शोहरत की चकाचौंध में छुपी दरिंदगी का पर्दाफाश, धुरंधर का एक्टर नदीम खान कटघरे में, दस साल की हवस, झूठे निकाह के वादे और मालवानी थाने तक पहुँची चीख

एक्टर नदीम खान पर आरोप संगीन हैं करीब दस साल तक एक घरेलू कामकाजी महिला का बलात्कार, लगातार यौन शोषण और निकाह का झांसा देकर उसकी ज़िंदगी को जहन्नुम बनाने का। मालवानी पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत ने इस सनसनीख़ेज़ क़िस्से को बेनक़ाब कर दिया है।

Mumbai Actor Nadeem Khan Arrested 10 Years of Abuse False Ma
धुरंधर के एक्टर नदीम खान की चकाचौंध में छुपी दरिंदगी का पर्दाफाश- फोटो : X

Crime News: मुंबई की मायानगरी में एक बार फिर ग्लैमर की दुनिया पर जुर्म और ज़ुल्म का साया गहरा गया है। सिल्वर स्क्रीन पर पहचाना जाने वाला एक्टर नदीम खान अब पुलिस की गिरफ़्त में है। आरोप संगीन हैं करीब दस साल तक एक घरेलू कामकाजी महिला का बलात्कार, लगातार यौन शोषण और निकाह का झांसा देकर उसकी ज़िंदगी को जहन्नुम बनाने का। मालवानी पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत ने इस सनसनीख़ेज़ क़िस्से को बेनक़ाब कर दिया है।

पीड़िता के मुताबिक़, नदीम खान ने भरोसे और मजबूरी का फ़ायदा उठाते हुए बार-बार उसकी अस्मत को तार-तार किया। वह हर बार शादी के झूठे वादों की चाशनी में लिपटे अल्फ़ाज़ से उसे चुप कराता रहा। डर, बदनामी और रोज़ी-रोटी के ख़ौफ़ ने पीड़िता को बरसों तक ख़ामोश रहने पर मजबूर किया। लेकिन जब वादों का नक़ाब उतरा, शादी से साफ़ इनकार हुआ और मानसिक यातना हदें पार करने लगी, तब पीड़िता ने इंसाफ़ का दरवाज़ा खटखटाया।

मालवानी पुलिस ने एक्टर नदीम खान को गिरफ़्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि पीड़िता के बयान के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और तफ़्तीश जारी है। यह भी खंगाला जा रहा है कि क्या इससे पहले भी एक्टर पर इस तरह के इल्ज़ाम लगे हैं या नहीं। अफ़सरों के मुताबिक़, जांच अभी शुरुआती दौर में है और पूछताछ के दौरान सामने आने वाले सबूतों के आधार पर आगे की क़ानूनी कार्रवाई तय होगी।

नदीम खान वही चेहरा हैं जिन्हें हाल ही में आदित्य धर की फिल्म धुरंधर में अख़लाक के किरदार में देखा गया था। भले ही किरदार छोटा था, लेकिन परफॉर्मेंस ने उन्हें पहचान दिलाई। पर अब वही पहचान सियाह साए में बदलती दिख रही है। पर्दे पर जिन उंगलियों को कटते दिखाया गया, असल ज़िंदगी में उन्हीं हाथों पर दरिंदगी के इल्ज़ाम हैं।

यह मामला सिर्फ़ एक एक्टर की गिरफ़्तारी नहीं, बल्कि उस काली सच्चाई की तस्वीर है जहां ताक़तवर नाम, शोहरत और रसूख़ के पीछे जुर्म छुपा रहता है। अब सवाल ये है क्या क़ानून की पकड़ इस दरिंदगी को अंजाम तक पहुंचाएगी या फिर कोई और राज़ परदे के पीछे दफ़न हो जाएगा? मुंबई पुलिस की तफ़्तीश पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं।