Assam SEBA Class 10 Question: असम के माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (SEBA) की कक्षा 10 की सामाजिक विज्ञान परीक्षा में एक प्रश्न ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी। कई लोगों ने इसे विभाजनकारी करार दिया, जिससे विवाद खड़ा हो गया। इस प्रश्न पर प्रतिक्रिया देते हुए, राज्य के शिक्षा मंत्री रनोज पेगु ने इसे एक अनावश्यक बहस बताया और कहा कि यह छात्रों के भारत की धर्मनिरपेक्षता की समझ की जांच करने के लिए था।
क्या था विवादित प्रश्न?
गुरुवार को आयोजित कक्षा 10 की सामाजिक विज्ञान परीक्षा में छात्रों से पूछा गया था:
"मान लीजिए, सरकार ने दंबुक नामक गांव में एक अस्पताल स्थापित किया है। अस्पताल हिंदुओं को मुफ्त इलाज प्रदान करता है। दूसरे धर्म के लोगों को इलाज का खर्च खुद उठाना होगा. क्या भारत जैसे देश में सरकार ऐसे कदम उठा सकती है? अपनी राय दीजिये" यह तीन अंकों का प्रश्न था, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर विभाजनकारी और धार्मिक आधार पर भेदभाव को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया।
शिक्षा मंत्री का जवाब
सोशल मीडिया पर बढ़ती आलोचना के बीच, असम के शिक्षा मंत्री रनोज पेगु ने इस बहस को अनावश्यक करार दिया। उन्होंने कहा, "संविधान की प्रस्तावना किसी भी तरह के भेदभाव की अनुमति नहीं देती। यह प्रश्न सिर्फ यह जांचने के लिए था कि क्या छात्रों को यह जानकारी है कि भारत में धर्म, जाति या भाषा के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता है।" मंत्री ने आगे कहा, "हम 'सबका साथ, सबका विकास' की नीति पर काम कर रहे हैं, और इसमें कोई नाराज़गी या बहस करने जैसी बात नहीं है।"
सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया
प्रश्न को लेकर सोशल मीडिया पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ उपयोगकर्ताओं ने इसे धार्मिक विभाजन को बढ़ावा देने वाला बताया, जबकि अन्य ने इसे शैक्षिक दृष्टिकोण से एक सही प्रश्न माना, जो छात्रों को भारत के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांत को समझने में मदद करता है।
असम SEBA की परीक्षा
असम SEBA की इस परीक्षा का विवादित प्रश्न एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म देता है—क्या छात्रों को भारत की धर्मनिरपेक्षता और संविधान की सही समझ है? शिक्षा मंत्री के अनुसार, यह सवाल केवल इस बात की परीक्षा था कि क्या छात्र संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत को समझते हैं। अब यह देखना होगा कि आगे इस मामले पर क्या कदम उठाए जाते हैं।