विधानसभा चुनाव के पहले नीतीश कुमार के रास्ते पर योगी आदित्यनाथ, यूपी में लागू होगा बिहार वाला फॉर्मूला

उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा के चुनाव है। भाजपा सरकार विधानसभा चुनावों से पहले महिलाओं के वोट बैंक को पक्का करने के लिए एक बड़ी योजना लागू कर सकती है। यह उसी तरह का होगा जैसे बिहार में नीतीश कुमार ने किया था.

Yogi Adityanath/ Nitish Kumar
Yogi Adityanath/ Nitish Kumar- फोटो : news4nation

Yogi Adityanath : बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के पहले राज्य की महिलाओं के लिए खजाना खोल दिया है. इसका बड़ा फायदा बिहार विधानसभा चुनाव में जदयू सहित पूरे एनडीए को हुआ. अब बिहार की तरह ही उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के पहले सीएम योगी आदित्यनाथ भी नीतीश कुमार के रास्ते पर चलते दिख रहे हैं. यूपी में भी बिहार वाला फॉर्मूला लागू करके चुनाव में बड़ा फायदा लेने की दिशा में योगी सरकार बढ़ते दिख रही है. 


दरअसल, उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा के चुनाव है। भाजपा सरकार विधानसभा चुनावों से पहले महिलाओं के वोट बैंक को पक्का करने के लिए एक बड़ी योजना लागू कर सकती है। इसके तहत महिलाओं को 50-50,000 की आर्थिक मदद दी जाएगी। चुनाव से पहले 20,000 की पहली किस्त दी जाएगी। चुनाव के बाद, अगर BJP की सरकार बनती है, तो 10-10,000 की 3 किस्तें दी जाएंगी। सरकार में इस योजना पर बातचीत शुरू हो गई है।


योगी सरकार ने विधानसभा चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है। 'जेन-ज़ी' (Gen-Z) मूवमेंट के बीच, सरकार महिलाओं के वोट बैंक को सुरक्षित करने के लिए एक बड़ी योजना पर विचार कर रही है। महिलाओं की मदद, स्वरोज़गार और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए एक योजना पर विचार किया जा रहा है। जो योजना तैयार की जा रही है, उसमें सीधी मदद के साथ-साथ स्वरोज़गार और आर्थिक आज़ादी के लिए भी सहयोग शामिल है, और उम्मीद है कि इसे महिला कल्याण विभाग के ज़रिए लागू किया जाएगा।


रिपोर्ट्स में उत्तर प्रदेश की प्रस्तावित योजना की तुलना दूसरे राज्यों में लागू महिलाओं पर केंद्रित आर्थिक सहायता योजनाओं से की गई है। बिहार, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र ने चुनाव के समय महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता योजनाएं शुरू की थीं। UP के प्रस्तावित प्रस्ताव पर भी इसी तरह चर्चा हो रही है। हालांकि, उत्तर प्रदेश के लिए योजना का सटीक स्वरूप, पात्रता के नियम, भुगतान का शेड्यूल और इसे लागू करने का तरीका क्या होगा, इस पर अभी सरकार का आधिकारिक फैसला आना बाकी है।


इसको लेकर सियासत तेज हो गई है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा कि भाजपा के पास चुनाव जीतने के लिए पैसे के सिवा कुछ नहीं बचा है। वो भी भाजपा की पाप की कमाई है, जिसे उप्र की धार्मिक महिलाएँ कभी नहीं लेंगी। उप्र की जागरूक महिलाएं पूछ रही हैं जिन दूसरे राज्यों में महिलाओं को पैसे देने की घोषणा करके चुनाव जीता था, वहाँ एक तरफ़ तो देने से आनाकानी कर रहे हैं, दूसरी तरफ़ पैसे वापस माँग रहे हैं, और जो लौटा नहीं पा रही हैं, उन महिलाओं पर भाजपा थाने-कचहरी, पुलिस-मुक़दमे की निंदनीय कार्रवाई कर रही है। 


उन्होंने कहा कि देखा जाए तो आज जिस 50000 रुपये सालाना पैसे देने की बात भाजपा सरकार कर रही है वो पैसे पिछले 10 साल में भी दे सकती थी, पर दिया नहीं। मुख्यमंत्री जी ने उप्र की महिलाओं के हक़-अधिकार के हजारों करोड़ रुपये अपने प्रचार पर ख़र्च करके सबको ठेंगा दिखा दिया। 50 हज़ार रुपये हर साल के हिसाब से भाजपा की भ्रष्ट सरकार पिछले 10 साल में महिलाओं के हिस्से का 5 लाख रुपया खा गई और अब केवल 20 हज़ार देने का जुमला परोस रही है। 20 हज़ार रुपया तो 5 लाख रुपये का केवल 4% हुआ, इसका मतलब ये भाजपाई महिलाओं के हक़ का 96% डकार गये। 80:20 की बात करनेवालों ने तो 96:4 करके भ्रष्टाचार का सुपर रिकॉर्ड बना दिया।