Shahpur Encounter: एनकाउंटर के बाद दो तस्वीरें आमने-सामने, पुलिस के आरोप बनाम गांव वालों का मसीहा भरत, पढ़िए इनसाइड स्टोरी

Shahpur Encounter: एक ओर पुलिस अपनी कार्रवाई को कानूनसम्मत बता रही है, तो दूसरी ओर परिवार और स्थानीय लोगों के बीच गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है।

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भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर के बाद दो तस्वीरें आमने-सामने- फोटो : social Media

Shahpur Encounter: भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए भरत भूषण तिवारी की मौत अब केवल एक एनकाउंटर का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह सामाजिक, कानूनी और प्रशासनिक बहस का विषय बनता जा रहा है। एक ओर पुलिस अपनी कार्रवाई को कानूनसम्मत बता रही है, तो दूसरी ओर परिवार और स्थानीय लोगों के बीच गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह एनकाउंटर सही था या गलत? इसका जवाब अब निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।

भरत भूषण तिवारी को लेकर जो तस्वीर गांव और आसपास के कटाव प्रभावित इलाकों से सामने आ रही है, वह काफी अलग है। जवइनिया कटाव पीड़ित परिवारों, खासकर महिलाओं के बीच भरत की पहचान एक ऐसे व्यक्ति की थी, जो उनकी आवाज बनकर प्रशासन तक उनकी समस्याएं पहुंचाता था। कई महिलाओं ने मीडिया से बातचीत में कहा कि भरत उनके लिए किसी भगवान से कम नहीं था। उनका दावा है कि वह रोज उनके बीच पहुंचता था, समस्याएं सुनता था और उनका वीडियो बनाकर संबंधित अधिकारियों को भेजता था।

महिलाओं का कहना है कि बिजली, पानी, आवास और बच्चों की पढ़ाई जैसे मुद्दों को लेकर भरत लगातार संघर्ष करता था। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ वीडियो में भी महिलाएं उसकी तारीफ करते हुए दिखाई दे रही हैं। कुछ महिलाओं ने यह दावा भी किया कि भरत ने अपनी सुरक्षा के लिए महावीरी लॉकेट बेचकर हथियार खरीदा था। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

भरत भूषण तिवारी की पहचान केवल स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में ही नहीं थी, बल्कि वह सोशल मीडिया पर भी काफी सक्रिय माना जाता था। बताया जाता है कि वह प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस की कार्यप्रणाली पर खुलकर सवाल उठाता था। यही वजह है कि उसकी गतिविधियां अक्सर चर्चा में रहती थीं।

उसके सामाजिक सरोकारों की एक और मिसाल वर्ष 2020 के कोरोना काल से जुड़ी बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार उसने कोरोना वैक्सीन परीक्षण के लिए अपना शरीर दान करने की इच्छा जताते हुए प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था। पत्र में उसने महामारी से लड़ाई को मानवता का सबसे बड़ा संघर्ष बताते हुए खुद को वैक्सीन ट्रायल के लिए उपलब्ध कराने की बात कही थी।फिलहाल भरत भूषण तिवारी की मौत को लेकर कई सवाल हवा में तैर रहे हैं। पुलिसिया कार्रवाई की वैधता, मुठभेड़ की परिस्थितियां और स्थानीय लोगों के आरोप अब जांच एजेंसियों की पड़ताल का विषय हैं। जब तक आधिकारिक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस मामले में किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना तय है कि बिलौटी गांव और कटाव पीड़ितों के बीच भरत भूषण तिवारी की मौत ने भावनात्मक और सामाजिक स्तर पर गहरी हलचल पैदा कर दी है।