उम्र बढ़ी, शरीर थका, पर भक्ति अडिग: 1982 से अनवरत जारी है कृष्णा बम की 'डाक कांवर' यात्रा

मुजफ्फरपुर की मशहूर डाक कांवरिया कृष्णा बम 43वीं बार सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर 105 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा पर बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए निकल पड़ी हैं। बांका के कच्ची कांवरिया पथ पर उनका आशीर्वाद लेने जनसैलाब उमड़ पड़ा।

: Krishna Bam Deoghar Yatra
43वीं बार देवघर रवाना हुईं कृष्णा बम: टूटे घुटने भी नहीं डिगा सके हौसला- फोटो : Reporter

आस्था, संकल्प और अटूट विश्वास की मिसाल बन चुकीं मुजफ्फरपुर की प्रसिद्ध डाक कांवरिया कृष्णा बम रविवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सुल्तानगंज से पवित्र गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर के लिए रवाना हुईं। पिछले 43 वर्षों से लगातार सावन महीने में सुल्तानगंज से देवघर तक कठिन डाक कांवर यात्रा करने वाली कृष्णा बम के दर्शन के लिए कच्ची कांवरिया पथ पर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।


अजगैबीनाथ से जल भरकर 105 किमी की पदयात्रा शुरू

कृष्णा बम ने अजगैबीनाथ धाम स्थित पवित्र उत्तरवाहिनी गंगा से गंगाजल भरा और अपने जत्थे के साथ करीब 105 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा की शुरुआत की। सोमवार को वे बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करेंगी। उनकी इस यात्रा के दौरान जत्थे में शामिल सभी कांवरिया पूरे रास्ते झूमते हुए, भजन-कीर्तन और 'बोल बम' के गगनभेदी जयघोष के साथ निरंतर आगे बढ़ते रहे।

बांका के कांवरिया पथ पर उमड़ा जनसैलाब

बांका जिले के धौरी स्थित कच्ची कांवरिया पथ पर कृष्णा बम के पहुंचने की खबर फैलते ही आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग उनके स्वागत में उमड़ पड़े। श्रद्धालुओं ने उनका दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। विशेष रूप से महिला कांवरियों ने उनसे मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया और पदयात्रा की प्रेरणा ली, जबकि स्थानीय लोगों ने जगह-जगह जत्थे का जोरदार स्वागत किया।


'घुटने टूटे, लेकिन बाबा की कृपा से हौसला बुलंद'

उम्र बढ़ने और शारीरिक चुनौतियों के बावजूद कृष्णा बम की आस्था और उत्साह में कोई कमी नजर नहीं आई। यात्रा के दौरान स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि उनके दोनों घुटने टूट चुके थे, लेकिन बाबा बैद्यनाथ की असीम कृपा से इस बार स्थिति में काफी सुधार है। उन्होंने भावुक होकर कहा कि जब तक बाबा बैद्यनाथ का बुलावा आता रहेगा, तब तक यह यात्रा इसी तरह जारी रहेगी।


1982 से अब तक अनवरत जारी है भक्ति का सफर

अपनी धार्मिक यात्रा के इतिहास को साझा करते हुए कृष्णा बम ने बताया कि वर्ष 1982 में उन्होंने पहली बार सुल्तानगंज से गंगाजल उठाकर बाबा बैद्यनाथ धाम में जलाभिषेक किया था। उस ऐतिहासिक शुरुआत के बाद से सावन का एक भी साल ऐसा नहीं बीता, जब वे बाबा धाम न पहुंची हों। पिछले 43 वर्षों से भक्ति और समर्पण का यह सिलसिला बिना किसी रुकावट के लगातार जारी है।


केवल परंपरा नहीं, अटूट समर्पण का प्रतीक

कृष्णा बम के अनुसार, यह कांवर यात्रा उनके लिए महज एक वार्षिक धार्मिक परंपरा या औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह बाबा बैद्यनाथ के प्रति उनके अटूट विश्वास और सर्वस्व समर्पण का सच्चा प्रतीक है। उन्होंने कहा, "जब तक बाबा के दरबार से बुलावा आता रहेगा, तब तक हर परिस्थिति को पार करते हुए मैं इसी प्रकार बाबा धाम आती रहूंगी।"


पुलिस के अभेद्य सुरक्षा घेरे में आगे बढ़ा जत्था

कृष्णा बम की प्रसिद्ध यात्रा को देखते हुए बांका जिला प्रशासन और पुलिस बल पूरी तरह सतर्क नजर आए। पूरे कच्ची कांवरिया पथ पर अतिरिक्त पुलिस बलों की तैनाती की गई थी और उनके जत्थे को एक सुरक्षित घेरे में आगे बढ़ाया गया। पुलिसकर्मी पूरे रास्ते लगातार चौकसी बरतते रहे, ताकि इस कठिन यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।


पीएम मोदी से बाबा धाम के कायाकल्प की अपील

यात्रा के दौरान कृष्णा बम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बाबा बैद्यनाथ धाम में श्रद्धालुओं की सुविधाओं को और बेहतर बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जिस तर्ज पर काशी विश्वनाथ और उज्जैन के महाकाल मंदिर का भव्य विकास हुआ है, ठीक वैसे ही बाबा बैद्यनाथ धाम में भी अत्याधुनिक व्यवस्थाएं विकसित की जानी चाहिए। अंत में उन्होंने बाबा बैद्यनाथ से देश की उन्नति, शांति, समृद्धि और समस्त देशवासियों के कल्याण की प्रार्थना की।

बांका से चन्द्रशेखर कुमार भगत की रिपोर्ट