लोकसभा स्पीकर की चाय पार्टी से कांग्रेस-TMC-SP ने बनाई दूरी, राज्यसभा सभापति की टी-पार्टी का अलग अंदाज
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, कांग्रेस के साथ-साथ समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और INDIA ब्लॉक के कई अन्य दलों के नेताओं ने कार्यक्रम से दूरी बनाए रखी। विपक्षी दलों और सरकार के बीच मॉनसून सत्र के दौरान लगातार गतिरोध देखने को मिला था।
Om Birla : संसद का मॉनसून सत्र खत्म होने के बाद गुरुवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से आयोजित पारंपरिक चाय पार्टी में विपक्षी दलों के बीच दूरी नजर आई। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC) और समाजवादी पार्टी (SP) के नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष की चाय पार्टी का बहिष्कार किया। हालांकि, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) की वरिष्ठ नेता कनिमोझी इस आयोजन में शामिल हुईं।
लोकसभा की कार्यवाही गुरुवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद स्पीकर ओम बिरला ने अपने कक्ष में इस पारंपरिक आयोजन की मेजबानी की। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री एवं नेता भी चाय पार्टी में मौजूद रहे।
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, कांग्रेस के साथ-साथ समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और INDIA ब्लॉक के कई अन्य दलों के नेताओं ने कार्यक्रम से दूरी बनाए रखी। विपक्षी दलों और सरकार के बीच मॉनसून सत्र के दौरान लगातार गतिरोध देखने को मिला था। ऐसे में विपक्षी नेताओं का चाय पार्टी से दूर रहना राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है।
राज्यसभा की चाय पार्टी में पहुंचे विपक्षी नेता
वहीं, राज्यसभा में तस्वीर कुछ अलग रही। राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन की ओर से आयोजित पारंपरिक चाय पार्टी में विपक्ष के कई प्रमुख नेता शामिल हुए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी भी इस आयोजन में मौजूद रहीं।
दरअसल, संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति की ओर से अलग-अलग चाय पार्टी आयोजित करने की परंपरा रही है। इन आयोजनों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच अनौपचारिक मुलाकात का मौका मिलता है।
इस बार लोकसभा की चाय पार्टी में विपक्षी दलों की गैरमौजूदगी ऐसे समय हुई है, जब पूरे मॉनसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखा टकराव देखने को मिला। हालांकि, राज्यसभा की चाय पार्टी में विपक्ष के प्रमुख नेताओं की मौजूदगी ने दोनों सदनों के राजनीतिक माहौल में अंतर को भी सामने रखा।