिया है जिसमें लडकी का सलवार उतारना और प्राइवेट पार्ट दबाना रेप की कोशिश नहीं बताया गया था. महिला की सलवार उतारने की कोशिश और उसके सीने को दबाने की घटना को रेप की कोशिश नहीं मानने वाले पटना हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है. सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर स्वतः संज्ञान लिया है. चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने कहा कि इस मामले के तथ्यों को देखा जाएगा. बेंच ने यह भी कहा कि हाई कोर्ट के फैसले में कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां हैं.


यह मामला बिहार के बांका जिले के अमरपुर से जुड़ा है और करीब 18 साल पुराना है. सुप्रीम कोर्ट अब पटना हाईकोर्ट के 9 जुलाई 2026 के फैसले और उसमें कानून की व्याख्या को लेकर उठे सवालों की जांच करेगा. इस मामले में पटना हाईकोर्ट ने आरोपी को बलात्कार की कोशिश यानी धारा 376/511 के तहत मिली सजा को बदल दिया था. हाईकोर्ट ने माना था कि मामले में आरोपी का महिला के साथ किया गया कृत्य बलात्कार के प्रयास की श्रेणी में नहीं आता, बल्कि यह महिला की लज्जा भंग करने यानी धारा 354 के तहत अपराध है.


CJI सूर्यकांत ने कहा कि पटना हाईकोर्ट के इस फैसले में कुछ कमेंट्स आपत्तिजनक हैं। उन्होंने कहा कि आरोपी का पक्ष सुनने के बाद इसे खारिज भी किया जा सकता है। CJI सूर्यकांत ने बिहार के एडवोकेट जनरल एसडी संजय से कहा कि स्थानीय पुलिस के जरिए आरोपी को नोटिस भेजा जाए। सुप्रीम कोर्ट को जुलाई में पटना हाईकोर्ट के आदेश की जानकारी दी गई, तब SC इलाहाबाद हाईकोर्ट के ऐसे ही आदेश पर सुनवाई कर रहा था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसले में कहा था- नाबालिग की छाती दबाना, पायजामे का नाड़ा तोड़ना रेप की कोशिश नहीं है। इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। अब सीजेआई ने पटना हाई कोर्ट के मामले में भी संज्ञान लिया है और माना जा रहा है इस मामले में कोई बड़ा आदेश सुनाया जा सकता है। 


पटना हाईकोर्ट ने 9 जुलाई को अपने फैसले में कहा था कि महिला की सलवार उतारने की कोशिश और उसके सीने को दबाने की घटना को बलात्कार का प्रयास नहीं माना जा सकता। खासकर तब, जब शारीरिक संबंध बनाने का कोई सबूत न हो और बलात्कार के इरादे का कोई कृत्य सामने न आए।


18 साल पहले 20 जनवरी 2008 को बिहार के बांका में एक स्टूडियो के मालिक के खिलाफ रेप की कोशिश की FIR हुई। युवती ने आरोप लगाया कि वह पिता के साथ फोटो खिंचवाने गई थी। स्टूडियो मालिक हिमांशु ने स्टूडियो का दरवाजा बंद कर लिया। मेरी सलवार उतारने की कोशिश की। रेप के इरादे से छाती दबाने लगा। 2013 में बांका कोर्ट ने हिमांशु को रेप का प्रयास का दोषी करार दिया था। 3 साल कारावास की सजा सुनाई। लोअर कोर्ट के फैसले को हिमांशु ने पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। 13 साल बाद 9 जुलाई 2026 को पटना हाईकोर्ट के जस्टिस पूर्णेंदु सिंह ने कहा- इस मामले में मेडिकल एविडेंस नहीं है। रेप करने की कोशिश में भी स्पष्ट शारीरिक प्रयास के प्रमाण नहीं है। इसलिए आरोपी को बरी किया जाता है।