'भारत रत्न' प्रोफेसर सीएनआर राव को जारी हुआ नोटिस, SIR को लेकर पहचान साबित करने का फरमान

प्रोफेसर सीएनआर राव रसायन विज्ञान के क्षेत्र में अपने महत्वपूर्ण योगदान के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। उन्हें 2014 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। अब उन्हें SIR को लेकर पहचान साबित के लिए नोटिस जारी हुआ है

Bharat Ratna Scientist CNR Rao
Bharat Ratna Scientist CNR Rao- फोटो : news4nation

Bharat Ratna Scientist CNR Rao : मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) के दौरान देश के प्रसिद्ध वैज्ञानिक और भारत रत्न से सम्मानित प्रोफेसर सीएनआर राव का नाम भी एक विसंगति के चलते जांच के दायरे में आ गया है। चुनाव आयोग ने 92 वर्षीय वैज्ञानिक को अपनी पहचान स्थापित करने के लिए सुनवाई में उपस्थित होने का नोटिस जारी किया है।


रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला उनके नाम की स्पेलिंग में मामूली अंतर से जुड़ा है। पुरानी मतदाता सूची में उनका नाम “Prof CNR Rao” दर्ज है, जबकि मौजूदा सूची में इसे “Proff CNR Rao” लिखा गया है। नाम में अतिरिक्त ‘f’ को चुनावी रिकॉर्ड में “self-name mismatch” यानी स्वयं के नाम में विसंगति के तौर पर दर्ज किया गया है।


क्या है ‘Self-Name Mismatch’?

SIR प्रक्रिया के दौरान ऐसे मतदाताओं के मामलों को “logical discrepancies” की श्रेणी में रखा जा रहा है, जिनका नाम पुरानी मतदाता सूची में मौजूद है, लेकिन उनके पुराने विवरण और मौजूदा रिकॉर्ड में अंतर पाया जाता है। इसमें नाम, माता-पिता के नाम, उम्र से जुड़े अंतर समेत अन्य विसंगतियां शामिल हो सकती हैं। सीएनआर राव को बेंगलुरु के मल्लेश्वरम में सुनवाई के लिए बुलाया गया है, जो भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के आसपास का क्षेत्र है। नियमों के अनुसार, जिस व्यक्ति के नाम पर नोटिस जारी हुआ है, वही सुनवाई में उपस्थित होकर अपनी पहचान स्थापित कर सकता है।


देश के शीर्ष वैज्ञानिकों में शुमार हैं CNR राव

प्रोफेसर सीएनआर राव ठोस अवस्था और संरचनात्मक रसायन विज्ञान के क्षेत्र में अपने महत्वपूर्ण योगदान के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। उन्हें 2014 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। वे यह सम्मान पाने वाले देश के तीसरे वैज्ञानिक थे।


राव ने भारत की विज्ञान नीति को आकार देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे कई प्रधानमंत्रियों की वैज्ञानिक सलाहकार परिषद से जुड़े रहे। उन्होंने भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) का नेतृत्व किया और बेंगलुरु में Jawaharlal Nehru Centre for Advanced Scientific Research (JNCASR) की स्थापना में अहम भूमिका निभाई।


कर्नाटक में एक करोड़ से ज्यादा बाहर

कर्नाटक में SIR के तहत 24 अगस्त को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची से एक करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जो राज्य के कुल मतदाताओं का करीब 19.4 प्रतिशत है। चुनाव आयोग के अनुसार, करीब 43 लाख लोगों को नोटिस भेजे जाने हैं, जिनके Enumeration Forms में विसंगतियां पाई गई हैं या जिनका पुरानी सूची से मिलान नहीं हो पाया है।


मतदाता 24 अगस्त से 23 सितंबर तक अपने नाम हटाए जाने के खिलाफ दावे और आपत्तियां दाखिल कर सकते हैं। इन पर 22 अक्टूबर तक सुनवाई होगी, जबकि अंतिम मतदाता सूची 27 अक्टूबर को प्रकाशित होने की निर्धारित है।