Bihar CM: 400 साल पुराने तिलडीहा शक्तिपीठ पहुंचे CM सम्राट चौधरी, मां दुर्गा के दरबार में टेका माथा
बांका के तिलडीहा मंदिर में मुख्यमंत्री ने की पूजा-अर्चना, बिहार की खुशहाली और तरक्की की मांगी दुआ, मंदिर कॉरिडोर, पार्किंग और सुविधाओं के विकास की उम्मीदें तेज
Bihar CM: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मंगलवार को बांका जिले के शंभूगंज प्रखंड स्थित ऐतिहासिक तिलडीहा दुर्गा मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने मां दुर्गा के दरबार में माथा टेककर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों की सुख-शांति, समृद्धि, आरोग्यता तथा बिहार के सर्वांगीण विकास की कामना की। करीब 400 वर्षों की आस्था और परंपरा से जुड़े इस शक्तिपीठ में मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर विशेष तैयारियां की गई थीं। जिला प्रशासन ने भी सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के व्यापक इंतजाम किए थे।
चार सदियों की आस्था का प्रतीक है तिलडीहा शक्तिपीठ
बांका जिले का प्रसिद्ध तिलडीहा दुर्गा मंदिर अंग क्षेत्र की धार्मिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। स्थानीय परंपराओं के अनुसार, इस मंदिर का इतिहास करीब 400 वर्षों पुराना है। मंदिर के मिट्टी के गर्भगृह में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना किए जाने की परंपरा इसकी विशिष्ट पहचान है।नवरात्र और दुर्गा पूजा के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। बिहार के विभिन्न जिलों के अलावा पड़ोसी राज्यों से भी भक्त माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर केवल पूजा का स्थल नहीं, बल्कि गहरी आस्था और पारंपरिक विश्वास का केंद्र भी है।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा, माता के चरणों में नवाया शीश
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंदिर पहुंचने पर स्थानीय पुजारियों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ उनका स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने गर्भगृह में पहुंचकर मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मुख्यमंत्री ने माता के चरणों में शीश नवाया और प्रदेश में अमन-चैन, सामाजिक सद्भाव तथा खुशहाली की प्रार्थना की।मंदिर के पुजारियों ने उन्हें माता की चुनरी ओढ़ाकर आशीर्वाद दिया। मुख्यमंत्री के इस धार्मिक दौरे को स्थानीय लोगों ने भी विशेष महत्व दिया।
पैतृक गांव लखनपुर के करीब मंदिर, मुख्यमंत्री का भावनात्मक जुड़ाव
तिलडीहा दुर्गा मंदिर से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का जुड़ाव धार्मिक आस्था के साथ पारिवारिक और भावनात्मक संबंधों से भी जोड़ा जाता है। उनका पैतृक गांव लखनपुर इसी क्षेत्र के समीप स्थित है। यही वजह है कि इस ऐतिहासिक शक्तिपीठ की यात्रा को स्थानीय स्तर पर विशेष अहमियत दी जा रही है।क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री के दौरे से मंदिर के विकास, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में नई पहल हो सकती है।मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में पुलिस तथा प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। श्रद्धालुओं की आवाजाही, यातायात नियंत्रण और भीड़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया। कार्यक्रम के दौरान स्थानीय अधिकारी, जनप्रतिनिधि, एनडीए कार्यकर्ता और ग्रामीण भी मौजूद रहे।
आस्था के साथ विकास की उम्मीदें भी हुईं मजबूत
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की तिलडीहा शक्तिपीठ यात्रा ने एक बार फिर बांका की धार्मिक विरासत और पर्यटन की संभावनाओं को चर्चा में ला दिया है। करीब चार सदियों की परंपरा से जुड़ा यह मंदिर अंग क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा है।
अब स्थानीय लोगों की निगाहें इस बात पर रहेंगी कि मंदिर के संरक्षण, आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आगे क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं। तिलडीहा शक्तिपीठ को बेहतर सुविधाओं से लैस किया जाता है, तो इससे श्रद्धालुओं को सहूलियत मिलने के साथ क्षेत्रीय विकास को भी नई दिशा मिल सकती है।
चंद्रशेखर कुमार भगत कि रिपोर्ट