Rebirth: अंतिम संस्कार की तैयारी के बीच जिंदा हुई 103 साल की बुजुर्ग महिला, श्मशान पहुंचने से पहले लौटी सांसें,हैरत में पड़े लोग

Rebirth: 103 वर्षीय बुजुर्ग महिला गंगाबाई साखरे के जीवन में ऐसा क्षण आया, जब उनकी पल्स रिस्पॉन्स , बाहरी बॉडी रिफ्लेक्स लगभग शून्य हो गए। परिवार ने इसे कार्डियो-रेस्पिरेटरी अरेस्ट मान लिया और उन्हें मृत समझकर अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू हो गईं।

103 Year Old Woman Returns from Brink of Death
अंतिम संस्कार की तैयारी के बीच जिंदा हुई 103 साल की बुजुर्ग महिला- फोटो : social Media

Rebirth: 103 वर्षीय बुजुर्ग महिला गंगाबाई साखरे के जीवन में ऐसा क्षण आया, जब उनकी रेस्पिरेटरी मूवमेंट, पल्स रिस्पॉन्स और बाहरी बॉडी रिफ्लेक्स लगभग शून्य हो गए। परिवार ने इसे कार्डियो-रेस्पिरेटरी अरेस्ट मान लिया और उन्हें मृत समझकर अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू हो गईं।महाराष्ट्र के नागपुर ज़िले के रामटेक से सामने आई यह घटना चिकित्सा विज्ञान की भाषा में कहें तो क्लिनिकल डेथ और रिवाइवल के बीच की वह पतली लकीर है, जिसने पूरे गांव को हैरत में डाल दिया। 

सोमवार की शाम गंगाबाई के शरीर में कोई हलचल न होने पर यह मान लिया गया कि उनकी वाइटल साइन समाप्त हो चुकी हैं। रिश्तेदारों को सूचना भेजी गई, शोक का माहौल बन गया। मंगलवार को उन्हें नई साड़ी पहनाई गई, हाथ-पैर बंधे, नाक में कॉटन प्लग रखा गया जो पारंपरिक रूप से मृत्यु की पुष्टि का संकेत माना जाता है। सोशल मीडिया पर उनके निधन की खबर वायरल हो गई और दूर-दराज से लोग अंतिम संस्कार में शामिल होने पहुंचने लगे।

लेकिन मेडिकल इतिहास में कई बार ऐसा होता है, जब डीप सीनकोप, हाइपोथर्मिया या अत्यधिक उम्र में मेटाबॉलिक स्लोडाउन के कारण व्यक्ति में जीवन के संकेत बेहद मंद हो जाते हैं। ठीक ऐसा ही कुछ गंगाबाई के साथ हुआ। मंगलवार शाम पोते राकेश साखरे की नज़र अचानक दादी के पैर की उंगलियों की हल्की हरकत पर पड़ी एक सूक्ष्म लेकिन निर्णायक न्यूरो-मस्क्युलर रिस्पॉन्स।

जैसे ही नाक से रुई हटाई गई, गंगाबाई ने जोर से सांस ली। यह पल किसी इमरजेंसी रिवाइवल से कम नहीं था। जिस घर में मातम पसरा था, वहां चंद सेकंड में खुशी, सुकून और हैरानी ने जगह ले ली। शववाहिनी लौटा दी गई, शोक मंडप हट गया।

सबसे हैरतअंगेज़ संयोग यह रहा कि उसी दिन गंगाबाई का 103वां जन्मदिन भी था। मौत के मुहाने से लौटकर आईं दादी के लिए केक काटा गया, परिवार ने जश्न मनाया। सोशल मीडिया पर इसे लोगों ने “रीबर्थ ऑन बर्थडे” और “लाइफ गिवन ट्वाइस” कहा।

रामटेक की यह घटना न सिर्फ भावनात्मक है, बल्कि यह भी याद दिलाती है कि चिकित्सा में मृत्यु की पुष्टि बेहद संवेदनशील प्रक्रिया है। 103 साल की गंगाबाई आज रामटेक में एक जीवित मेडिकल चमत्कार बन चुकी हैं जहां जिंदगी ने मौत को आखिरी पल में मात दे दी।