Bharat Tiwari Encounter: "हथियार डालने के बाद पुलिस ने ले जाकर मारी गोली", न्यायिक आयोग के सामने प्रत्यक्षदर्शी का बड़ा दावा
भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी कथित एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच में नया मोड़ आ गया है। रिटायर्ड जज विनोद कुमार सिन्हा के आयोग के समक्ष भाई चंदन तिवारी और प्रत्यक्षदर्शी ललिता देवी ने सरेंडर के बाद गोली मारने के गंभीर दावे किए हैं।
भोजपुर के बहुचर्चित भरत तिवारी कथित एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच मंगलवार को एक बेहद अहम चरण में पहुंच गई है। सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता वाले न्यायिक जांच आयोग के समक्ष जांच के तीसरे दिन मृतक के भाई चंदन तिवारी और घटना की कथित प्रत्यक्षदर्शी ललिता देवी ने अपने-अपने बयान दर्ज कराए। आयोग द्वारा दोनों गवाहों से की गई इस विस्तृत पूछताछ के बाद माना जा रहा है कि इस कथित एनकाउंटर केस की जांच को अब एक नई दिशा मिल सकती है।
सरेंडर के बाद गोली मारने का दावा, भाई ने की गिरफ्तारी की मांग
गवाही के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए चंदन तिवारी ने बताया कि उन्होंने आयोग के सामने पूरी घटना का क्रमवार ब्योरा रखा है। चंदन के अनुसार, आयोग ने उनसे पूछा कि यदि भरत तिवारी ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण (सरेंडर) कर दिया था, तो फिर उन पर गोली क्यों चलाई गई? इस पर चंदन ने दावा किया कि भरत ने अपने हथियार डाल दिए थे, लेकिन इसके बावजूद पुलिस उन्हें करीब 20 मीटर आगे ले गई और गोली मार दी। लगभग आधे घंटे तक चली पूछताछ के बाद चंदन ने दोषी पुलिसकर्मियों की तत्काल गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि जब तक गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक परिवार को संतोष नहीं मिलेगा।
प्रत्यक्षदर्शी का बड़ा बयान: हथियार डलवाकर पुलिस ने मारी गोली
दूसरी ओर, जवैनिया गांव की निवासी और खुद को घटना की प्रत्यक्षदर्शी बताने वाली ललिता देवी ने भी आयोग के सामने अपनी आंखों देखी गवाही दर्ज कराई। उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने पहले भरत तिवारी से हथियार डालने को कहा था और उनकी मांगें पूरी करने का भरोसा दिया था। लेकिन जैसे ही भरत ने हथियार रखे, पुलिस उन्हें कुछ दूरी पर ले गई और गोली मार दी। ललिता देवी ने एक भावुक दावा करते हुए यह भी कहा कि गोली लगने के बाद भरत तिवारी के मुख से "जय हिंद" निकला था, जिसके बाद पुलिस उन्हें अपने वाहन में डालकर ले गई।
गांव में भरत की छवि और न्याय की उम्मीद
प्रत्यक्षदर्शी ललिता देवी ने आयोग के समक्ष भरत तिवारी की सामाजिक छवि का जिक्र करते हुए उन्हें गरीबों और जरूरतमंदों का मददगार बताया। उन्होंने कहा कि गांव में बिजली लाने, चापाकल लगवाने और अन्य जनसुविधाएं उपलब्ध कराने में भरत का महत्वपूर्ण योगदान था। हालांकि, आयोग ने कार्रवाई के लिए कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की है, लेकिन गवाहों को न्याय मिलने की पूरी उम्मीद है। वहीं, भाई चंदन तिवारी ने कहा कि उन्हें बिहार सरकार पर तो भरोसा नहीं है, लेकिन भारत सरकार से वे अब भी न्याय की आस लगाए बैठे हैं।
अब तक 7 लोगों की गवाही पूरी, 25 बयानों पर टिकी नजरें
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए गवाहियों का दौर तेजी से चल रहा है। इससे पहले 11 जुलाई को भरत तिवारी के माता-पिता आशा देवी और काशीनाथ तिवारी, तथा 13 जुलाई को उनकी भाभी सुमन देवी, सत्यनारायण चौधरी और मंटू कमकर ने अपने बयान दर्ज कराए थे। अब तक कुल सात लोगों की गवाही पूरी हो चुकी है, जबकि मामले में कुल 25 लोगों के बयान दर्ज किए जाने बाकी हैं। आने वाले दिनों में होने वाली अन्य गवाहियों और आयोग के अंतिम निष्कर्ष पर अब सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
रिपोर्ट - आशीष श्रीवास्तव