समाज को ठेंगा, प्यार को सलाम: प्रेमिका ने तोड़ी सदियों पुरानी परंपरा, खुद बरात लेकर पहुंची ससुराल, ग्रामीणों ने कराई ग्रेंड वेडिंग
बांका जिले के शंभुगंज में एक ऐसी शादी देखने को मिली जहां दूल्हा नहीं, बल्कि दुल्हन खुद बरात लेकर पहुंची। भागलपुर की रानी और बांका के शिवम के इस अनोखे विवाह ने न केवल सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ा, बल्कि ग्रामीणों की मदद से आपसी कलह को भी खत्म कर दिया।
Banka - भागलपुर जिले के सुल्तानगंज (अजगैवीनाथ धाम) के इंग्लिश खानपुर गांव की रहने वाली रानी कुमारी ने वह कर दिखाया जो अक्सर कहानियों में सुना जाता है। अपने प्रेम को मुकाम तक पहुंचाने के लिए रानी खुद बरात लेकर बांका जिले के शंभुगंज प्रखंड के विरनौधा गांव पहुंच गई। दूल्हा शिवम कुमार (पिता: सिंटू मंडल) के घर जब दुल्हन बरात लेकर पहुंची, तो पूरे इलाके में हलचल मच गई।
पारिवारिक दीवारें ढहीं, प्रेम की हुई जीत
शिवम और रानी के बीच लंबे समय से प्रेम संबंध था। दोनों ने जीवन भर साथ रहने की कसमें खाई थीं, लेकिन परिवारों के बीच आपसी मतभेदों और असहमति के कारण यह रिश्ता बार-बार टूट रहा था। तनाव इतना बढ़ गया था कि शादी की उम्मीदें खत्म होती दिख रही थीं। ऐसे में रानी ने साहसिक कदम उठाते हुए खुद पहल की और बरात लेकर शिवम के घर पहुंच गई।
ग्रामीणों की मध्यस्थता और सुखद अंत
दुल्हन को घर के दरवाजे पर बरात के साथ देख ग्रामीण भी हैरान रह गए। इसके बाद विरनौधा गांव के बुजुर्गों और प्रबुद्ध नागरिकों ने पहल की। उन्होंने दोनों परिवारों को एक मेज पर बैठाया और आपसी बातचीत के जरिए मतभेदों को सुलझाया। ग्रामीणों की समझदारी से दोनों परिवार शादी के लिए राजी हो गए और शिवम के घर पर ही सामाजिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह संपन्न हुआ।
सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ने की चर्चा
शादी के बाद नवविवाहित जोड़े पर ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा कर उन्हें आशीर्वाद दिया। आसपास के गांवों में भी यह अनोखा विवाह चर्चा का विषय बना हुआ है। जहां कुछ लोग इसे सामाजिक परंपराओं को चुनौती देने वाला कदम मान रहे हैं, वहीं अधिकतर लोग इसे "प्रेम और सामूहिक समझदारी" की जीत बता रहे हैं।