Bhojpur Encounter Case:भोजपुर एनकाउंटर केस में नया तूफान, भरत तिवारी के पिता-भाई पर FIR, सियासी घमासान तेज
Bhojpur Encounter Case:भोजपुर एनकाउंटर मामले में अब तक कुल तीन एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें सबसे चर्चित प्राथमिकी वह है जिसमें मृतक भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को भी आरोपी बनाया गया है।
Bhojpur Encounter Case:बिहार के भोजपुर जिले में कथित पुलिस एनकाउंटर में भरत तिवारी की मौत का मामला अब एक साधारण आपराधिक घटना से आगे बढ़कर गहरे राजनीतिक और सामाजिक विवाद का रूप ले चुका है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे और प्राथमिकी सामने आ रहे हैं, जिससे पूरा प्रकरण और अधिक संवेदनशील होता जा रहा है।
ताजा जानकारी के अनुसार, इस मामले में अब तक कुल तीन एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें सबसे चर्चित प्राथमिकी वह है जिसमें मृतक भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को भी आरोपी बनाया गया है। यह एफआईआर 17 जून को शाहपुर थाना में तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार द्वारा दर्ज की गई थी, जिन्हें बाद में इस मामले में सस्पेंड भी कर दिया गया है।पुलिस का आरोप है कि परिजनों ने कथित रूप से भरत तिवारी को संरक्षण दिया और उसके पास मौजूद अवैध हथियारों को छिपाने में सहयोग किया। पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान मिले तथ्यों के आधार पर दोनों पर कार्रवाई की गई है। हालांकि, परिवार की ओर से इस आरोप पर अभी तक कोई विस्तृत और आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
एक अन्य एफआईआर उस घटना से जुड़ी है जिसमें एनकाउंटर के बाद इलाके में भारी हंगामा और सड़क जाम किया गया था। इस मामले में 14 नामजद और 50 से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था को बाधित करने और भीड़ को उकसाने के आरोप में यह कार्रवाई की गई है।पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, 17 जून की सुबह लगभग पांच बजे पुलिस टीम बेलौटी गांव पहुंची थी। सूचना मिली थी कि भरत तिवारी के पास अवैध हथियार मौजूद हैं। पुलिस ने घर की घेराबंदी कर दरवाजा खुलवाया। आरोप है कि दरवाजा खुलते ही भरत तिवारी ने पुलिस टीम पर कथित रूप से फायरिंग कर दी, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में वह घायल हो गया और बाद में उसकी मौत हो गई।
हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर अलग-अलग पक्षों के दावे सामने आ रहे हैं, जिससे मामला और उलझता जा रहा है। एक तरफ पुलिस इसे वैध कार्रवाई बता रही है, वहीं दूसरी ओर मृतक के परिजन, स्थानीय लोग और कई राजनीतिक दल इस एनकाउंटर की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं।
मामले में नया मोड़ तब आया जब मृतक के पिता और भाई को भी आरोपी बना दिया गया, जिससे राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस और तेज हो गई है। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे दबाव की राजनीति करार दिया है। फिलहाल पूरा भोजपुर जिला इस प्रकरण पर नजर बनाए हुए है। पुलिस जांच, फॉरेंसिक रिपोर्ट और पोस्टमार्टम निष्कर्षों के बाद ही इस विवादित एनकाउंटर की वास्तविक तस्वीर साफ हो सकेगी। लेकिन अभी के हालात में यह मामला कानून-व्यवस्था, पुलिस कार्रवाई और राजनीतिक टकराव का केंद्र बन चुका है।