गंगा जल से बदलेगी बांका और अंग प्रदेश की तकदीर: बिलासी-बदुआ मेगा सिंचाई योजना को मुख्यमंत्री ने दी हरी झंडी

गंगा जल से बदलेगी बांका और अंग प्रदेश की तकदीर: बिलासी-बदुआ
गंगा जल से बदलेगी बांका और अंग प्रदेश की तकदीर- फोटो : चन्द्रशेखर भगत

Banka : बिहार के दक्षिण-पूर्वी हिस्से (अंग क्षेत्र) में सदियों पुरानी खेती की तस्वीर बदलने और सूखाग्रस्त इलाकों को हरा-भरा बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक एवं महत्वाकांक्षी कदम उठाया है। मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी ने जलवायु परिवर्तन की मार झेल रहे बांका, भागलपुर और मुंगेर जिलों के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए 'गंगा जल उद्वह (लिफ्ट) योजना' को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। मुख्यमंत्री के कड़े निर्देश पर जल संसाधन विभाग ने इस मेगा सिंचाई परियोजना के त्वरित कार्यान्वयन का खाका तैयार कर लिया है। इस दूरगामी योजना के तहत सुल्तानगंज के समीप से गंगा नदी के पानी को लिफ्ट कर बदुआ, खड़गपुर और बिलासी जलाशयों में संग्रहित किया जाएगा, जिससे कृषि क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होगी।


लंबे समय से सूखे की मार झेल रहे कमांड क्षेत्रों में अब सालभर संभव हो सकेगी दोहरी खेती

सरकारी आंकड़ों और विभागीय ब्लूप्रिंट के अनुसार, इस महा-परियोजना के धरातल पर उतरने से कुल 51,160 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि को बारहमासी सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसमें से अकेले बदुआ जलाशय के माध्यम से बांका, भागलपुर और मुंगेर जिलों के कुल 45,850 हेक्टेयर क्षेत्र को सीधे पानी मिलेगा, जबकि मुंगेर के खड़गपुर जलाशय से 5,310 हेक्टेयर भूमि संचित होगी। इसके अतिरिक्त, बांका जिले के फुल्लीडूमर प्रखंड स्थित मध्यागिरि एवं बिलासी जलाशय के जरिए फुल्लीडूमर, शंभूगंज और अमरपुर प्रखंड के 4,204 हेक्टेयर निर्धारित कमांड क्षेत्र में शत-प्रतिशत सिंचाई सुनिश्चित की जाएगी। पानी की तीव्र कमी से जूझ रहे इन इलाकों के किसानों के लिए अब साल में दो से तीन फसलें उगाना मुमकिन हो सकेगा।


घटते जलस्तर और आधे से कम रह गई सिंचाई क्षमता को पुनर्जीवित करेगी गंगा की धार

जल संसाधन विभाग की उच्चस्तरीय तकनीकी रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में अनियमित मानसून और जलवायु परिवर्तन के कारण क्षेत्र के पारंपरिक जलाशयों की जल भंडारण क्षमता में भारी गिरावट आई थी। आंकड़ों के अनुसार, बदुआ जलाशय की क्षमता में 39.78 प्रतिशत और खड़गपुर जलाशय की क्षमता में 69.59 प्रतिशत तक की भारी कमी दर्ज की गई थी। इसके कारण, जहां पहले इन जलाशयों से 51 हजार हेक्टेयर से अधिक की सिंचाई का लक्ष्य था, वहीं पानी के अभाव में यह घटकर महज 19,136 हेक्टेयर क्षेत्र तक सिमट कर रह गया था। इसी गंभीर संकट और किसानों की बदहाली को देखते हुए सरकार ने गंगा जल को इन डैमों में डाइवर्ट कर इन्हें पुनर्जीवित करने का मास्टर प्लान बनाया है।


1866 करोड़ रुपये की वृहद योजना, 26 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन से जुड़ेगा नेटवर्क

इस पूरी पाइपलाइन और लिफ्ट परियोजना के तकनीकी पहलुओं की बात करें तो इसके निर्माण पर सरकार भारी-भरकम बजट खर्च करने जा रही है। योजना के पहले चरण के तहत बिजीखोरवा सिंचाई कॉलोनी में एक अत्याधुनिक डिटेंशन टैंक का निर्माण कराया जा रहा है, जहां तीन शक्तिशाली मोटर पंपों की सहायता से लगभग 15.02 मिलियन क्यूबिक मीटर गंगा जल का उठाव किया जाएगा। इस पानी को जलाशयों तक ले जाने के लिए करीब 26 किलोमीटर लंबी मुख्य पाइपलाइन और 1.15 किलोमीटर की अतिरिक्त पाइपलाइन बिछाई जाएगी, जिसकी अनुमानित लागत 174.52 करोड़ रुपये है। वहीं, गंगा नदी के जल को मुख्य बदुआ और खड़गपुर जलाशयों तक पूरी तरह री-रूट और संग्रहित करने के संपूर्ण प्रोजेक्ट पर कुल 1866.11 करोड़ रुपये की भारी प्रशासनिक राशि खर्च की जाएगी।


गन्ने की खेती की होगी वापसी, भू-जल स्तर सुधरने से दूर होगा पेयजल का भी संकट

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और किसानों में इस योजना को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है। फुल्लीडूमर के जिला परिषद सदस्य विश्वजीत दीपांकर और समाजसेवी प्रशांत कापरी ने सरकार के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि सिंचाई नेटवर्क मजबूत होने से बांका जिले में कभी प्रमुखता से होने वाली गन्ने की खेती की दोबारा वापसी होगी, जिससे किसानों की आय दोगुनी हो जाएगी। इसके अलावा, डैमों में पानी रहने से क्षेत्र का तेजी से गिरता भू-जल स्तर (वाटर टेबल) फिर से ऊपर आ जाएगा, जिससे गर्मियों में होने वाले भीषण पेयजल संकट से भी मुक्ति मिलेगी। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि खेतों तक पर्याप्त पानी पहुंचने से धान, गेहूं, मक्का और दलहन का बंपर उत्पादन होगा, जिससे कृषि आधारित स्थानीय रोजगार बढ़ेंगे और रोजगार के लिए होने वाले पलायन में भारी कमी आएगी।


चन्द्रशेखर भगत की रिपोर्ट