Bihar Health: आरा सदर अस्पताल में इंसानियत इमरजेंसी में, जख्मी मासूम गेट पर तड़पता रहा,दलाल बोले- प्राइवेट में ले जाओ

Bihar Health:आरा सदर अस्पताल एक बार फिर अपने कारनामों को लेकर सुर्खियों में है।....आखिर सरकारी अस्पतालों में इलाज का हक किसे मिलता है मरीज को या दलालों को?....

आरा सदर अस्पताल
आरा सदर अस्पताल में इंसानियत इमरजेंसी में- फोटो : reporter

Bhojpur:  जिले का आरा सदर अस्पताल एक बार फिर अपने कारनामों को लेकर सुर्खियों में है। सड़क हादसे में घायल एक मासूम बच्चे को इलाज देने के बजाय अस्पताल की इमरजेंसी के गेट पर ही लिटा दिया गया, जहां वह दर्द से कराहता रहा और सिस्टम की बेरुखी पर सवाल खड़े होते रहे।

बताया जा रहा है कि बड़हरा थाना क्षेत्र के बड़हरा गांव निवासी अंकुश कुमार, पिता सोहराय महतो, अपने गांव के स्कूल जा रहा था। तभी रास्ते में तेज रफ्तार बाइक सवार ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया। आनन-फानन में परिजन उसे इलाज के लिए आरा के सदर अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन वहां जो नजारा दिखा, उसने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी।

परिजनों का आरोप है कि इमरजेंसी वार्ड में बेड खाली नहीं होने का बहाना बनाकर अस्पताल कर्मियों ने बच्चे को भर्ती करने से मना कर दिया। इतना ही नहीं, कुछ दलालों ने परिजनों को निजी अस्पताल ले जाने की सलाह भी दी। लेकिन गरीब परिवार निजी अस्पताल का खर्च उठाने में असमर्थ था।

जब परिजनों ने प्राइवेट अस्पताल ले जाने से इनकार कर दिया, तो कथित तौर पर बच्चे को इमरजेंसी के भीतर रखने के बजाय बाहर गेट पर ही लिटा दिया गया। मासूम दर्द से कराहता रहा और परिजन बेबस होकर उसके इलाज का इंतजार करते रहे। हैरानी की बात यह रही कि अस्पताल के अंदर-बाहर आने-जाने वाले लोगों में से किसी ने भी उस घायल बच्चे की सुध लेने की कोशिश नहीं की। इस घटना ने एक बार फिर आरा सदर अस्पताल की व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में दलालों का नेटवर्क इतना मजबूत हो गया है कि कई बार मरीजों को जानबूझकर निजी अस्पतालों की ओर धकेला जाता है।

इस पूरे मामले पर अस्पताल प्रबंधन का कोई भी अधिकारी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। हालांकि मामला सामने आने के बाद भोजपुर के जिलाधिकारी तनय सुल्तानिया ने जांच कराने की बात कही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर किसके इशारे पर घायल बच्चे को निजी अस्पताल भेजने की कोशिश की गई? और जब गरीब परिवार इसके लिए तैयार नहीं हुआ तो उसे इमरजेंसी के गेट पर क्यों छोड़ दिया गया? इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर सरकारी अस्पतालों में इलाज का हक किसे मिलता है मरीज को या दलालों को?

रिपोर्ट- आशीष कुमार