Nuclear test: खामोशी के पर्दे में परमाणु बम बनाने की साजिश, क्या नमक की गुफाओं में हो रहे हैं गुप्त परमाणु परीक्षण? पढ़िए रहस्यमयी धमाके का हिला देने वाला सच

Nuclear test: वैश्विक कूटनीति के गलियारों में भले ही रेड कार्पेट बिछाए जा रहे हों और मुस्कुराहटों का दौर जारी हो, लेकिन परदे के पीछे एक खौफनाक और खामोश रस्साकशी सिर उठा रही है।

US Alleges China Secret Nuclear Tests

Nuclear test: वैश्विक कूटनीति के गलियारों में भले ही रेड कार्पेट बिछाए जा रहे हों और मुस्कुराहटों का दौर जारी हो, लेकिन परदे के पीछे एक खौफनाक और खामोश रस्साकशी सिर उठा रही है। अमेरिकी प्रशासन ने अब सीधे तौर पर बीजिंग की नीयत पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। क्या ड्रैगन ने कूटनीति की आड़ में मानवता के विध्वंस का कोई नया ताना-बाना बुन लिया है? अमेरिकी खुफिया और सामरिक गलियारों से आ रही खबरें बताती हैं कि चीन नमक की खामोश गुफाओं के भीतर परमाणु बमों के गुप्त परीक्षण की खतरनाक साजिश को अंजाम दे रहा है।

इस रहस्यमयी खेल के केंद्र में डीकपलिंग  नामक एक ऐसी तकनीक है, जो विज्ञान और अपराध के बीच की उस महीन रेखा को धुंधला कर देती है, जहाँ तबाही को छिपाना मुमकिन हो जाता है। पारंपरिक रूप से जब भी कोई परमाणु परीक्षण होता था, तो धरती हिल उठती थी और उससे पैदा होने वाली भारी-भरकम भूकंपीय लहरें दुनिया भर में स्थापित मॉनिटरिंग स्टेशनों के रडार पर आ जाती थीं। लेकिन डीकपलिंग तकनीक ने इस सुरागकशी को ही चुनौती दे दी है। इसके तहत बम को जमीन के अंदर नमक की चट्टानों से बनी किसी विशालकाय और खाली गुफा के ठीक बीचों-बीच रखा जाता है। जब धमाका होता है, तो नमक की ये लचीली और सघन चट्टानें उस भीषण झटके को सोख लेती हैं। परिणाम यह होता है कि सामान्य सुरंग में होने वाले धमाके के मुकाबले यह बेहद मामूली कंपन पैदा करता है, जिसे कोई भी आम इंसान या रूटीन मॉनिटरिंग स्टेशन एक छोटा-सा प्राकृतिक भूकंप या खदान का हल्का विस्फोट समझकर नजरअंदाज कर देता है।

शिनजियांग प्रांत की सूखी हुई नमक की झील पर बनी चीन की लोप नूर परीक्षण साइट इस तकनीक के लिए एकदम सुरक्षित मानी जाती है। अमेरिकी दावों की नींव मुख्य रूप से 22 जून 2020 को कजाकिस्तान स्थित मॉनिटरिंग स्टेशन पर दर्ज किए गए उन दो संदिग्ध झटकों पर टिकी है, जिनकी तीव्रता 12 सेकंड के भीतर 2.75 मापी गई थी। अमेरिकी थिंक-टैंक हडसन इंस्टीट्यूट और फॉरेन पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में लोप नूर के पहाड़ों के नीचे जिस तेजी से नई टनल, सड़कें और स्टोरेज फैसिलिटीज का विस्तार हुआ है तथा टनल से मलबा बाहर निकाला गया है, वह किसी बड़े गुप्त षड्यंत्र की गवाही दे रहा है।

हालाँकि, बीजिंग इन सभी संगीन आरोपों को सिरे से खारिज करता आ रहा है। चीनी विदेश मंत्रालय का कहना है कि अमेरिका के पास इन दावों का कोई पुख्ता सबूत नहीं है और यह केवल वाशिंगटन द्वारा अपने खुद के परमाणु परीक्षणों को दोबारा शुरू करने का एक बहाना भर है। दूसरी ओर, स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट  की रिपोर्ट ने पूरी दुनिया की नींद उड़ा दी है। आज वैश्विक स्तर पर लगभग 12,187 परमाणु हथियार मौजूद हैं, जिनमें से 83 फीसदी से अधिक जखीरा केवल रूस और अमेरिका के पास है। इसके बावजूद, चीन, भारत और उत्तर कोरिया समेत तमाम देश अपने परमाणु हथियारों के आधुनिकीकरण और विस्तार में जुटे हैं।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का यह बयान कि यदि दूसरे देश परीक्षण कर रहे हैं, तो अमेरिका भी हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठा रहेगा, इस बात का स्पष्ट संकेत है कि दुनिया एक बार फिर नई और खतरनाक परमाणु हथियारों की होड़ की दलदल में उतर चुकी है। गुप्त बैठकों और कूटनीतिक वार्ताओं के दौर के बीच, यह सवाल अब भी अनसुलझा है कि क्या मानवता एक और विनाशकारी दिशा में आगे बढ़ रही है।

हीरेश कुमार