Bharat Tiwari Encounter: पांच गोलियों का राज! पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद पुलिस की कहानी पर उठे सवाल, कहां हैं SHO मालाकार? अब SP-SDM के खिलाफ हत्या की FIR कराएगा भरत का परिवार, आखिर किसे मिल रही है वर्दी की ढाल ? इनसाइड स्टोरी

Bharat Tiwari Encounter:बिहार के सबसे चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में अब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने विवाद को और गहरा कर दिया है। रिपोर्ट में पांच गोलियां लगने की पुष्टि के बाद पुलिस के आधिकारिक घटनाक्रम पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।...

Bharat Tiwari Encounter Under Fresh Scrutiny Five Bullets Bi
भरत तिवारी केस में आखिर किसे मिल रही है वर्दी की ढाल ? - फोटो : reporter

Bharat Tiwari Encounter:  बिहार के सबसे चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर कांड में हर गुजरते दिन के साथ नए सवाल खड़े हो रहे हैं। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने उस बहस को और तेज कर दिया है, जो एनकाउंटर वाले दिन से ही सुलग रही थी। रिपोर्ट के मुताबिक भरत तिवारी के शरीर में कुल पांच गोलियां लगी थीं। यही खुलासा अब पुलिस के शुरुआती दावों को कठघरे में खड़ा कर रहा है। पुलिस पहले हीं दिन से  दो से तीन गोलियां लगने की बात कह रही है, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पूरी दास्तान ही बदल दी।

मामले को दस दिन बीत चुके हैं। सातवें दिन भोजपुर पुलिस ने तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश मालाकार, तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा समेत अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज कर ली, लेकिन एफआईआर दर्ज होने के चार दिन बाद भी गिरफ्तारी नहीं हुई। यही वह नुक्ता है, जिस पर सियासत, कानून और इंसाफ की पूरी बहस टिक गई है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर किसी आम नागरिक के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज होता, तो क्या पुलिस आरोपी को गिरफ्तार नहीं करती? क्या तब भी कहा जाता कि आरोपी मुख्यालय में हाजिरी लगा रहा है, इसलिए गिरफ्तारी की जरूरत नहीं? यही सवाल अब सड़क से लेकर सियासी गलियारों तक गूंज रहा है।फिलहाल राजेश मालाकार आरा पुलिस मुख्यालय से अटैच हैं और रोजाना हाजिरी लगा रहे हैं। वहीं दूसरे नामजद अधिकारी राजेश कुमार शर्मा को पटना पुलिस मुख्यालय से अटैच किया गया है। दोनों निलंबित हैं, लेकिन गिरफ्तारी नहीं हुई। पुलिस का कहना है कि दोनों फरार नहीं हैं, जांच में सहयोग कर रहे हैं और न्यायिक जांच भी शुरू हो चुकी है। इसलिए गिरफ्तारी आवश्यक नहीं समझी गई।

कानूनी जानकारों का कहना है कि केवल एफआईआर दर्ज होने भर से गिरफ्तारी अनिवार्य नहीं हो जाती। यदि आरोपी के फरार होने, साक्ष्य मिटाने, गवाहों को प्रभावित करने या अपराध दोहराने की आशंका न हो, तो जांच एजेंसी गिरफ्तारी के बजाय पूछताछ और अन्य कानूनी प्रक्रिया अपना सकती है। यही दलील फिलहाल इस मामले में भी दी जा रही है।

लेकिन दूसरी तरफ भरत तिवारी का परिवार इस पूरी कार्रवाई को सवालों के घेरे में बता रहा है। भरत की भाभी सुमन तिवारी का आरोप है कि उनके देवर के खिलाफ साजिश रची गई और सुनियोजित तरीके से हत्या कराई गई। उन्होंने कहा कि अब भोजपुर एसपी और एसडीएम समेत संबंधित अधिकारियों के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा। परिवार की मांग है कि जांच किसी रिटायर्ड जज नहीं, बल्कि हाईकोर्ट के सीटिंग जज की निगरानी में हो, ताकि हर पहलू से निष्पक्ष पड़ताल हो सके।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने विवाद को और हवा दे दी है। रिपोर्ट के अनुसार भरत तिवारी को पांच गोलियां लगीं दो गोलियां बाईं जांघ में, दो दाहिनी जांघ में और एक गोली बाएं पैर के पिछले हिस्से में मिली। परिजनों का दावा है कि अस्पताल में मौजूद चिकित्सक ने भी चार से पांच गोलियों की बात कही थी, जबकि पुलिस की शुरुआती जानकारी इससे मेल नहीं खाती थी।भरत के भाई चंदन तिवारी का कहना है कि परिवार शुरू से पांच गोलियां चलने की बात कह रहा था और अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने उसी दावे को मजबूती दी है। उनका आरोप है कि सच्चाई को दबाने की कोशिश हुई, लेकिन मेडिकल रिपोर्ट सामने आने के बाद कई सवालों के जवाब अब खुद दस्तावेज मांग रहे हैं।

उधर, सदर अस्पताल के तत्कालीन ड्यूटी डॉक्टर के कथित बयान में भी चार से पांच गोली लगने की बात सामने आई थी। डॉक्टर के अनुसार भरत की हालत अत्यंत गंभीर थी। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें पीएमसीएच रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

अब पूरा मामला न्यायिक आयोग के समक्ष है, जिसकी अध्यक्षता पटना हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश कर रहे हैं। ऐसे में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।लेकिन इतना जरूर है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस एनकाउंटर की फाइल में कई नए सवाल जोड़ दिए हैं। पांच गोलियों का सच, शुरुआती बयानों का फर्क, एफआईआर के बावजूद गिरफ्तारी न होना और परिवार के गंभीर आरोप ये सभी बिंदु अब जांच एजेंसियों की साख और न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता की अग्निपरीक्षा बन चुके हैं। अब निगाहें इस बात पर हैं कि जांच इन सवालों का जवाब देती है या यह मामला भी लंबे समय तक सिर्फ बहस, बयानबाजी और सियासी तकरार का हिस्सा बनकर रह जाता है। फिलहाल भरत तिवारी का परिवार एसपी और एस़ीएम पर मुकद्दमा करने की तैयारी में है।