सबसे बड़ा राजनीतिक उलटफेर, BJP और कांग्रेस ने मिलाया हाथ, दोनों की चलेगी साझा 'सरकार'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विपक्ष के नेता राहुल गांधी अक्सर आरोप-प्रत्यारोप लगाते रहते हैं, वहीं अब सत्ता की चाहत में दोनों दलों ने एक अजीब गठबंधन किया है.
BJP-Congress : चौंकाने वाले राजनीतिक घटनाक्रम में भाजपा और कांग्रेस के एक दूसरे से हाथ मिलाने का मामला सामने आया है। एक दूसरे दल के खिलाफ जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विपक्ष के नेता राहुल गांधी अक्सर आरोप-प्रत्यारोप लगाते रहते हैं, वहीं अब सत्ता की चाहत में दोनों दलों ने एक ऐसा गठबंधन किया है जिसे उनके प्रतिद्वंद्वी दलों की ओर से अपवित्र और मौकापरस्त गठजोड़ बताया जा रहा है। वहीं दोनों दलों के साथ आने के इस मामले ने सियासी शुचिता की बात करने वाले दोनों दलों के सिद्धांत पर सवाल खड़ा किया है।
दरअसल, यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति में कट्टर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस ने अजित पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के साथ मिलकर ठाणे जिले की अंबरनाथ म्युनिसिपल काउंसिल (AMC) पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। इस गठबंधन के चलते एकनाथ शिंदे की शिवसेना को सत्ता से बाहर होना पड़ा है। अंबरनाथ, मुंबई का एक अहम उपनगरीय क्षेत्र है और यह डिप्टी मुख्यमंत्री के पुत्र और शिवसेना के प्रमुख नेता डॉ. श्रीकांत शिंदे की कल्याण लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है। ऐसे में इस घटनाक्रम को शिंदे पिता-पुत्र दोनों के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है, क्योंकि ठाणे जिला लंबे समय से उनके प्रभाव क्षेत्र में रहा है।
सबसे बड़ी पार्टी को हटाया
59 वार्डों वाली अंबरनाथ म्युनिसिपल काउंसिल में शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और उसे 23 सीटें मिली थीं। BJP को 16, कांग्रेस को 12 और अजित पवार गुट की NCP को चार सीटें मिली थीं। BJP की तेजश्री करंजुले प्रत्यक्ष चुनाव के जरिए परिषद अध्यक्ष चुनी गई थीं। चुनाव के बाद बने नए समीकरण में BJP (16), कांग्रेस (12) और NCP (4) मिलकर 32 सीटों के साथ बहुमत में पहुंच गईं, जबकि शिवसेना 23 सीटों पर सिमट गई।
‘अंबरनाथ सिटी डेवलपमेंट फ्रंट’
हालांकि चुनाव BJP और शिवसेना ने अलग-अलग लड़ा था, लेकिन उम्मीद जताई जा रही थी कि नतीजों के बाद दोनों दल मिलकर परिषद पर नियंत्रण बनाएंगे। इसके उलट BJP की स्थानीय इकाई ने कांग्रेस और NCP के साथ मिलकर ‘अंबरनाथ सिटी डेवलपमेंट फ्रंट’ के नाम से नया गठबंधन कर लिया। इस गठबंधन में रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) भी शामिल है। तेजश्री करंजुले ने कहा कि विचारधारात्मक मतभेदों को एक तरफ रखकर शहर के समग्र विकास के लिए यह गठबंधन बनाया गया है। वहीं, शिवसेना विधायक बालाजी किनिकर ने इसे “अपवित्र और मौकापरस्त गठबंधन” करार दिया।
शिवसेना का 35 वर्षों से कब्जा
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. श्रीकांत शिंदे ने कहा कि जिन दलों के खिलाफ चुनाव लड़ा गया, उनके साथ सत्ता के लिए हाथ मिलाना सही नहीं है। आम आदमी पार्टी की मुंबई अध्यक्ष प्रीति शर्मा मेनन ने भी इस गठबंधन पर तंज कसते हुए कहा कि महाराष्ट्र के निकाय चुनाव राजनीति में बढ़ती मौकापरस्ती का उदाहरण बनते जा रहे हैं। गौरतलब है कि अविभाजित शिवसेना पिछले करीब 35 वर्षों से अंबरनाथ नगर परिषद पर काबिज रही है। ऐसे में यह बदलाव ठाणे जिले की स्थानीय राजनीति में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है।