पुलिस संस्मरण दिवस आज : बिहार स्वाभिमान महिला विशेष सशस्त्र बल ने वीर जवानों को किया नमन

पुलिस संस्मरण दिवस के मौके पर उन वीर जवानों को नमन किया गया, जिन्होंने देश और समाज की सुरक्षा के लिए अपनी प्राणों की आहुति दी....

पुलिस संस्मरण दिवस आज : बिहार स्वाभिमान महिला विशेष सशस्त्र
पुलिस संस्मरण दिवस पर वीर जवानो को नमन- फोटो : धीरज पराशर

Bagha : बगहा के वाल्मीकिनगर स्थित बिहार स्वाभिमान महिला विशेष सशस्त्र पुलिस बल के प्रांगण में पुलिस संस्मरण दिवस के अवसर पर उन वीर जवानों को नमन किया गया, जिन्होंने देश और समाज की सुरक्षा के लिए अपनी प्राणों की आहुति दी। इस गरिमापूर्ण और भावुक कार्यक्रम के दौरान कर्तव्य पथ पर अपने प्राण न्योछावर करने वाले अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।


समादेष्टा निर्मला कुमारी के नेतृत्व में हुआ भव्य आयोजन

यह पूरा श्रद्धांजलि कार्यक्रम समादेष्टा निर्मला कुमारी के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। इस मौके पर बल की महिला पुलिसकर्मियों और अधिकारियों ने एकत्र होकर उन साहसी जवानों के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त किया, जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखा और सर्वोच्च बलिदान दिया।


कर्तव्यनिष्ठा और साहस से प्रेरणा लेने का अवसर

आयोजन के दौरान यह संदेश दिया गया कि पुलिस संस्मरण दिवस केवल शहीद जवानों को याद करने का ही दिन नहीं है, बल्कि यह उनके अदम्य साहस, उच्च कोटि के समर्पण और अटूट कर्तव्यनिष्ठा से प्रेरणा लेने का भी एक महत्वपूर्ण अवसर है। इन वीर शहीदों का शौर्य और बलिदान हमेशा पूरे पुलिस बल के लिए एक प्रेरणास्रोत बना रहेगा।


सुरक्षा और समाज कल्याण के लिए जवानों का समर्पण

इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि पुलिस बल के जवान दिन-रात एक करके आम जनता की रक्षा करते हैं और कई बार विषम परिस्थितियों में अपने जीवन का जोखिम उठाते हैं। उनका यह अतुलनीय योगदान समाज को सुरक्षित रखने के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण में भी अपनी अहम भूमिका निभाता है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।


शहीद जवानों की स्मृतियों को समर्पित रहा पूरा कार्यक्रम

कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित अधिकारियों और जवानों ने दो मिनट का मौन रखकर शहीदों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। इस प्रकार यह संस्मरण दिवस न केवल शोक व्यक्त करने का माध्यम बना, बल्कि देश के प्रति अटूट निष्ठा और सेवाभाव की प्रतिबद्धता को भी दोहराने का अवसर साबित हुआ।


धर्मेन्द्र पराशर की रिपोर्ट