औरंगाबाद पुलिस की शर्मनाक सुस्ती: 4 सहेलियों की तड़पकर मौत, एक ही चिता पर अंतिम संस्कार; कई दिन बाद भी अंधेरे में भटक रहे अफसर

चार किशोरियों के शवों को गुपचुप तरीके से जला दिए जाने के बावजूद, स्थानीय पुलिस अब तक मामले की हकीकत तक नहीं पहुँच पाई है। चौकीदार की मौजूदगी के दावों और एसडीपीओ की दलीलों के बीच सवाल खड़ा है कि आखिर पुलिस किसे बचाने के लिए अब तक हाथ पर हाथ धरे बैठी ह

औरंगाबाद पुलिस की शर्मनाक सुस्ती: 4 सहेलियों की तड़पकर मौत,

Aurangabad - औरंगाबाद के सैदपुर में हुए रूहकँपा देने वाले 'सामूहिक सुसाइड' कांड ने पुलिसिया इकबाल पर कालिख पोत दी है। घटना के कई दिन बीत जाने और चार किशोरियों के शवों को गुपचुप तरीके से जला दिए जाने के बावजूद, स्थानीय पुलिस अब तक मामले की हकीकत तक नहीं पहुँच पाई है। चौकीदार की मौजूदगी के दावों और एसडीपीओ की दलीलों के बीच सवाल खड़ा है कि आखिर पुलिस किसे बचाने के लिए अब तक हाथ पर हाथ धरे बैठी है 

तालाब किनारे रची गई 'मौत की पटकथा'

घटना हसपुरा थाना क्षेत्र के अमझर शरीफ पंचायत स्थित सैदपुर गांव की है। जानकारी के अनुसार, महादलित समुदाय की पांच किशोरियां गांव के पास एक तालाब किनारे बैठकर बातचीत कर रही थीं। इसी दौरान सभी ने एक साथ जहरीला पदार्थ खा लिया। जहर खाने के बाद एक बच्ची किसी तरह अपने घर पहुंची और परिजनों को सूचना दी, जिसके बाद उसे इलाज के लिए कहीं बाहर ले जाया गया। उसकी स्थिति और स्थान अब भी रहस्य बना हुआ है। 

खेत में मिलीं लाशें और एक ही चिता पर अंतिम संस्कार

बाकी चार किशोरियां घर जाने के बजाय पास के ही एक गेहूं के खेत में चली गईं, जहां तड़प-तड़प कर उनकी जान निकल गई। गांव में इस घटना को लेकर सन्नाटा पसरा हुआ है। स्थानीय सूत्रों और एक बुजुर्ग महिला के अनुसार, पुलिसिया लफड़े से बचने के लिए परिजनों ने आनन-फानन में चारों किशोरियों के शवों को एक ही चिता पर रखकर जला दिया। ग्रामीण इस मामले पर कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं। 

चौकीदार की भूमिका और पुलिस की विफलता पर सवाल

मामले में पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। दाउदनगर एसडीपीओ अशोक कुमार दास ने बताया कि सूचना मिलने पर चौकीदार को भेजा गया था, लेकिन उसने कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी। हालांकि, अब यह बात सामने आ रही है कि जिस दिन चौकीदार गांव गया था, उस समय चारों शव वहां मौजूद थे। इसके बावजूद पुलिस को भनक न लगना तंत्र की बड़ी नाकामी की ओर इशारा करता है। 

पुराने जख्म हुए ताजा: 2022 की घटना की याद

यह घटना 9 अप्रैल 2022 को औरंगाबाद के ही कासमा थाना क्षेत्र के चिरैला गांव की याद दिलाती है, जहां 6 सहेलियों ने एक साथ जहर खाया था और 5 की मौत हुई थी। उस समय मामला प्रेम प्रसंग से जुड़ा बताया गया था। वर्तमान मामले में भी किसी गहरी साजिश या सामाजिक दबाव की बू आ रही है, लेकिन हकीकत अब भी पुलिस की फाइलों से कोसों दूर है।

रिपोर्ट - दीनानाथ  मौआर