Ration Card: राशन कार्ड से काटे गए 30 लाख फर्जी नाम! लाखों रुपए कमाने वाले भी उठा रहे थे लाभ, जानिए कैसे हुआ घोटाले का खुलासा

Ration Card: राशन कार्ड में बड़े होटाला सामने आया है। राशन कार्ड से करीब 30 लाख फर्जी नाम को काटे गए हैं। कथित तौर पर लाखों रुपए कमाने वाले लोग राशन कार्ड से मुफ्त आनाज का लाभ ले रहे थे।

राशन कार्ड
30 लाख फर्जी नाम कटे! - फोटो : social media

Ration Card: राशन कार्ड से फर्जी नामों को हटाने के लिए देश भर में अभियान चलाया जा रहा है। बिहार सहित कई राज्यों में खाद्य आपूर्ति विभाग द्वारा इस कार्य को किया जा रहा है। इसी कड़ी में एक बड़ी जानकारी सामने आई है। जहां राशन कार्ड से 30 लाख लाभर्थियों के नाम काटे गए हैं। कथित तौर पर ये सभी लाखों रुपए कमाने के बावजूद राशन कार्ड से मुफ्त राशन उठा रहे थे। मामला मध्य प्रदेश से जुड़ा है।  

30 लाख लोगों का नाम कटा

जानकारी अनुसार मध्य प्रदेश में गरीबों के लिए जारी मुफ्त राशन योजना का लाभ अमीरों द्वारा उठाया जा रहा था। राज्य सरकार द्वारा कराए गए व्यापक सत्यापन अभियान के बाद करीब 30 लाख फर्जी राशन कार्ड रद्द कर दिए गए हैं। इससे न केवल सरकारी धन की लूट पर रोक लगी है, बल्कि अब वास्तविक जरूरतमंदों को योजना का लाभ मिल सकेगा। सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, गलत तरीके से राशन लेने वालों में करीब 1500 लोग निजी कंपनियों में डायरेक्टर जैसे ऊंचे पदों पर कार्यरत पाए गए।

14 लाख नए योग्य लाभार्थियों को मिलेगा फायदा

वहीं 38 हजार ऐसे लाभार्थी भी चिन्हित किए गए, जो इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते हैं और जिनकी सालाना आय 6 लाख रुपये से अधिक है। खाद्य आपूर्ति विभाग द्वारा लगभग एक साल तक चले सत्यापन अभियान के बाद बड़े पैमाने पर फर्जी राशन कार्ड रद्द किए गए। इसका सीधा लाभ उन 14 लाख योग्य परिवारों को मिलेगा, जो अब तक कोटा पूरा होने के कारण पीडीएस योजना से वंचित थे।

1.31 करोड़ राशन कार्ड, वेटिंग में थे लाखों लोग

अंत्योदय अन्न योजना (AAY) और प्रायोरिटी हाउसहोल्ड (PHH/BPL) के तहत मध्य प्रदेश में वर्तमान में 1.31 करोड़ राशन कार्ड प्रचलन में हैं। कुल 28 श्रेणियों के लाभार्थियों को हर महीने मुफ्त राशन दिया जाता है। खाद्य आपूर्ति विभाग ने बताया कि अयोग्य लोगों की मौजूदगी के कारण कई जरूरतमंद परिवार वेटिंग लिस्ट में थे और उन्हें समय पर राशन नहीं मिल पा रहा था।

ऐसे पकड़े गए फर्जी लाभार्थी

जानकारी अनुसार विभाग ने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के साथ मिलकर पीडीएस डेटाबेस का आईटीआर डेटा से मिलान किया। इसमें 38 हजार ऐसे लोग सामने आए जिन्होंने 6 लाख रुपये से अधिक की आय घोषित की थी, फिर भी मुफ्त राशन ले रहे थे। इसके अलावा रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी (ROC) के डेटा से क्रॉस चेक करने पर 1500 ऐसे लोग मिले जो निजी कंपनियों में डायरेक्टर पद पर होते हुए भी सरकारी राशन का लाभ उठा रहे थे। सरकार का कहना है कि आगे भी ऐसे सत्यापन अभियान जारी रहेंगे, ताकि योजनाओं का लाभ केवल वास्तविक जरूरतमंदों तक ही पहुंचे।