18 दिन में 84 जगह धंसा सबसे महंगा एक्सप्रेस-वे, 75 करोड़ रुपये प्रति किमी खर्च के बावजूद गुणवत्ता पर सवाल

Lucknow Kanpur Expressway में 18 दिन में 84 जगह मरम्मत करनी पड़ी है, मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एक्सप्रेस-वे की कानपुर लेन पर 39 और लखनऊ लेन पर 45 स्थानों पर पैचवर्क किया जा चुका है।

Lucknow Kanpur Expressway News
Lucknow Kanpur Expressway News- फोटो : news4nation

उत्तर प्रदेश का सबसे महंगा और अत्याधुनिक बताया गया लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे उद्घाटन के महज 18 दिनों के भीतर ही गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। करीब 4,700 करोड़ रुपये की लागत से बने 63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे पर 84 स्थानों पर सड़क धंसने और मरम्मत की नौबत आने के बाद निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण पर प्रति किलोमीटर करीब 75 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जो राज्य के किसी भी अन्य एक्सप्रेस-वे की तुलना में सबसे अधिक है।


इसमें 18 दिन में 84 जगह मरम्मत करनी पड़ी है, मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एक्सप्रेस-वे की कानपुर लेन पर 39 और लखनऊ लेन पर 45 स्थानों पर पैचवर्क किया जा चुका है। कई जगह सड़क धंसने के बाद दोबारा निर्माण कराया गया, लेकिन हालिया बारिश के बाद कुछ हिस्सों में फिर दरारें और गड्ढे दिखाई देने लगे।


बारिश में फिर उखड़ी सड़क

लखनऊ से उन्नाव की ओर इजरायल खेड़ा के पास करीब 200 मीटर क्षेत्र में मरम्मत कार्य चल रहा था, लेकिन बारिश के बाद वहीं दोबारा सड़क क्षतिग्रस्त हो गई। कई स्थानों पर सड़क की ऊपरी परत उखाड़कर दोबारा डामर और गिट्टी बिछानी पड़ी। कुछ निर्माणकर्मियों ने भी नाम न छापने की शर्त पर स्वीकार किया कि सड़क अपेक्षित मजबूती नहीं दिखा रही है।


ट्रक धंसा, सड़क में आई दरार

रिपोर्ट के मुताबिक, 30 जुलाई को गिट्टी से लदा एक ट्रक सड़क धंसने के कारण फंस गया और उसे निकालने के दौरान पलट गया। ट्रक मालिक ने करीब 1.5 लाख रुपये के नुकसान का दावा किया। एक अन्य स्थान पर एनएचएआई ने लगभग 1,000 वर्गफीट सड़क को दोबारा बनाया, लेकिन 12 घंटे के भीतर ही उसी हिस्से में फिर दरारें दिखाई देने लगीं।


NHAI की सख्त कार्रवाई

लगातार सामने आ रही खामियों के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने निर्माण करने वाली PNC इंफ्राटेक लिमिटेड को नॉन-परफॉर्मर घोषित कर दिया है। कंपनी के तीन अधिकारियों को परियोजना से हटाने के साथ उन्हें अगले दो वर्षों के लिए प्रतिबंधित भी किया गया है। मामले की तकनीकी जांच अब आईआईटी खड़गपुर की विशेषज्ञ टीम करेगी।


निर्माण कंपनी पहले भी विवादों में

इस एक्सप्रेस-वे का निर्माण PNC इंफ्राटेक लिमिटेड ने किया है। रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी के मालिक भाजपा के राज्यसभा सांसद नवीन जैन के भाई प्रदीप जैन हैं। वर्ष 2024 में कंपनी और उसकी दो सहयोगी कंपनियों पर कथित रिश्वतखोरी से जुड़े सीबीआई मामले के कारण नए टेंडर में भाग लेने पर प्रतिबंध लगाया गया था, हालांकि बाद में यह प्रतिबंध हटा लिया गया।


सबसे महंगा एक्सप्रेस-वे, टोल भी सबसे ज्यादा

63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण पर 4,700 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, यानी प्रति किलोमीटर करीब 75 करोड़ रुपये। तुलना करें तो 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेस-वे पर प्रति किलोमीटर करीब 61 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। इसके साथ ही इस मार्ग का टोल भी काफी अधिक है। पहले हाईवे पर जहां एक तरफ का टोल 95 रुपये था, वहीं अब एक्सप्रेस-वे पर एक तरफ के लिए 275 रुपये और दोनों तरफ के लिए 415 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं।


गडकरी के दावे पर उठे सवाल

13 जुलाई 2026 को एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन के दौरान केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि "उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय राजमार्ग अमेरिका जैसे होंगे।" लेकिन उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सड़क के कई हिस्सों में आई तकनीकी खामियों ने इस दावे पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब आईआईटी खड़गपुर की जांच रिपोर्ट पर सबकी नजरें टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि सड़क में आई खामियों की वास्तविक वजह क्या है।